For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

छोटा वकील (लघुकथा)

"हमने तो सुना है कि बहुत ज़रूरी होने पर देर रात तक कोर्ट लग जाती है; वकील और जज साहिबान सब हाज़िर हो कर फैसले करते, करवाते हैं?" धरनीधर ने अपने विधायक महोदय से यह कहते हुए पूछा - "हमारे पास सारे सबूत हैं! सुनीता की आबरू लूटने वालों को तीन साल बाद भी कोई सज़ा न हुई? आप चाहें, तो सब तुरंत ही निबट जाये!"


"दरअसल सब लेन-देन के कारोबार हैं! तुमने न तो कोई बड़ा वकील किया है, न ही तुम्हारे वकील की वैसी कोई पहुंच है!" ऐसी कुछ दलीलें सुनाते हुए विधायक ने कहा - "तुम्हारे पास जितना जो कुछ बचा है, उससे  बाक़ी ज़िन्दगी चुपचाप गुज़ार परिवार के साथ, इसी में तुम्हारा भला है ऐसी लहर में!"


"मेरा वकील है तो अनुभवी और अक़्लमंद! इस लहर में शामिल नहीं है, बस!" मुख्य द्वार की ओर रुख़ करते हुए धरनीधर ने कहा।


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 190

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on June 1, 2018 at 6:44am

बड़े वकील... उनकी पहुँच और न्याय ... पानी और तेल के समान हैं ... हम एक किस्सा ऐसा भी जानते हैं जहाँ बड़े वकील ने ही फ़र्ज़ी गवाह का इन्तज़ाम करने के लिए किसीको सलाह दी। आपकी हर लघु कथा कुछ गहरे उतर जाती है, आ० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 30, 2018 at 1:38am

मेरी इस रचना पर समय देकर अवलोकन कर अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई के साथ अपने विचार सांझा करने के लिये तहे दिल से बहुत- बहुत शुक्रिया मुहतरमा  नीता कसार साहिबा, मुहतरमा नीलिमा उपाध्याय साहिबा, जनाब तेजवीर सिंह साहिब, जनाब महेंद्र कुमार साहिब और जनाब  सुशील सरना साहिब।

Comment by Nita Kasar on May 29, 2018 at 6:22pm

बड़े वक़ील को प्रतीक बना सुंदर कथा लिखी है ।आजकल इन्हीं लोगों की पौ बारह है ।बधाई कथा के लिये आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।

Comment by Neelam Upadhyaya on May 28, 2018 at 11:36am

आदरणीय शेख उसमानी जी, बड़े वकीलों पर व्यंग्य कसती बढ़िया लघुकथा । प्रस्तुति के लिए लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by Mahendra Kumar on May 28, 2018 at 10:40am

'बड़े' वकीलों पर अच्छा व्यंग्य किया है आपने आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी. हार्दिक बधाई प्रेषित है. सादर.

Comment by TEJ VEER SINGH on May 26, 2018 at 12:15pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी। अच्छी व्यंगपूर्ण लघुकथा।

Comment by Sushil Sarna on May 25, 2018 at 5:38pm

वाह वर्तमान हालात पर सुंदर लघु कथा आदरणीय ... हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on rajesh kumari's blog post एक रदीफ़ पर दो ग़ज़लें "छत पर " (गज़ल राज )
"बहना राजेश कुमारी जी आदाब,दोनों ग़ज़लें अच्छी  हुई हैं,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ…"
5 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन लगता है जल्द बाज़ी में पोस्ट की है,बधाई स्वीकार…"
5 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post झूठ फैलाते हैं अक़्सर जो तक़ारीर के साथ (१५)
"आप दोनों की महब्बत के लिए शुक्रगुज़ार हूँ"
6 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'उसे है ख़ास…"
6 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post तीन क्षणिकाएं :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

गद्दार बन गये जो ढब आदर किया गया - गजल

२२१/२१२१/ २२२/१२१२ पाषाण पूजने को जब अन्दर किया गया हर एक देवता को तब पत्थर किया गया।१। उनके…See More
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'गठरी, छतरियां और वह' (लघुकथा)
"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब इस हौसला अफ़ज़ाई हेतु।"
9 hours ago
Md. anis sheikh commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post झूठ फैलाते हैं अक़्सर जो तक़ारीर के साथ (१५)
"आप का ही नहीं गहलोत जी हमारा भी यही हाल है अपनी गलती दिखाई नहीं देती ,और बात सिर्फ गलती पकड़ने कि…"
10 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब राज़ नवाद्वी साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
11 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari posted a blog post

एक रदीफ़ पर दो ग़ज़लें "छत पर " (गज़ल राज )

१.हास्य उठाई है़ किसने ये दीवार छत पर  अब आएगा कैसे  मेरा यार छत पर  अगर उसके वालिद  का ये काम…See More
16 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post लंगडा मज़े में है (हास्य व्यंग ग़ज़ल 'राज')
"आद० फूल सिंह जी हार्दिक आभार बहुत बहुत शुक्रिया "
17 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post लंगडा मज़े में है (हास्य व्यंग ग़ज़ल 'राज')
"आद० नरेन्द्र सिंह जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया "
17 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service