For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

टूट कर बिखरते
हौले हौले संवरते
क्या देखा है आपने?
किसी कविता को,
गिरते-संभलते !!
मैंने देखा है--
अगणित बार..
हृदय-तल पर
शब्दो की उंगलियों का
सहारा पा-
किसी नन्हे शिशु की भांति
डगमगाते हुवे
एक एक कदम उठाते !
फिर आहिस्ता आहिस्ता
वाक्यों के लंबे लंबे डग
नापते !
हाँ देखा है मैंने!
कविता को-
टूटते-संवरते,
गिरते-संभलते,
बनते-बिगड़ते !!

मौलिक एवं अप्रकाशित
(अतुकांत कविता)

Views: 766

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by V.M.''vrishty'' on October 12, 2018 at 9:12am
आदरणीय समर कबीर जी, प्रणाम! शुभ प्रभात!
मैं आपसे ये जानना चाहती हूं कि आजकल हिंदी गज़लों का जो दौर है, क्या उनमें बहर की बाध्यता होती है???? और आपके क्या विचार है इस विषय पर?, आप आज़ाद ग़ज़ल , जो बहर के नियम से मुक्त हो ,उसके विरोधी हैं या समर्थक???
सादर!!
Comment by V.M.''vrishty'' on October 11, 2018 at 6:05pm
आदरणीय डॉ छोटेलाल जी, मेरी रचना आपके खुशी का साधन बन कर धन्य हुई। बहुत बहुत आभार।
Comment by V.M.''vrishty'' on October 11, 2018 at 6:04pm
आदरणीय समर कबीर जी, प्रणाम!रचना की प्रशंसा एवं आपके स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद! मैं हमेशा आपके टिप्पड़ियों की मुन्तजिर हूँ।
Comment by V.M.''vrishty'' on October 11, 2018 at 5:58pm
जनाब मोहित मिश्रा जी, शुभ संध्या! बहुत बहुत आभार आपके स्नेह एवं टिप्पड़ी के लिए। आपके शब्द मेरे उत्साहवर्धन में सहायक हैं। पुनः धन्यवाद!
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 11, 2018 at 5:43pm

आदरणीया वृष्टि जी बहुत बेहतरीन अतुकांत दिल खुश होगया बधाई कुबूल कीजिए

Comment by Samar kabeer on October 11, 2018 at 2:42pm

मुहतरमा "वृष्टि" जी आदाब,बहुत सुंदर अतुकान्त कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

इस मंच पर महीने में चार आयोजन होते हैं,जिसके बारे में मुख्य पृष्ठ से जानकारी मिल जायेगी,एक आयोजन तो आज रात 12 बजे से चालू होगा,आप उसमें भी हिस्सा लें तो अच्छा लगेगा ।

Comment by V.M.''vrishty'' on October 11, 2018 at 10:27am
आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी, प्रणाम!
आपकी प्रतिक्रिया एवं सुझाव के लिए अत्यंत आभार! आपका सुझाव सर्वथा उचित है। कभी कभी इंसान जानकारियाँ होने के बावजूद गलतियाँ कर जाता है। कभी जल्दबाजी में,तो कभी टेक्निकल फॉल्ट। आगे से ध्यान रखने की कोशिश करूँगी।
सादर!
Comment by Naveen Mani Tripathi on October 11, 2018 at 10:19am

हाँ देखा है मैंने!
कविता को-
टूटते-संवरते,
गिरते-संभलते,
बनते-बिगड़ते !!

आदारणीया वी ऍम वृष्टि जी अत्यंत सुंदर अतुकांत रचना है । आपको हार्दिक बधाई । शब्द हुवे को हुए और संभलते सँभलते लिखना मेरे विचार से ठीक होगा । 

सादर ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166

परम आत्मीय स्वजन,ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 166 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का…See More
1 hour ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 155

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ पचपनवाँ आयोजन है.…See More
1 hour ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"तकनीकी कारणों से साइट खुलने में व्यवधान को देखते हुए आयोजन अवधि आज दिनांक 15.04.24 को रात्रि 12 बजे…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, बहुत बढ़िया प्रस्तुति। इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई। सादर।"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"आदरणीय समर कबीर जी हार्दिक धन्यवाद आपका। बहुत बहुत आभार।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"जय- पराजय ः गीतिका छंद जय पराजय कुछ नहीं बस, आँकड़ो का मेल है । आड़ ..लेकर ..दूसरों.. की़, जीतने…"
Sunday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"जनाब मिथिलेश वामनकर जी आदाब, उम्द: रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर posted a blog post

ग़ज़ल: उम्र भर हम सीखते चौकोर करना

याद कर इतना न दिल कमजोर करनाआऊंगा तब खूब जी भर बोर करना।मुख्तसर सी बात है लेकिन जरूरीकह दूं मैं, बस…See More
Saturday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"मन की तख्ती पर सदा, खींचो सत्य सुरेख। जय की होगी शृंखला  एक पराजय देख। - आयेंगे कुछ मौन…"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"स्वागतम"
Saturday
PHOOL SINGH added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

महर्षि वाल्मीकि

महर्षि वाल्मीकिमहर्षि वाल्मीकि का जन्ममहर्षि वाल्मीकि के जन्म के बारे में बहुत भ्रांतियाँ मिलती है…See More
Apr 10
Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: ग़मज़दा आँखों का पानी

२१२२ २१२२ग़मज़दा आँखों का पानीबोलता है बे-ज़बानीमार ही डालेगी हमकोआज उनकी सरगिरानीआपकी हर बात…See More
Apr 10

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service