For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज बचवा चाचा बहुत उदास दरवाजे पर बैठे थे. वैसे तो उदास उनका पूरा गांव ही हो गया था, अधिकांश नौजवान शहरों के बिजबिजाते भीड़ का हिस्सा बनने चले गए थे. कुछ जो बचे थे वह गांव में अक्सर रात को ही आते थे, दिन में तो उनका समय देसी शराब के ठेके या सिनेमा हाल पर ही बीतता था. हर घर में इक्का दुक्का बुजुर्ग ही बचे थे जो दिन को किसी तरह काट रहे थे. जितना होता एक दूसरे से बात करते या अपने अपने रोग को लेकर खटिया पर पड़े रहते.
गांव था तो गांव के अपने सुख दुःख भी थे. सबसे ज्यादा झगड़ा तो खेतों को लेकर ही हुआ करता था, वह खेत जो आजकल ठीक से बुवाई और जुताई को भी तरस रहे थे. अब तो खेती करने के लिए लोग ही नहीं बचे थे, बस अधिया या बटाई से जो मिल जाता, ठीक था. बचवा चाचा का भी खेतों को लेकर कई पट्टीदारों से मुकदमा चलता था और अब तो सिर्फ तारीख ही पता चलती थी, फैसले की आस तो दोनों ही पक्ष छोड़ चुके थे.
पड़ोसी दुक्खू से उनके उसी खेत का मुकदमा था जिसे वह किसी भी हाल में छोड़ना नहीं चाहते थे. केस पहले लोअर कोर्ट में कई साल चला फिर अब वह हाई कोर्ट में चल रहा था. कब फैसला आएगा, दोनों को पता नहीं था लेकिन समय के साथ उनकी दुक्खू से दुश्मनी कुछ कम जरूर हो गयी थी. कल रात दुक्खू बीमारी से चल बसे और अब शायद उसके लड़के मुकदमा नहीं लड़ें तो बचवा चाचा की जीत पक्की ही थी. लेकिन इस बात पर भी बचवा चाचा खुश नहीं थे और जब उनसे उनकी उदासी की वजह पूछी गयी तो उन्होंने गहरी सांस लेते हुए जवाब दिया "दुश्मनी ही सही, एक रिश्ता तो था ही दुक्खू से. कम से कम एक वजह तो थी जिसके चलते उससे बात चीत कभी कभी हो जाती थी, अब तो वह वजह भी ख़त्म हो गयी".


मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 518

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विनय कुमार on February 21, 2019 at 3:59pm

इस विस्तृत टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ जवाहर लाल सिंह साहब

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on February 7, 2019 at 4:12pm

"दुश्मनी ही सही, एक रिश्ता तो था ही दुक्खू से. कम से कम एक वजह तो थी जिसके चलते उससे बात चीत कभी कभी हो जाती थी, अब तो वह वजह भी ख़त्म हो गयी"

बहुत ही सही तथ्य को सही तरीके से रक्खा आपने, आदरणीय विनय कुमार जी! 

सुन्दर और सुगठित लघुकथा के लिए बधाई स्वीकारें!

Comment by विनय कुमार on February 6, 2019 at 2:14pm

इस प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहब

Comment by विनय कुमार on February 6, 2019 at 2:12pm

बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब

Comment by नाथ सोनांचली on February 5, 2019 at 5:44pm

आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन। बढ़िया मार्मिक और काफी हद तक प्रभावी लघुकथा लिखी आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by Samar kabeer on February 5, 2019 at 2:28pm

जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"चमत्कार की आत्मकथा (लघुकथा): एक प्रतिष्ठित बड़े विद्यालय से शन्नो ने इस्तीफा दे दिया था। कुछ…"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
12 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"बहुत आभार आदरणीय ऋचा जी। "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"नमस्कार भाई लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है।  आग मन में बहुत लिए हों सभी दीप इससे  कोई जला…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"हो गयी है  सुलह सभी से मगरद्वेष मन का अभी मिटा तो नहीं।।अच्छे शेर और अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आ.…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"रात मुझ पर नशा सा तारी था .....कहने से गेयता और शेरियत बढ़ जाएगी.शेष आपके और अजय जी के संवाद से…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. ऋचा जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. तिलक राज सर "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. जयहिंद जी.हमारे यहाँ पुनर्जन्म का कांसेप्ट भी है अत: मौत मंजिल हो नहीं सकती..बूंद और…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service