For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गुलज़ार प्यार का

गुलज़ार प्यार का

हर रात  उसी ग़मरात का  ज़िक्र  न  कर

नातुवां  ग़म को अपने  तू  गैरअहम  कर

ज़िन्दगी  में  माना गर्द-ए-सफ़र  है  बहुत

ग़म-ए-पिनहाँ का रोज़ रंज-ओ-ग़म न कर

यूँ खामोश न रह,  उदास और न हो

वादा यह पक्का कि लौट आऊँगा मैं

दिन में  सही या रातों में तुम्हारी.. या

आ कर मुस्कराऊँगा ख़्वाबों में कभी

गालों पर मेरे छुअन तुम्हारी गुलअंदाम

मोहब्बत से तुम्हारी  ज़रखेज़ रहा दिल

“फिर मिलने की” बाकी हो आस  जहाँ

छोड़ जाने का फिर यह इलज़ाम क्यूँ हो

गुलशन की मेरे  गुलशन-आरा रही हो

बिछोह में इश्क  फिर बदनाम क्यूँ हो

प्यार को जिसके मिला हो प्यार तुम्हारा

मोहब्बत में वहाँ कोई मुफ़्लिसी क्यूँ हो

मिलते ही खिल जाती हो देख तब्बसुम मेरा

मैं भी तलबगार हूँ हमेशा खुशी का तुम्हारी

जब तक है तुमको  मुझ पर एतिबार इतना

दिल तेरा मायूस क्यूँ हो, गर्दिशज़द: क्यूँ हो

                       ------

 ---  विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित}

              -----

गुलज़ार         = बाग, वाटिका

ग़मरात          = मुसीबत, कष्ट

नातुवाँ           = अशक्त, निर्बल

ग़ैरअहम कर   = महत्व्हीन

गर्द-ए-सफ़र    = यात्रा की थकान

ग़म-ए-पिनहाँ   = प्रेम की व्यथा

रंज-ओ-गम     = रंज और ग़म

गुलज़ार          = बाग

गुलअंदाम       = फूल जैसा कोमल

ज़रखेज़          = अच्छी उपजाऊ भूमि

गुलशन-आरा  = माली

मुफ़्लिसी         = गरीबी

तब्बसुम          = मुस्कराहट

तलबगार         = अभिलाषी

गर्दिशज़द:      = मुसीबत का मारा, काल चक्र ग्रस्त

Views: 640

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on May 9, 2018 at 7:44am

आपका हार्दिक आभार, आदरणीय लक्ष्मण जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 9, 2018 at 6:04am

आ. भाई विजय जी, सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई ।

Comment by vijay nikore on April 25, 2018 at 2:21pm

आपका हार्दिक आभार, आदरणीय आशुतोष जी

Comment by vijay nikore on April 25, 2018 at 2:18pm

आपका हार्दिक आभार, आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 23, 2018 at 12:12pm

आदरणीय विजय सर ..आपकी इस रचना के साथ उर्दू के शब्दों के अर्थ से इस दिलकश रचना का लुत्फ़ उठाने के साथ शब्दकोष में बृद्धि का सुअवसर प्राप्त हुआ. रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर प्रणाम के साथ 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 21, 2018 at 4:14pm

कठिन शब्दों के अर्थ सहित बेहतरीन  बहुआयामी अर्थ लिए सार्थक रोमांटिक सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब विजय निकोरे साहिब।

Comment by vijay nikore on April 21, 2018 at 12:50pm

आदरणीय भाई समर जी, रचना की सराहना के लिए और मार्ग-दर्शन के लिए दिल से आभार। संशोधन कर दिए हैं ... बहुत-बहुत धन्यवाद।

Comment by Samar kabeer on April 21, 2018 at 10:59am

जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,बहुत उम्दा रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'गमो रंज' की सहीह तरकीब है,"रंज-ओ-ग़म"

'वायदा' कोई शब्द ही नहीं है,सहीह शब्द है "वादा"

'हमेशां' को "हमेशा" कर लें ।

'ऐतबार' को "एतिबार" कर लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Saturday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service