For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता

सूत्र-सात यगण +गा; 122×7+2

पड़ी जान है मुश्किलों में करूँ क्या कि नैना मिले और ये हो गया।
गई नींद भी औ' लुटा चैन मेरा न जाने जिया ये कहां खो गया।।
जिया के बिना भी जिया जाय कैसे अरे! कौन काँटें यहां बो गया।
हुआ बावरा या नशा प्यार का है संभालो मुझे हाय! मैं तो गया।।

रचनाकार-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 92

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on April 21, 2019 at 12:07pm

बहुत सुंदर छन्द आदरणीय रामबली भाई जी,  विधान यगण ×7 +लगा प्रतीत हो रहाhai. सादर

Comment by रामबली गुप्ता on April 19, 2019 at 5:41pm

आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय भाई बृजेश कुमार जी

Comment by रामबली गुप्ता on April 19, 2019 at 5:40pm

सराहना एवं प्रोत्साहन के लिए सादर आभार भाई आद सुशील सरना जी

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 19, 2019 at 3:43pm

वाह जी वाह आदरणीय गुप्ता जी खूब छंद निभाया है सुन्दर सरस..

Comment by Sushil Sarna on April 18, 2019 at 8:00pm

आदरणीय रामबली गुप्ता जी अति सुंदर और मनभावन सृजन के लिए दिल से बधाई ।

Comment by रामबली गुप्ता on April 18, 2019 at 3:23pm

लिखने में टंकण त्रुटि हो गई है आदरणीय गोपाल सर जी।क्षमाप्रार्थी हूँ अभी सुधार लेता हूँ। सादर धन्यवाद

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 18, 2019 at 1:20pm

प्रिय राम बली जी . आपके सूत्र की मात्रिक व्यवस्था अधूरी है -  (122X 7+ 1 2 )और वर्णिक  व्यवस्था आपने दी  नही (12 वर्ण , 11 वर्ण )

आपके छंद का शिल्प सधा हुआ है i इसके लिए बधाई  I 

Comment by रामबली गुप्ता on April 17, 2019 at 6:34pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय भाई साहब। सब आप सभी सामीप्य और सहयोग से सीखा है।

Comment by Samar kabeer on April 17, 2019 at 6:13pm

जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत मुश्किल छन्द है भाई,कहने में पसीने आ जाते हैं,मगर आपने बहुत ख़ूब कहा, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जब मिरी रही उलझी जिंदगी सवालों में रोशनी कहाँ आ क् र खेलती ख्यालों में सोचता रहा क्यूँ घर नहीं जले…"
22 minutes ago
Gurpreet Singh jammu updated their profile
1 hour ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीया अंजलि गुप्ता जी बहुत बहुत बधाई स्वीकार किजिए अच्छी ग़ज़ल के लिए सादर।"
1 hour ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"मोहतरम नाहक जी बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें सादर"
1 hour ago
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"फ़ैसला तुम्हारा क्यों, घिर गया सवालों में । जान जाओगे तुम भी, आने वाले सालों में । बर्गरों में…"
1 hour ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय मुनिष जी अच्छी कोशिश के लिए बहुत सारी बधाई स्वीकार करें।"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"मुहतरमा अंजलि गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब नाहक़ साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"मोहतरमा राजेश कुमारी जी आदाब बहुत बहुत बधाई उमदा कलाम कहा आपने। "
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"बहना राजेश कुमारी जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'बेरहम हवाओं ने उसके पर कतर…"
1 hour ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"मोहतरम आली जनाब उस्ताद समर कबीर साहब बहुत बहुत शुक्रिया कमीयों से वाक़फ़ियत हुई, बहुत अचछा होता अगर…"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब मुनीश तन्हा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है बधाई स्वीकार करें । मुहतरमा अंजलि जी से सहमत हूँ…"
1 hour ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service