For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चक्रव्यूह - लघुकथा –

चक्रव्यूह - लघुकथा –

"ए लड़की, क्या झाँक रही हो की होल से अंदर"?

सरकारी शाँती बालिका कल्याण संस्थान की व्यस्थापक सुमित्रा देवी  गोमती को चोटी से पकड़ कर लगभग घसीटते हुए अपने कार्यालय ले गयीं। गोमती पीड़ा से बेचेन होकर छटपटा रही थी। वह लगातार रोये जा रही थी।

“क्या ताक झाँक कर रही थी वहाँ”? सुमित्रा जी ने लाल आँखें दिखाते हुए पुनः वही प्रश्न दोहराया।

"मैडम, मेरी  बहिन को  उस कमरे में एक सफ़ेद कुर्ता धोती वाला नेताओं जैसा आदमी पहले तो बहला फ़ुसला कर ले जाना चाह रहा था। बहिन के मना करने पर वह जबरदस्ती पकड़ कर खींच ले गया है"।

"कोई बात नहीं। अभी आ जायेगी। तुम अपने कमरे में जाओ"।

"नहीं मैडम, मैं मेरी बहिन को साथ लेकर जाऊंगी। वह आदमी अच्छा नहीं है"।

"तुम यह क्या बोल रही हो। तुम जानती भी हो वह कौन हैं"?

"नहीं मैडम मुझे नहीं मालूम वह कौन है। पर वह गंदा आदमी है। सब बताते हैं कि वह लड़कियों के कपड़े उतरवाता है और गंदा काम करता है “।

"ए चुप, सोच समझ कर बोल। वे  कल्याण मंत्री हैं । निकाल कर बाहर कर देंगे"।

"निकाल देने दो। हमको नहीं रहना यहाँ"।

"भूखी मर जाओगी। यहाँ सब कुछ मुफ़्त में मिल रहा है तो पर निकल आये हैं"।

"मैडम जी, आपकी भी दो बेटियाँ दूसरे शहर मेंछात्रावास में रहकर पढ़ रही हैं।क्या पता कोई उनके साथ भी यही सब कर रहा हो जो आप यहाँ हमारे साथ कर  रही हैं”।

“ए खबरदार, मेरी बेटियों के बारे में ऐसा सोचना भी मत”|

“मैडम जी, आप एक स्त्री और दो बेटियों की माँ होकर भी यह सब | लगता है आपका ज़मीर सचमुच मर चुका है”|

“गोमती मेरी बच्ची, मैं एक विधवा औरत हूँ। जैसे तैसे अपनी दो बेटियों को पाल रही हूँ। मैं तो मात्र एक कठपुतली हूँ। मेरे वश में कुछ भी नहीं है।

सुमित्रा जी के बहते आँसू उनके कथन की पुष्टि कर रहे थे|

मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 718

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on August 16, 2018 at 2:39pm

हार्दिक आभार आदरणीय बबिता गुप्ता जी।

Comment by babitagupta on August 15, 2018 at 3:59pm

समाज की सबसे ज्वलंत समस्या का बोध कराती बेहतरीन रचना के लिए  बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 15, 2018 at 10:19am

हार्दिक आभार आदरणीय नीलम जी।

Comment by Neelam Upadhyaya on August 14, 2018 at 2:54pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी, नमस्कार।  सम-सामयिक विषय पर बढ़िया प्रस्तुति।  बधाई स्वीकार करें। 

Comment by TEJ VEER SINGH on August 13, 2018 at 4:57pm

हार्दिक आभार आदरणीय आशा जुगरान जी।

Comment by asha jugran on August 12, 2018 at 11:07pm

सामयिक घटनाओं को जोडती सुन्दर सर्जना.

 

Comment by TEJ VEER SINGH on August 11, 2018 at 8:55pm

हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 10, 2018 at 9:57pm

बेहतरीन समापन के साथ बेहतरीन सृजन। हार्दिक बधाइयां आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 10, 2018 at 2:35pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।

Comment by Samar kabeer on August 10, 2018 at 2:09pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
5 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Saturday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service