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बहुत हुआ सूरज का तपना
अब तो आओ मेघ
जम कर बरसो मेघ
 
तपती धरती का सीना हो ठंढा 
सूखी मिट्टी महके सोंधी
बंजर सी जमीं पर
अब फैले हरियाली
ठूंठ बन गए  पेड़ों के
पत्ते  अब हरियाएँ 
नभ पर जमकर छा जाते
गरज का बिजली कड़काते
संग में वर्षा भी  लाते
गर्मी डरकर जाती भाग
मौसम हो जाता खुशहाल

पर बादल तो
इधर से आये उधर गए
हम तो आस ही लगाए रहे
खुली चोंच लिए पक्षी
प्यासे ही रह गए
खेत जोतने को
हल लिए किसान
जोहता रहता  आसमान
बून्द को तरसती
उदास बैठी प्रकृति

बहुत हुआ अब तो आओ मेघ
जम कर बरसो मेघ   


..मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Neelam Upadhyaya on July 5, 2018 at 11:18am

आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी,  रचना की पसंदगी के लिए आभार। 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 4, 2018 at 8:40pm

मुह तरमा नीलम साहिबा, सुन्दर रचना हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |

Comment by Neelam Upadhyaya on July 2, 2018 at 3:31pm

आदरणीय लक्षमण धामी जी, रचना को समय देने के लिए बहुत बहुत आभार । 

Comment by Neelam Upadhyaya on July 2, 2018 at 3:30pm

आदरणीय समर कबीर जी, रचना को समय देने के लिए बहुत बहुत आभार। 

Comment by Neelam Upadhyaya on July 2, 2018 at 3:29pm

आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, बहुत बहुत आभार। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 2, 2018 at 9:42am

आ. नीलम जी, अच्छी रचना हुयी है, हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on July 1, 2018 at 6:04pm

मुहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on July 1, 2018 at 7:54am

आदरणीया नीलम उपाध्याय जी आदाब,

                                   बारिश की कामना को केंद्र में रखकर रची गई बहुत ही लाजवाब कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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