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ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं

बह्र : 221 1221 1221 122

अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं

वो लोग किसी और ज़माने के लिए हैं

कुछ लोग हैं जो आग बुझाते हैं अभी तक

बाकी तो यहाँ आग लगाने के लिए हैं

यूँ आस भरी नज़रों से देखो न हमें तुम

हम लोग फ़क़त शोर मचाने के लिए हैं

हर शख़्स यहाँ रखता है अपनों से ही मतलब

जो ग़ैर हैं वो रस्म निभाने के लिए हैं

अब क्या किसी से दिल को लगाएँगे भला हम

जब आप मेरे दिल को दुखाने के लिए हैं

उनके लिए क़ुर्बान मैंने हर ख़ुशी कर दी

जो हर घड़ी बस मुझको रुलाने के लिए हैं

जी करता है दुनिया को जला दूँ मैं इन्हीं से

ये दीप जो मन्दिर में जलाने के लिए हैं

सबकुछ गँवा के ज़िन्दगी में हमने ये पाया

हम लोग तो हर चीज़ गँवाने के लिए हैं

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Mahendra Kumar on January 27, 2019 at 11:39am

जी आदरणीय समर कबीर सर. देखता हूँ इसे कैसे बेहतर कर सकता हूँ. आपका बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर.

Comment by Mahendra Kumar on January 27, 2019 at 11:38am

//ऐसी बह्र जहां 11 का प्रयोग हो वहाँ मात्रा पतन से बचने का प्रयास करने से ग़ज़लों में रवानी अच्छी आती है । // उम्दा जानकारी साझा करने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार आदरणीय नवीन जी. //एक सुझाव मात्र।// सुझाव अच्छा है. और आप निश्चिंत रहें.  

मेरे ब्लॉग पर सभी प्रतिक्रियाओं का खुले दिल से स्वागत है. ग़ज़ल में आपकी उपस्थिति, हौसलाफजाई और इस्लाह का बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर.

Comment by Mahendra Kumar on January 27, 2019 at 11:32am

हार्दिक आभार आदरणीय राज़ नवादवी जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर.

Comment by Mahendra Kumar on January 27, 2019 at 11:32am

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर.

Comment by Samar kabeer on January 19, 2019 at 11:41am

छटे और आख़री शैर पर ग़ौर करें ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 19, 2019 at 12:36am

ग़ज़ल का प्रयास बहुत सुंदर हुआ है । अच्छे मफ़हूम पर ग़ज़ल हुई ।

221 1221 1221 122

उनके लिए कुर्बान मैंने हर खुशी कर दी ।

जिनके लिए कुर्बान हुई हर खुशी मेरी ।

बस लोग वही मुझको रुलाने के लिए हैं ।। एक सुझाव मात्र । 

ऐसी बह्र जहां 11 का प्रयोग हो वहाँ मात्रा पतन से बचने का प्रयास करने से ग़ज़लों में रवानी अच्छी आती है । 

Comment by राज़ नवादवी on January 19, 2019 at 12:17am

आदरणीय भाई महेंद्र कुमार साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद. सादर. 

Comment by नाथ सोनांचली on January 18, 2019 at 9:48am

आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर दाद के साथ बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by Mahendra Kumar on January 17, 2019 at 9:26pm

लिखना सार्थक रहा आदरणीय अजय जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. हार्दिक आभार. सादर.

Comment by Mahendra Kumar on January 17, 2019 at 9:26pm

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तेज वीर सिंह जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर.

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