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गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता

महाभुजंगप्रयात सवैया

कड़ी धूप या ठंड हो जानलेवा न थोड़ी दया ये किसी पे दिखाती।
कि लेती कभी सब्र का इम्तिहां और भूखा कभी रात को ये सुलाती।।
जरूरी यहाँ धर्म-कानून से पूर्व दो वक्त की रोटियाँ हैं बताती।
गरीबी न दे ऐ खुदा! जिंदगी में कि इंसान से ये न क्या क्या कराती?

शिल्प-लघु गुरु गुरु(यगण)×8

रचनाकार- रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 601

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 30, 2019 at 7:52pm

आ. भाई रामबली जी, सादर अभिवादन।सुंदर छंद हुए हैं। हार्दिक बधाई।

Comment by रामबली गुप्ता on April 29, 2019 at 3:17pm

आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय समर भाई साहब

Comment by रामबली गुप्ता on April 29, 2019 at 3:16pm

सादर आभार भाई सुरेन्द्रनाथ जी

Comment by Samar kabeer on April 29, 2019 at 3:10pm

जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत अच्छा छन्द लिखा आपने,मेरी तरफ़ से बधाई स्वीकार करें ।

Comment by नाथ सोनांचली on April 25, 2019 at 4:35pm

आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। वाह क्या बेहतरीन छंद लिखा है बन्धु, बहुत बढ़िया। विषय भी दिल को छूता हुआ। बधाई स्वीकार कीजिये

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