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सदा बिखरी रहे ये हंसी..

हँसमुखी चेहरे पर ये कोलगेट की मुस्कान,

बिखरी रहे ये हँसी,दमकता रहे हमेशा चेहरा,

दामन तेरा खुशियों से भरा रहे,

सपनों की दुनियां आबाद बनी रहे,

हँसती हुई आँखें कभी नम न पड़े,

कालजयी जमाना कभी आँख मिचौली न खेले,

छलाबी दुनियां से ठग मत जाना,

खुशियों की यादों के सहारे,

दुखों को पार लगा लेना,

कभी ऐसा भी पल आये जीवन में,

निराशा में हिम्मत मत हारना,

हो चाहे दुनियां इधर-उधर,

ले बड़े  बुजुर्गों के अनुभवों को साथ,

एक अच्छे खिवयै की तरह,

नौका पार लगा लेना ,

ये सीख हमेशा याद रखना,

आज गम हैं,तो कल ख़ुशी आएगी,

आज तूफ़ान हैं तो कल शांति होगी।

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 13, 2018 at 5:40pm

अच्छी प्रस्तुति है आदरणीया..

Comment by vijay nikore on July 12, 2018 at 1:02pm

रचना अच्छी लगी...बहुत ही अच्छा आश्वासन दे रही है।

Comment by Samar kabeer on July 11, 2018 at 11:27am

मोहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,अच्छी प्रस्तुति है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by babitagupta on July 10, 2018 at 6:23pm

सधन्यवाद ,आदरणीय आरिफ सरजी।

Comment by Mohammed Arif on July 9, 2018 at 6:17pm

आदरणीया बबीता गुप्ता जी आदाब,

                                 बाज़ारवाद से ग्रसित विज्ञापनों की शैलीनुमा सीख देती बेहतरीन रचना  । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by babitagupta on July 9, 2018 at 3:10pm

आदरणीया नीलम दी ,श्याम सरजी,सुशील सरजी ,नमस्कार ,रचना  की   सराहना करने के लिए सधन्यवाद।

Comment by Shyam Narain Verma on July 9, 2018 at 2:49pm
सुन्दर सार्थक रचना  ने लिये आपको बधाई ….
Comment by Sushil Sarna on July 9, 2018 at 1:06pm

आदरणीया बबिता जी भाव पूर्ण सृजन के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by Neelam Upadhyaya on July 9, 2018 at 12:54pm

अच्छी रचना की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें आदरणीया बबिता गुप्ता जी ।

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