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अंबर अटा

रेगिस्तानी धूल से

जीना मुहाल

 

 

चढ़ती धूप

सुस्ताने भर ढूँढे

टुकड़ा छांव

 

 

खड़ी है धूप

छांव से सटकर

प्रतीक्षा सांझ

 

कटते पेड़

मौन रोता जंगल

सुनता कौन

 

 

… मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Neelam Upadhyaya on June 24, 2018 at 4:16pm

आदरणीय अनामिका जी, उत्साह वर्धन हेतु बहुत बहुत आभार।

Comment by Anamika singh Ana on June 22, 2018 at 6:33pm

सुंदर हाइकु लिखे हैं आदरणीया

Comment by Neelam Upadhyaya on June 22, 2018 at 2:48pm

आदरणीय  नरेंद्र सिंह  जी, बहुत बहुत आभार ।

Comment by Neelam Upadhyaya on June 22, 2018 at 2:47pm

आदरणीय ब्रजेश कुमार जी, बहुत बहुत आभार ।

Comment by Neelam Upadhyaya on June 22, 2018 at 2:46pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी, उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत आभार ।

Comment by narendrasinh chauhan on June 22, 2018 at 12:16pm

खुब सुन्दर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 22, 2018 at 11:19am

वाह सुन्दर बहुत सुन्दर आदरणीया

Comment by TEJ VEER SINGH on June 21, 2018 at 3:56pm

हार्दिक बधाई आदरणीय नीलम जी।बेहतरीन हाइकू।

Comment by Neelam Upadhyaya on June 21, 2018 at 11:49am

आदरणीय श्याम नारायण जी, उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।

Comment by Shyam Narain Verma on June 21, 2018 at 11:19am
सुन्दर सार्थक रचना  ने लिये आपको बधाई ….सादर ।

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