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ग़ज़ल _तक़दीर आज़माने की ज़हमत न कीजिए

(मफऊल _ फाइलात _ मफाईल _फाइलुन)

तक़दीर आज़माने की ज़हमत न कीजिए |
उस बे वफ़ा को पाने की हसरत न कीजिए |

बढ़ने लगी हैं नफरतें लोगों के दरमियाँ
मज़हब की आड़ ले के सियासत न कीजिए |

जलवे किसी हसीन के आया हूँ देख कर
महफ़िल में आज ज़िक्रे कियामत न कीजिए |

आवाज़ तो उठाइए हक़ के लिए मगर
इसके लिए वतन में बग़ावत न कीजिए |

बैठा है चोट खाके हसीनों से दिल पे वो
जो कह रहा था मुझ से मुहब्बत न कीजिए |

मुफलिस के घर ही लुटते हैं अक्सर फसाद में
अख़बार पढ़ के आज का हैरत न कीजिए |

रसमे वफ़ा निभाइए तस्दीक आप भी
खाकर फरेबे हुस्न शिकायत न कीजिए |

(मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 13, 2018 at 3:52pm

मुहतरम जनाब तेज वीर साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 13, 2018 at 3:51pm

जनाब भाई श्याम नारायण साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 13, 2018 at 3:50pm

जनाब बसंत साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 13, 2018 at 3:49pm

जनाब भाई लक्ष्मण धामी साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |टाइप के दौरान मतले के क़ाफिए एक ही हो गए , सही कर दिया है, याद  दिलाने का शुक्रिया |

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 13, 2018 at 12:33pm

अच्छी ग़ज़ल हुई है बस मतले के क़ाफ़िए सही करने हैं....

Comment by TEJ VEER SINGH on June 13, 2018 at 12:06pm

हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी। बेहतरीन गज़ल।

बढ़ने लगी हैं नफरतें लोगों के दरमियाँ
मज़हब की आड़ ले के सियासत न कीजिए |

Comment by Shyam Narain Verma on June 13, 2018 at 10:56am
वाह लाजबाब गजल के लिए बधाई स्वीकारें आदरणीय सादर 
Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 13, 2018 at 10:32am

वाह वाह लाजबाब गजल हुई है आदरणीय बधाई स्वीकारें 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 13, 2018 at 6:47am

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सादर अभिवादन । यूँ तो गजल बेहतरीन हुयी है लेकिन मतले सेअन्य असआरों का रदीफ काफिया मेल नहीं खा रहा

 देखिएगा । हार्दिक बधाई । 

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