For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल नूर की - याद आया है गुज़रा पल कोई

याद आया है गुज़रा पल कोई
लेगी अँगड़ाई फिर ग़ज़ल कोई.
.
कोशिशें और कोई करता है
और हो जाता है सफल कोई.
.
ज़िन्दगी एक ऐसी उलझन है
जिस का चारा नहीं न हल कोई.
.
इश्क़ में हम तो हो चुके रुसवा
वो करें तो करें पहल कोई.
.
हिज्र में आँसुओं का काम नहीं   
ये इबादत में है ख़लल कोई.
.
इक सिकंदर था और इक हिटलर
आज तू है तो होगा कल कोई.
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित  

Views: 208

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 10, 2018 at 2:49pm

धन्यवाद आ. लक्ष्मण धामी जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 10, 2018 at 2:48pm

धन्यवाद आ. तस्दीक़ अहमद साहब 
वो शेर छोड़ ही  दिया है ... उस के यहाँ होने की ज़रूरत भी नहीं थी 
सादर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 10, 2018 at 5:02am

आ. भाई नीलेश जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 9, 2018 at 7:55pm

आ.जनाब नीलेश नूर साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमाएँ।  शेर3 का सानी मिसरे यूँ करके देखियेगा।

"जिसका चारा है और न हल कोई "। --सादर

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 9, 2018 at 7:12pm

धन्यवाद आ. समर सर 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 9, 2018 at 7:12pm

धन्यवाद आ. राम शिरोमणि जी 

Comment by Samar kabeer on May 9, 2018 at 4:48pm

क्यूँ इबादत में हो ख़लल कोई'

बहुत ख़ूब तरमीम ।

Comment by ram shiromani pathak on May 9, 2018 at 4:30pm

बहुत खूब नीलेश भाई।।बधाई

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 9, 2018 at 3:54pm

आ. समर सर,

तीसरा शे'र फिल्हास ख़ारिज कर दिया है ..
पाँचवा शेर अब यूँ पढ़ा जाए...
.
हिज्र में आँसुओं का काम नहीं   
क्यूँ  इबादत में हो  ख़लल कोई. 
.
सादर 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 9, 2018 at 3:47pm

शुक्रिया आ. समर सर,
आपका कहना बिलकुल ठीक है .. मैं अभी काम क्र ही रहा हूँ इसपर..
पोस्ट करने की जल्दबाज़ी में मिसरे लचर रह गए..
पुन: कहता हूँ इन्हें 
सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई मुनीश जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई दयाराम जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई अमर जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई आमोद जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई दयाराम जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई अमित जी, गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्वाद ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. आमोद जी, गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्वाद ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए आभार ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. राजेश दी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्वाद ।"
3 hours ago
Dr Amar Nath Jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"हार्दिक आभार आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी। बस ग़ज़ल कहना सीख रा हूँ। "
7 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service