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ग़ज़ल(हुस्न और इश्क़ की कहानी है)

(फ़ा इलातुन--मफाइलुन--फ़ेलुन)

हुस्न और इश्क़ की कहानी है।
एक है आग एक पानी है।

कह रही है वफ़ा जिसे दुनिया
उसको पाने की मैं ने ठानी है।

बन के आए हैं वो तमाशाई
आग घर की किसे बुझानी है।

सोच कर कीजियेगा तर्के वफ़ा
अपनी यारी बहुत पुरानी है।

घिर गए मुश्किलों में और भी हम
आप की बात जब से मानी है।

वो अदावत से काम लेते हैं
हम को जिन से वफ़ा निभानी है।

प्यार को क्या मिटाएगी दुनिया
ख़ुद ही तस्दीक़ ये तो फ़ानी है।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 11, 2018 at 2:24pm

जनाब अजय कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Ajay Kumar Sharma on May 11, 2018 at 12:22pm

वाह भई वाह !

शानदार गजल. मजा आ गया....

Comment by Ajay Kumar Sharma on May 11, 2018 at 12:21pm

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 10, 2018 at 1:15pm

मुहतरम जनाब तेजवीर साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by TEJ VEER SINGH on May 10, 2018 at 1:04pm

हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी।बेहतरीन गज़ल।

वो अदावत से काम लेते हैं 
हम को जिन से वफ़ा निभानी है।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 10, 2018 at 12:53pm

मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब आदाब ,ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Mohammed Arif on May 10, 2018 at 8:08am

आदरणीय तस्दीक़ अहमद साहब आदाब,

                               एक और लाजवाब ग़ज़ल का तोहफा । वल्लाह कमाल है । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय दे चुके हैं , संज्ञान लें ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 9, 2018 at 9:38pm

मुहतरम जनाब विजय साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by vijay nikore on May 9, 2018 at 8:58pm

आपकी गज़ल अच्छी लगी। मुबारकबाद, जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 9, 2018 at 7:50pm

आ.जनाब नीलेश नूर साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

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