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एक गीत -सब कुछ पाना हमें यहाँ है

जीवन की राहें अनजानी,

मंजिल का भी पता कहाँ है.

चले जा रहे अपनी धुन में,

सब कुछ पाना हमें यहाँ है.

 

कहीं बबूलों के जंगल हैं,

कहीं महकती है अमराई.

फूल शूल के साथ विहँसकर,

फुलवारी में ले अँगड़ाई.

स्वप्न आस का मन आँगन में,

रोज टहलता यहाँ-वहाँ है.

 

आकर बाढ़ कहीं नफरत की,

तहस-नहस जीवन कर देती.

मगर प्रेम की रिमझिम बारिश,

खाली हर आँचल भर देती.

पुष्प पल्लवित हैं खुशियों के,

त्याग और विश्वास जहाँ है.

 

सता रहा एकांत कभी तो,

भीड़-भाड़ में भी दम घुटता.

कभी यहाँ पर मान किसी का,

दो रोटी की खातिर लुटता.

सुख का भी सामान बहुत है,

लेकिन सिमटा जहाँ-तहाँ है

 

बिस्तर पर होते हैं लेकिन,

कहाँ चैन से हम सोते हैं.

रात और दिन खटते रहते,

काम न खत्म कभी होते हैं.

जाना निश्चित, पार जगत के,

पर मन करता कभी न हाँ है.

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 7, 2018 at 3:37pm

आदरणीय Samar kabeerजी हृदय से आभार आपका, सादर नमन 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 7, 2018 at 3:36pm

आदरणीय Sushil Sarna जी दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by Samar kabeer on July 31, 2018 at 6:16pm

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,बहुत उम्दा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on July 31, 2018 at 3:33pm

आदरणीय बसंत जी बहुत ही भावपूर्ण सृजन हुआ है। इस सरस सृजन के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 30, 2018 at 5:38pm

हृदय से आभार आदरणीया babitagupta जी आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 30, 2018 at 5:37pm

हृदय से आभार आदरणीया Neelam Upadhyaya जी आपका 

Comment by babitagupta on July 30, 2018 at 3:33pm

बेहतरीन रचना जीवन को परिभाषित करती ,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by Neelam Upadhyaya on July 30, 2018 at 2:04pm

आदरणीय बसंत कुमार जी, सुन्दर गीत की प्रस्तुति।  बधाई स्वीकार करें। 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 30, 2018 at 11:17am

हृदय से आभार आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपका 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 29, 2018 at 2:34pm

आदरणीय शर्मा जी अच्छा गीत हुआ..सादर

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