For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल(हुस्न और इश्क़ की कहानी है)

(फ़ा इलातुन--मफाइलुन--फ़ेलुन)

हुस्न और इश्क़ की कहानी है।
एक है आग एक पानी है।

कह रही है वफ़ा जिसे दुनिया
उसको पाने की मैं ने ठानी है।

बन के आए हैं वो तमाशाई
आग घर की किसे बुझानी है।

सोच कर कीजियेगा तर्के वफ़ा
अपनी यारी बहुत पुरानी है।

घिर गए मुश्किलों में और भी हम
आप की बात जब से मानी है।

वो अदावत से काम लेते हैं
हम को जिन से वफ़ा निभानी है।

प्यार को क्या मिटाएगी दुनिया
ख़ुद ही तस्दीक़ ये तो फ़ानी है।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 116

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 11, 2018 at 2:24pm

जनाब अजय कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Ajay Kumar Sharma on May 11, 2018 at 12:22pm

वाह भई वाह !

शानदार गजल. मजा आ गया....

Comment by Ajay Kumar Sharma on May 11, 2018 at 12:21pm

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 10, 2018 at 1:15pm

मुहतरम जनाब तेजवीर साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by TEJ VEER SINGH on May 10, 2018 at 1:04pm

हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी।बेहतरीन गज़ल।

वो अदावत से काम लेते हैं 
हम को जिन से वफ़ा निभानी है।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 10, 2018 at 12:53pm

मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब आदाब ,ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Mohammed Arif on May 10, 2018 at 8:08am

आदरणीय तस्दीक़ अहमद साहब आदाब,

                               एक और लाजवाब ग़ज़ल का तोहफा । वल्लाह कमाल है । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय दे चुके हैं , संज्ञान लें ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 9, 2018 at 9:38pm

मुहतरम जनाब विजय साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by vijay nikore on May 9, 2018 at 8:58pm

आपकी गज़ल अच्छी लगी। मुबारकबाद, जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 9, 2018 at 7:50pm

आ.जनाब नीलेश नूर साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"मुहतरम जनाब अशोक जी आदाब,  मैं आप सभी सीनियर हज़रात का बे इंन्तिहा मशकूर हूँ कि मुझ जेसे तालिब…"
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"मुहतरम जनाब सौरभ पांडे साहिब आदाब , क़ीमती वक़्त देकर मेरी ग़ज़ल पर हौसला बढाती प्रतिक्रया…"
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"मोहतरमा वंदना जी आदाब , सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया "
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब अफ़रोज़ सहर साहिब आदाब , हौसला अफ़जा़ई का बहुत बहुत शुक्रिया "
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब सुरख़ाब बशर साहिब आदाब , हौसला अफ़जा़ई का शुक्रिया "
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब संतोष साहिब जी आदाब,  सुख़न नवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया "
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"ग़ज़ल ===== छोड़ कर तू.. चला गया है मुझे सबसे कहना ये भा गया है मुझे   क्या हुआ वो निभा नहीं पाया…"
2 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"एक और शानदार पेशकश के लिए मुबारकबाद जनाब समर साहब एक बात जाननी थी ...."आफ़ियत है इसी में मेरी…"
3 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब सुरख़ाब बशर साहिब आदाब उम्दा अशआर से सजी बहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारक बाद "
3 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"हुस्न जलवे दिखा गया है मुझे! ख़ुद से ग़ाफ़िल बना गया है मुझे ! अबरू-ए-ख़म दिखा के वो…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदाब। मेरी इस पहली प्रविष्टि-पटल पर अपना समय देकर स्नेहिल हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत…"
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"ग़ज़ल 2 यूँ दिलासा दिया गया है मुझेतू मेरा है कहा गया है मुझे छिड़ गया होगा तज़्किरा तेराफ़ासले पर रखा…"
4 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service