For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पिता के बार बार आग्रह करने पर रोहन उनके मित्र की इकलौती बेटी चेतना से एक बार मिलने को राजी हो गया। हालाँकि वह पिता से स्पष्ट कह चुका था कि यदि आपको चेतना पसंद है तो मुझे शादी मंजूर है| इसके बावज़ूद पिता की इच्छा थी कि रोहन एक बार चेतना से अवश्य मिले। शायद वे अकेले निर्णय करने से बचना चाहते थे।

चेतना दिल्ली में एम बी ए कर रही थी अतः हॉस्टल में रहती थी। उन दोनों ने रेस्त्रां में मिलना तय किया। औपचारिक मुलाक़ात के बाद मुद्दे की बात शुरू हुई। पहल चेतना ने की,

"क्या तुम एक बलात्कार पीड़ित लड़की से शादी करना पसंद करोगे"?

इस बेतुके सवाल से यकायक तो रोहन भौचक्का हो गया फिर उसने अपने आप को संयमित करते  हुए पूछा,

"इस प्रश्न का हम दोनों की शादी से क्या ताल्लुक़"?

"ताल्लुक़ है, तभी तो पूछा है"|

"कुछ स्पष्ट कीजिये"?

"मेरे साथ रेप किया था तीन लड़कों ने, कालेज कैंपस में"|

"देखिये, मैं पिताजी को इस रिश्ते के लिये पहले ही हाँ कह चुका हूँ।यह सब जानने के बाद भी मेरा निर्णय वही है"|

"इसके पीछे आपकी कोई मज़बूरी"?

"पहली बात, मैं अपने पिता का बहुत सम्मान करता हूँ। उनकी बात का मान रखना मेरी प्राथमिकता है। दूसरी बात. मैं स्त्री की पवित्रता जैसी दकियानूसी बातों पर यक़ीन नहीं करता"|

"ओह, आप तो बेहद आदर्श पुरुष हैं।निश्चय ही आप एक अच्छे पति सिद्ध होंगे। मुझे भी यह रिश्ता मंज़ूर है"|

दोनों ने निश्चिंत होकर कॉफ़ी पी।

जब रोहन चलने लगा तो चेतना ने बताया,"वह रेप वाली बात मनगढ़ंत थी। मैं आपकी परीक्षा ले रही थी"|

रोहन चेतना की बात सुनकर हक्का बक्का रह गया। वह चेतना के चेहरे को असमंजस भरी नजरों से निहार रहा था। चेतना के चेहरे पर एक अजीब सी रहस्यमयी मुस्कुराहट फ़ैली हुयी थी।

"क्षमा कीजिये चेतना जी। मैं अपने होने वाले जीवन साथी से इस तरह की परीक्षा की उम्मीद नहीं रखता। बेहतर होगा कि आप कोई और साथी खोज लें"

मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 492

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on August 2, 2018 at 4:11pm

हार्दिक आभार आदरणीय नीलम उपाध्याय जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 2, 2018 at 4:10pm

हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।आपकी हौसला अफ़जाई सदैव मुझे बेहतर लेखन के लिये प्रेरित करती है।

Comment by Neelam Upadhyaya on August 2, 2018 at 12:44pm

 बहुत ही बढ़िया लघुकथा हुई है।  प्रस्तुति के लिए हार्दिक बढ़ायी आदरणीय तेजवीर सिंह जी। 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 2, 2018 at 6:08am

आपकी बेहतरीन लेखनी से एक भिन्न शैली की रोचक किंतु बहुत गंभीर विषयक विचारोत्तेजक व प्रेरक रचना के लिये हार्दिक बधाइयाँ आदरणीय तेजवीर सिंह  साहिब।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 1, 2018 at 6:25pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 1, 2018 at 6:25pm

हार्दिक आभार आदरणीय बबिता गुप्ता जी।

Comment by Samar kabeer on August 1, 2018 at 6:09pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by babitagupta on August 1, 2018 at 5:55pm

संबंधों की बुनियाद विश्वास पर खड़ी होती हैं ना कि सिद्धांतवादी सोच पर खरे उतरने पर.बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय तेजवीर सरजी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
15 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
17 hours ago
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
yesterday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service