For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इंसान का अस्तित्व

जीवन !
एक तराजू ।
आशा और निराशा !
पीड़ा और आनंद !
प्रेम और नफरत !
इन्हीं दो पलड़ों के बीच
इंसान का अस्तित्व !
जैसे--
लकड़ी का एक टुकड़ा !
जो जुड़ा है ....
दोनों पलड़ों से !
अस्थिर...विचलित...
डगमगाता.. लड़खड़ाता..
उसी काष्ठ की भाँति
मनुष्य भी,
दोनों पलड़ों से बंधा
स्थिर होने का
प्रयत्न करता !!
©vrishty
मौलिक व अप्रकाशित
(अतुकांत)

Views: 581

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by V.M.''vrishty'' on October 16, 2018 at 9:29pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी, सादर धन्यवाद!! स्नेह बनाये रखें!!

Comment by नाथ सोनांचली on October 16, 2018 at 4:09pm

आद0 वीएम वृष्टि जी सादर अभिवादन। बढिया अतुकांत लिखी आपने। इस प्रस्तुति पर बधाई निवेदित है।

Comment by V.M.''vrishty'' on October 15, 2018 at 11:37am

आदरणीय समर कबीर जी, सादर अभिनंदन! आपकी स्नेहमयी टिप्पड़ी के लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार। यकीनन आपके हौसलाअफजाई से एक नवीन ऊर्जा का संचार होता है। 

Comment by Samar kabeer on October 15, 2018 at 11:29am

मुहतरमा "वृष्टि" जी आदाब,अच्छी अतुकान्त कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by V.M.''vrishty'' on October 14, 2018 at 4:37pm
आदरणीय Sheikh Shahzad usmani जी! प्रणाम! आपने बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ में टिप्पड़ी की और मेरा उत्साहवर्धन किया।बहुत बहुत आत्मीय आभार! आगे भी अपना आशीर्वाद बनाये रखें!
Comment by V.M.''vrishty'' on October 14, 2018 at 4:33pm
आदरणीया नीलम जी, बहुत बहुत आभार आपका! स्नेह यूँ ही बना रहे! सादर!
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 14, 2018 at 4:13pm

आदाब। तराजू के दोनों पलड़ों और उनके बीच के संतुलन द्योतक केंद्र के बिंबों में मानव जीवन और उसके संतुलन-संघर्ष को कम शब्दों और बढ़िया शिल्प में पेश करने के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय वी. एम. 'वृष्टि' साहिब। मंच की परम्परा अनुसार अंत में रचनाकार का नाम व कोई चिन्ह लिखना ज़रूरी नहीं है। सादर।

Comment by Neelam Upadhyaya on October 13, 2018 at 3:43pm

आदरणीया वृष्टि जी, सुन्दर भावों को प्रस्तुत करती अच्छी कविता की प्रस्तुति. हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

रामबली गुप्ता posted a blog post

कर्मवीर

आधार छंद-मनहरण घनाक्षरी सुख हो या दुख चाहें रहते सहज और, जग की कठिनता से जो न घबराते हैं। स्थिति…See More
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर और समसामयिक नवगीत रचा है आपने। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
20 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहा पंचक - आचरण

चाहे पद से हो बहुत, मनुज शक्ति का भान। किन्तु आचरण से मिले, सदा जगत में मान।। * हवा  विषैली  हो …See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई तिलक राज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। 9, 10…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। कुछ मिसरे और समय चाहते है। इस प्रयास के…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। आ. भाई तिलक राज जी के सुझाव से यह और…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई अजय जी, प्रदत्त मिसरे पर गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" आदरणीय तिलक राज कपूर साहब,  आप मेरी प्रस्तुति तक आये, आपका आभारी हूँ।  // दीदावर का…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई लक्ष्मण सिंह धानी ' मुसाफिर' साहब हौसला अफज़ाई के लिए  आपका बहुत-बहुत…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आपने खत लिखा उसका ही असर है साईंछोड़ दी अब बुरी संगत की डगर है साईं धर्म के नाम बताया गया भाई…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"ग़ज़ल पर अपनी बारीक़-नज़र से टिप्पणी करने के लिए आपका आभार आदरणीय तिलकराज जी।  एक प्रश्न है: इस…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service