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ग़ज़ल _मेरे हबीब सिर्फ तू क़ुरबत की बात कर

मफ ऊल _फाइलात_ मफाईल _फाइलुन

उलफत की गर नहीं तो अदावत की बात कर |
मेरे हबीब सिर्फ़ तू क़ुरबत की बात कर |

दीदार कर के आया हूँ मैं एक हसीन का
मुझ से न यार आज क़यामत की बात कर |

लोगों के बीच होने लगीं ख़त्म उलफतें
मज़हब के नाम पर न सियासत की बात कर |

तदबीर पर है सिर्फ नजूमी मुझे यकीं
तू देख कर लकीर न क़िस्मत की बात कर |

ईमान बेचता नहीं मैं हूँ सुखन सरा
मुझ से मेरे अज़ीज़ न दौलत की बात कर |

खिदमत तो वाल दैन की तू ने कभी न की
नादां ज़ुबान से न तू जन्नत की बात कर |

मुद्दत के बाद तुझ से अकेले मिले हैं वो
तस्दीक आज सिर्फ मुहब्बत की बात कर |

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on June 10, 2018 at 1:53pm

वाह वाह जनाब तस्दीक अहमद साहब बेहतरीन अशआर कहे हैं. हार्दिक बधाई 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 9, 2018 at 8:00pm

जनाब ब्रजेश कुमार साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 9, 2018 at 2:40pm

बड़ी अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय ...

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 8, 2018 at 8:06pm

जनाब गुमनाम साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 8, 2018 at 9:40am

वाह खूब अच्छी ग़ज़ल कही है ,,,,, बधाई 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 8, 2018 at 8:42am

जनाब भाई लक्ष्मण धा मी साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 8, 2018 at 8:41am

जनाब भाई गंगाधर साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 8, 2018 at 8:40am

मुहतरम जनाब आरिफ साहिब, ग़ज़ल मेंआपकी शिर्कत  और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 7, 2018 at 6:53pm

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, बेहतरीन गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' on June 7, 2018 at 4:00pm

वाह.....आदरणीय तस्दीक साहब....बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक मुबारकबाद....

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