For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आग़ोश -ए-जवानी ...

आग़ोश -ए-जवानी ...


न, न
रहने दो
कुछ न कहो
ख़ामोश रहो
मैं
तुम्हारी ख़ामोशी में
तुम्हें सुन सकता हूँ
तुम
एक अथाह और
शांत सागर हो
मैं
चाहतों का सफ़ीना हूँ
इसे अल्फाज़ की मौजों पर
रवानी दे दो
मेरे वज़ूद को
आग़ोश -ए-जवानी दे दो

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 43

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on July 9, 2018 at 2:32pm

आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सृजन को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Neelam Upadhyaya on July 9, 2018 at 2:00pm

आदरणीय  सुशील  सरना जी, नमस्कार ।  अच्छी रचना की प्रस्तुति के लिए बधाई । 

Comment by Sushil Sarna on July 6, 2018 at 8:23pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी सृजन को मान देने का दिल से आभार। टंकण त्रुटियों को एडिट कर दिया है। नज़र से चूक हो गयी। बहरहाल आपके स्नेह का शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on July 6, 2018 at 8:23pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... सृजन पर आपकी सुझावात्मक टिप्पणी का दिल से शुक्रिया। सर दो स्थानों पर टंकण त्रुटि थी उसे एडिट कर दिया है और अलफ़ाज़ भूला नहीं हूँ सर बस गलती से हो गया .. भविष्य में ध्यान रहेगा। पुनः आपका हार्दिक आभार।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 6, 2018 at 7:59pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।अच्छी प्रस्तुति। लेकिन समर क़बीर साहब ने जो प्रश्न किया है, उस पर गौर कीजिये।मेरे विचार से तो रहने दो ही होना चाहिये।

Comment by Samar kabeer on July 6, 2018 at 6:10pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,कम शब्दों में उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'रहने तो' या "रहने दो"?

'चाहतों को सफ़ीना हूँ'--"चाहतों का सफ़ीना हूँ"

'इसे अल्फ़ाज़ों की मौजों पर'--"इसे अल्फ़ाज़ की मौजों पर" ।

पहले भी बता चुका हूँ कि 'लफ़्ज़' का बहुवचन "अल्फ़ाज़" होता है,आप इतनी जल्दी भूल गए?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।बढ़िया प्रस्तुति।"
28 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - ढूँढ रहा हूँ
"हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार जी।बढ़िया गज़ल। डाँट-डपट सँग रूठा-राठी, माँ की लोरी मीठी-मीठी…"
32 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post समाज - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।"
36 minutes ago
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post बारिश की क्षणिकाएँ
"जनाब नरेंद्रसिंह चौहान साहिब आदाब,आप जब भी किसी रचना पर अपनी टिप्पणी देते हैं तो लगता है जैसे कोई…"
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

एक गजल - ढूँढ रहा हूँ

माँ सिलती थी बड़े जतन से, कहाँ बिछौने ढूँढ रहा हूँकहाँ गया वो नटखट बचपन, कहाँ खिलौने ढूँढ रहा…See More
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"बेहतरीन प्रस्तुति "
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ख्वाब कोई तो मचलना चाहिए
" आदरणीया  Sushil Sarna जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ख्वाब कोई तो मचलना चाहिए
"आदरणीया Neelam Upadhyaya जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ख्वाब कोई तो मचलना चाहिए
"आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
2 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Mohammed Arif's blog post बारिश की क्षणिकाएँ
" खूब  सुन्दर रचना "
2 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"खूब सुंदर रचना  पर हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील जी"
2 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिका :विगत कल
"बहुत खूब "
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service