For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल ( आप से मैं प्यार करना चाहता हूँ )

(फ़ाइलातुन ---फ़ाइलातुन ---फ़ाइलातुन )

बह्रे आतिश पार करना चाहता हूँ |
आप से मैं प्यार करना चाहता हूँ |

जिस खता की आपने मुझको सज़ा दी
वो खता सौ बार करना चाहता हूँ |

शहरे दिलबर छोड़ कर जाने से पहले
मैं विसाले यार करना चाहता हूँ |

बंदिशें मेरी निगाहों पर हैं लेकिन
उन का मैं दीदार करना चाहता हूँ |

फेर कर बैठे हुए हैं आप चहरा
मैं निगाहें चार करना चाहता हूँ |

मैं ख़ुदा हाफ़िज़ तुम्हें कहने से पहले
इश्क़ का इज़हार करना चाहता हूँ |

दिल भला है चीज़ क्या तस्दीक़ मेरा
 जाँ   निसारे यार  करना  चाहता  हूँ |

(मौलिक व् अप्रकाशित )

Views: 252

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 6, 2018 at 2:25pm

जनाब हर्ष साहिब ,आपकी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Samar kabeer on March 6, 2018 at 11:33am

"जाँ"के बाद कामा लगाइएगा ।

Comment by Harash Mahajan on March 6, 2018 at 10:01am

आदर्णीयय तस्दीक अहमद जी आदाब । बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई है साहब । बहुत बहुत बधाई ।

सादर ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 6, 2018 at 9:28am

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया । आपकी बात सही है ,सानी मिसरा यूँ तब्दील कर लिया है "जाँ निसारे यार करना चाहता हूं" 

Comment by Samar kabeer on March 5, 2018 at 10:43pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

'जान तुहपर वार करना चाहता हूँ'

इस मिसरे में क़ाफ़िया वो अर्थ नहीं दे रहा है,जो आपने लिया है ,आप 'जान तुझपर वार' दूँ' कहना चाहते हैं,लेकिन यहाँ इसका अर्थ हो रहा है 'जान तुझपर हमला करना चाहता हूँ',और ये संशय रदीफ़ की वजह से पैदा हो रहा है,'देना चाहता हूँ' होती तो ठीक होता, लेकिन 'करना चाहता हूँ'रदीफ़ के साथ 'वार' शब्द का अर्थ "हमला" ही होगा, जैसे मिसाल के तौर पर :-

'दुश्मनों पर वार करना चाहता हूँ'

उम्मीद है आप मेरी बात पर ग़ौर फरमाएंगे ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 5, 2018 at 7:32pm

मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब आदाब ,ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Mohammed Arif on March 5, 2018 at 5:43pm

आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,

                                 बहुत ही उम्दा और आसान लफ़्जों में ग़ज़ल कही आपने । मुझे पूरी ग़ज़ल बहुत पसंद है । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 5, 2018 at 12:45pm

मुहतरम जनाब तेजवीर साहिब ,ग़ज़ल में आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by TEJ VEER SINGH on March 5, 2018 at 12:10pm

हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी।बेहतरीन गज़ल।

जिस खता की आपने मुझको सज़ा दी
वो खता सौ बार करना चाहता हूँ |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"//गढ़ गये पुरखे जो मजहब की हमारे बीच में'// इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं:- 'बीच जिसके दफ़्न…"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और मार्गदर्शन के लिए आभार ।  इंगित मिसरे को…"
19 hours ago
vijay nikore posted a blog post

जीवन्तता

जीवन्ततामाँकहाँ हो तुम ?अभी भी थपकियों में तुम्हारीमैं मुँह दुबका सकता हूँ क्यातुम्हारा चेहरा…See More
22 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ओबीओ के तरही मिसरे पर दूसरी ग़ज़ल भी अच्छी हुई है,बधाई…"
yesterday
Samar kabeer commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : भीड़ (गणेश जी बाग़ी)
"जनाब गणेश जी 'बाग़ी' साहिब आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post प्यार का प्रपात
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब, बहुत उम्द: रचना हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post "मै" इक  समंदर में तब्दील हो जाता हूँ
"जनाब मुकेश श्रीवास्तव जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रविभसीन जी, सादर अभिवादन । गजल को समय देने और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद । "
yesterday
R.k YADAV (अभ्युदय ) updated their profile
yesterday
rakesh sharma is now a member of Open Books Online
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service