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कुछ क्षणिकाएं :

कुछ क्षणिकाएं :

1

शुष्क काष्ठ
अग्नि से नेह
असंगत आलिंगन
परिणति
मूक अवशेष

................

2

त्वचा हीन
नग्न वृक्ष
अवसन्न खड़े
अकाल अंत की
आहटों के मध्य

.............................

3

ईश्वर
किसी देवता का
सर्जन नहीं
गढ़त है वो
इंसान की

..........................

4

करता रहा
प्रतीक्षा
एक शंख
नाद के लिए
चिर निद्रा में सोये
मरघट में
अपने स्वामी के
श्वास की

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on June 27, 2018 at 6:59pm

आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी प्रस्तुति को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on June 25, 2018 at 7:25pm
आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बेहतरीन क्षणिकाओं के लिए दिली बधाई देता हूँ। सादर
Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 3:04pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 3:03pm

आदरणीय समर कबीर साहिब सृजन आपकी ऊर्जावान प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 3:03pm

आदरणीय अनामिका सिंह अना जी सृजन को मान देने का दिल से आभार

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 3:03pm

आदरणीय महेन्द्र कुमार जी प्रस्तुति अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 3:03pm

आदरणीय नीलम उपाध्याय जी सृजन को अपनी स्नेहिल प्रतिक्रिया से मान देने का दिल से आभार

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 3:03pm

आदरणीय नरेंद्र चौहान जी प्रस्तुति आपकी स्नेह की आभारी है।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 22, 2018 at 7:16pm

बहुत खूब..

Comment by Samar kabeer on June 22, 2018 at 6:43pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा क्षणिकाएँ लिखीं आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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