For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल _मेरे हबीब सिर्फ तू क़ुरबत की बात कर

मफ ऊल _फाइलात_ मफाईल _फाइलुन

उलफत की गर नहीं तो अदावत की बात कर |
मेरे हबीब सिर्फ़ तू क़ुरबत की बात कर |

दीदार कर के आया हूँ मैं एक हसीन का
मुझ से न यार आज क़यामत की बात कर |

लोगों के बीच होने लगीं ख़त्म उलफतें
मज़हब के नाम पर न सियासत की बात कर |

तदबीर पर है सिर्फ नजूमी मुझे यकीं
तू देख कर लकीर न क़िस्मत की बात कर |

ईमान बेचता नहीं मैं हूँ सुखन सरा
मुझ से मेरे अज़ीज़ न दौलत की बात कर |

खिदमत तो वाल दैन की तू ने कभी न की
नादां ज़ुबान से न तू जन्नत की बात कर |

मुद्दत के बाद तुझ से अकेले मिले हैं वो
तस्दीक आज सिर्फ मुहब्बत की बात कर |

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 188

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on June 10, 2018 at 1:53pm

वाह वाह जनाब तस्दीक अहमद साहब बेहतरीन अशआर कहे हैं. हार्दिक बधाई 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 9, 2018 at 8:00pm

जनाब ब्रजेश कुमार साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 9, 2018 at 2:40pm

बड़ी अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय ...

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 8, 2018 at 8:06pm

जनाब गुमनाम साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 8, 2018 at 9:40am

वाह खूब अच्छी ग़ज़ल कही है ,,,,, बधाई 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 8, 2018 at 8:42am

जनाब भाई लक्ष्मण धा मी साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 8, 2018 at 8:41am

जनाब भाई गंगाधर साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 8, 2018 at 8:40am

मुहतरम जनाब आरिफ साहिब, ग़ज़ल मेंआपकी शिर्कत  और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 7, 2018 at 6:53pm

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, बेहतरीन गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' on June 7, 2018 at 4:00pm

वाह.....आदरणीय तस्दीक साहब....बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक मुबारकबाद....

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय Balram Dhakar जी ,हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया"
2 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय बासुदेव जी , ग़ज़ल में शिरक़त और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया"
3 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय mirza javed beig जी ,हौसला अफ़ज़ाई के लिए दिली शुक्रिया"
4 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय लक्ष्मण जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर प्रस्तुति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर।"
31 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीया अंजलि जी, सादर अभिवादन। ग़ज़ल के सभी अशआर ख़ूबसूरत हुए हैं। दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल…"
34 minutes ago
Md. anis sheikh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"सोचते रह गए हम हौसला कर जाना था  आग के दरिया में हमको भी उतर जाना था | क्यूँ बग़ावत नहीं की…"
36 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय दिगंबर जी, सादर अभिवादन। ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर।"
37 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब तस्दीक़ साहब, सादर अभिवादन। ग़ज़ल के सभी अशआर बहुत खूबसूरत हुए हैं। इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए शेर दर…"
43 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय सुरेंद्र जी, सादर अभिवादन। इस बहुत खूबसूरत प्रस्तुति पर हृदयतल से बधाई स्वीकार करें। सादर।"
46 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर सिरकत , स्नेह व मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार । इंगित कमियों…"
48 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब सुरख़ाब साहब, आदाब। यूँ तो सभी शेर क़ाबिले दाद हुए हैं ग़ज़ल में लेकिन, ख़ार ही ख़ार नज़र आये हमें…"
50 minutes ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"तीसरे और गिरह वाले शेअर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ैन का दोष है भाई बलराम धाकड़ जी। ज़रा नज़रेसानी फरमा लें।…"
54 minutes ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service