For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

२१२२,२१२२,२१२२,२१२

दिल मुहब्बत,लब ख़ुशी,चेह्रा हसीं,क्या शान है

लग रहा है मुझको तेरा नाम हिंदुस्तान है |

छत टपकती ,फर्श मिट्टी का ,मकाँ कच्चा सही

आज़मा ले तू ,बहुत पक्का मेरा ईमान है |

चाँद कल गुमसुम खड़ा था ,देख कर चेहरा तेरा

आज लगता है मुझे सूरज भी कुछ हैरान है |

मै मना कैसे करूँ ,उसकी किसी भी बात को

नर्म लहजा साथ में इक मद भरी मुस्कान है |

हादिसे अखबार के बस पेज भरते हैं यहां

कुछ बदलता ही नहीं ,क्यूँ इतनी सस्ती जान है |

हार जाये ग़र यहां सच झूट से हैरत न कर

आँख पर पट्टी बंधी है , हाथ में मीज़ान है |

याद करके मै न तड़पूँगा तुझे सुन बेवफा

जा मुझे तू छोड़ जा इसमें तेरा नुकसान है|

मौलिक अप्रकाशित

Views: 551

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Md. Anis arman on January 10, 2019 at 1:04pm

लिखे को मान  देने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया समर  सर 

Comment by Samar kabeer on January 10, 2019 at 11:40am

जनाब अनीस शैख़ साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

कुछ मिसरों में टंकण त्रुटियां देख लें ।

Comment by Md. Anis arman on January 9, 2019 at 1:37pm

आपका बहुत बहुत शुक्रिया विजय निकोर जी 

Comment by vijay nikore on January 9, 2019 at 1:09pm

जनाब मोहम्मद अनीस शेख़ जी, अच्छी गज़ल कही है। बधाई।

Comment by Md. Anis arman on January 7, 2019 at 8:37pm

बहुत बहुत शुक्रिया महेंद्र कुमार जी 

Comment by Mahendra Kumar on January 7, 2019 at 7:50pm

हार जाये ग़र यहां सच झूट से हैरत न कर

आँख पर पट्टी बंधी है, हाथ में मीज़ान है |

आदरणीय मोहम्मद अनीस शेख़ जी, अच्छी ग़ज़ल कही है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं, देख लीजिएगा. सादर.

Comment by Md. Anis arman on January 7, 2019 at 10:41am

राज़ साहब बहुत बहुत शुक्रिया ,टाइप करते वक़्त ध्यान नई दे पाया था सुधार कर लिया हूँ 

Comment by राज़ नवादवी on January 6, 2019 at 1:23pm

आदरणीय Md. anis sheikh साहब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे बधाई स्वीकार करें. 'मुश्कान' को मुस्कान कर लें. बाक़ी मंच के उस्ताज़ नज़रे इस्लाह फ़रमाएंगे. सादर. 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
21 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
21 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
21 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
21 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
21 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
22 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
22 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक…"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"*पका न पाती  रोटियाँ, भले  युद्ध की आगजला रही है नित्य पर, वह निर्धन का…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service