For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

और प्रधानमंत्री जी गायब हो गये। ‘‘क्या? प्रधानमंत्री जी गायब हो गये? यह कैसे हो सकता है?’’ हर किसी के जे़हन में यही सवाल था।

उस दिन जब रसोई में प्रधानमंत्री जी बच्चों के लिए पापड़ तल रहे थे तो पापड़ तलते-तलते न जाने कहाँ अचानक गायब हो गये। जैसे ही यह ख़बर न्यूज़ चैनल्स पर फ़्लैश हुई तो सारा देश सकते में आ गया।

‘‘हम लोग जी जान से लगे हैं और बहुत जल्द ही प्रधानमंत्री जी का पता लगा लेंगे। आप लोग निश्चिन्त रहिए।’’ जाँच समिति के प्रमुख ने देश को आश्वस्त करते हुए कहा।

‘‘आपने उन्हें कहाँ छुपा कर रखा है?’’ शक की सुई सबसे पहले प्रधानमंत्री जी के भाई पर गयी। ‘‘मैं भला उन्हें क्यों गायब करूँगा?’’ भाई ने हैरत से कहा। ‘‘क्योंकि वो आपके कपड़े चुरा कर पहन लिया करते थे।’’

शक की अगली सुई प्रधानमंत्री जी की बहन पर जा कर टिकी। ‘‘आपने उन्हें कहाँ छुपा कर रखा है?’’ बहन अवाक थी। ‘‘बनिये मत, हमें सब मालूम है। आपने अपने भाई का अपहरण सिर्फ़ इसलिए कर लिया क्योंकि वो आपसे ज़्यादा अच्छे पापड़ बनाते थे और होली पे लोग आपकी नहीं, उनकी तारीफ़ करते थे।’’

जाँच समिति ने हर आदमी पर शक किया, हर किसी से पूछताछ की, देश का चप्पा-चप्पा छान मारा लेकिन प्रधानमंत्री जी का कहीं पता नहीं चला। ‘‘हम लोग जी जान से लगे हैं और बहुत जल्द ही प्रधानमंत्री जी का पता लगा लेंगे। आप लोग निश्चिन्त रहिए।’’ जाँच समिति के प्रमुख ने देश को पुनः आश्वस्त करते हुए कहा।

किन्तु प्रधानमंत्री जी की माँ इन सब प्रयत्नों से सन्तुष्ट नहीं थीं। वो चीख़-चीख़ कर सबसे कहती थीं, ‘‘ये लोग मेरे बेटे को क्या ढूँढेंगे, उसे तो इन्हीं लोगों ने गायब किया है।’’ बाद में सरकारी रिपोर्ट से यह बात पता चली कि उनकी माँ पागल थीं।

आज इतने वर्ष बीतने के बाद भी जाँच समिति के हाथ पूरी तरह से खाली हैं। किसी को यह नहीं समझ आ रहा कि प्रधानमंत्री जी को ज़मीन खा गयी या आसमान निगल गया। पर जाँच अधिकारियों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। वो अभी भी प्रधानमंत्री जी के भाई और बहन से लाॅकअप में पूछताछ कर रहे हैं। और माँ? माँ को अभी भी संसद भवन के बाहर चीख़ते हुए सुना जा सकता है, ‘‘ये लोग मेरे बेटे को क्या ढूँढेंगे, उसे तो इन्हीं लोगों ने गायब किया है।’’

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 73

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mahendra Kumar on June 13, 2018 at 8:27pm

हार्दिक आभार आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान जी. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर.

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 13, 2018 at 8:14pm

जनाब महेंद्र कुमार साहिब, अच्छी लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |

Comment by Mahendra Kumar on June 13, 2018 at 8:10pm

अपने विचारों से अवगत कराने हेतु बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी, सादर आदाब. कईयों ने तो मेरी रचनाओं पर आना ही छोड़ दिया है. बहरहाल, शीर्षक को ले कर मैंने भी काफी चिंतन किया पर कोई अन्य ऐसा शीर्षक मुझे भी नहीं मिला जो इसकी सांकेतिकता को बरकरार रख सके. आपने इस शीर्षक का अर्थ नेट पर खोजा, यह साहित्य के प्रति आपके प्रेम को दर्शाता है. प्रतिक्रिया हेतु पुनः बहुत-बहुत धन्यवाद. हार्दिक आभार. सादर.

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 12, 2018 at 12:42pm

आदाब। दो संज्ञा-नामों के साथ रिश्तोंं की पीड़ाओं को, वर्तमान भारतवासियों की पीड़ाओं को बाख़ूबी शाब्दिक करती जुझारू लेखनी की बेहतरीन विचारोत्तेजक लघुकथा सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और शुमकामनायें मुहतरम जनाब महेंद्र कुमार जी।  अभी मैैंं शीर्षक का अर्थ देख रहा था नेट पर। कोई उचित पर्यायवाची ढूंढ रहा था सांकेतिकता बरकरार रखने के लिए। नहीं मिला!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

santosh khirwadkar posted a blog post

बीते लम्हों को चलो .....संतोष

अरकान:-फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुनबीते लम्हों को चलो फिर से पुकारा जाएवक़्त इक साथ सनम मिलके…See More
37 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

सामाजिक विद्रूपताओं पर गीत

बात लिखूँ मैं नई पुरानी, थोड़ी कड़वी यारसही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।झेल रहा है बचपन देखो,…See More
48 minutes ago
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post फिर ज़ख़्मों को ...संतोष
"बहुत धन्यवाद आ लक्ष्मण धामी साहब!!!"
52 minutes ago
Sudha mishra is now a member of Open Books Online
12 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post आशंका के गहरे-गहरे तल में
"सराहना के लिएआपका हार्दिक आभार, आदरणीय तेज वीर सिंह जी"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन क्षणिकाएँ लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आद0हरिहर झा जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना है पर यह दुबारा पोस्ट हुई है। एक बात और आपने "आदरणीय…"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post वापसी.... लघुकथा
"आद0 वीरेंदर वीर मेहता जी सादर अभिवादन। बढ़िया मार्मिक लघुकथा हुई है। बहुत बहुत बधाई इस सृजन पर।"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on vijay nikore's blog post सो न सका मैं कल सारी रात
"नरेंद्र सिंह चौहान जी क्या आप प्रतिक्रिया के बाद फिर पलट कर कभी नहीं देखते क्या,, क्योकि अगर देखते…"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on vijay nikore's blog post सो न सका मैं कल सारी रात
"आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन सृजन, वाह वाह, मजा आ गया पढ़के। बधाई देता हूँ आपको।…"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'नज़रिये के ज़रिये' (लघुकथा)
"आद0 शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन।एक बेहतरीन लघुकथा आपके हवाले से पढ़ने को मिली।  बात भी…"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन। बढिया समकालीन परिस्थितियों में उत्तम लघुकथा। बधाई निवेदित है इस…"
13 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service