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ग़ज़ल (दोस्तों वक़्त के रहबर का तमाशा देखो)

(फाइला तुन _फ इलातुन _फ इ ला तुन _फेलुन)

दोस्तों वक़्त के रहबर का तमाशा देखो |
कोई तकलीफ में, खुश कोई है फिरक़ा देखो |

कोई पत्थर की तरह आपकी ठोकर में है
मेरे महबूब ज़रा गौर से कूचा देखो |

आपको करना है दीदार गरीबी का अगर
जाके फुट पाथ का रातों में नज़ारा देखो |

हर किसी शख्स के हाथों में नहीं यूँ पत्थर
फ़िर कोई आ गया कूचे में दिवाना देखो |

गिडगिडाने से कभी हक़ नहीं मिल पाएगा
कर के तब्दील ज़रा दोस्तों लहजा देखो |

दर्द है दिल में, जिगर में है तड़प, आँखें नम
ले के आ या हूँ सनम तुहफे मैं क्या क्या देखो |

इस क़दर उनके ख़यालों ने मुझे महकाया
सूँघता है मुझे हर कोई गुलों सा देखो |

बाद में उंगली मेरी सम्त उठा लेना तुम
पहले आईने में अपना ज़रा चहरा देखो |

काम आते हैं कहाँ वक्ते मुसीबत अपने
अब किसी ग़ैर का तस्दीक सहारा देखो |

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 23, 2018 at 9:59am

जनाब रामअवध साहिब, ग़ज़ल मेंआपकी शिर्कत  और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on May 22, 2018 at 9:16pm

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। सभी शेर बोलते हुये हैं। आदर्णीय बधाई

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 22, 2018 at 8:49pm

मुहतरमा राजेश कुमारी साहिबा , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 22, 2018 at 6:57pm

मोहतरम जनाब तस्दीक जी ,बहुत शानदार ग़ज़ल कही है शेर दर शेर मुबारकबाद क़ुबूल फरमावें 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 20, 2018 at 12:25pm

जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आ दाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 20, 2018 at 7:25am

दुनिया की ज़मीनी हक़ीक़त से रूबरू कराती बेहतरीन ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब तस्दीक़ अहमद ख़ान साहिब।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 19, 2018 at 6:20pm

जनाब श्याम नारायण साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Shyam Narain Verma on May 19, 2018 at 11:09am
इस शानदार ग़ज़ल के लिए दिल से बधाईयाँ 

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