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गजल- जहाँ ईमान का पौधा नहीं है

मापनी 1222 1222122

जहाँ ईमान का पौधा नहीं है

यक़ीनन बाग वह मेरा नहीं है

 

इबादतगाह में है शोर केवल

खुदा का जिक्र अब होता नहीं है

 

भले फूलों सा’ कोमल हो न सच, पर

किसी की राह का काँटा नहीं है  

 

भलाई कर भुला देना है मुश्किल

सभी के बस का' ये बूता नहीं है

 

किसी की बात को दिल पर न ले जो

कभी अपनों को’ वो खोता नहीं है

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 7, 2018 at 3:36pm

हृदय से आभार आदरणीय vijay nikore जी आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 7, 2018 at 3:35pm

हृदय से आभार आदरणीय Naveen Mani Tripathi  जी आपका 

Comment by vijay nikore on August 1, 2018 at 2:08pm

बसंत जी,  गज़ल अच्छी लिखी है। 

//भलाई कर भुला देना है मुश्किल//...... यह बहुत बड़ा सच है।

Comment by Naveen Mani Tripathi on July 31, 2018 at 10:10pm

आ0 वसन्त कुमार शर्मा जी अच्छी ग़ज़ल हुई है ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 31, 2018 at 9:39am

आदरणीय gumnaam pithoragarhi जी आपका हृदय से आभार 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 31, 2018 at 9:38am

आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपका हृदय से आभार 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 31, 2018 at 9:38am

आदरणीया Neelam Upadhyaya जी आपका हृदय से आभार 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 31, 2018 at 9:37am

आदरणीय TEJ VEER SINGH जी आपका हृदय से आभार 

Comment by gumnaam pithoragarhi on July 31, 2018 at 7:34am

वाह अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई  .. .  .. 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 29, 2018 at 2:20pm

वाह बड़ी अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय शर्मा जी...सादर

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