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महाभुजंगप्रयात छंद में पहली रचना

नहीं वक़्त है ज़िन्दगी में किसी की, सदा भागते ही कटे जिन्दगानी
कभी डाल पे तो कभी आसमां में, परिंदों सरीखी सभी की कहानी
ख़ुशी से भरे चंद लम्हे मिले तो, गमों की मिले बाद में राजधानी
सदा चैन की खोज में नाथ बीते, किसी का बुढ़ापा किसी की जवानी।।

शिल्प-लघु-गुरु-गुरु (यगण)×8 

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by नाथ सोनांचली on May 7, 2019 at 3:26pm

आद0 सौरभ पांडेय जी सादर अभिवादन। ओ बी ओ पर आपके द्वारा दी गयी जानकारियों को पहले पढ़ा, फिर उन्हें आत्मसात करते हुए जब आगे बढ़ा तो कई छंद लिखते हुए महाभुजंग प्रयात छंद को साधना शुरू किया। आपकी कृपा और माँ पिता के आशीष से जब यह पहली रचना सध गयी तो काफी आत्मसंतोष हुआ। अवश्य आपके कहे अनुसार परिवर्तन को सोचूंगा। आपका हृदय तल से आभार। सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 7, 2019 at 2:47pm

आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी, आपके इस प्रयास की सचेष्टता स्पष्ट दीखती है. इस निमित्त आपको हार्दिक बधाइयाँ. 

यह अवश्य है कि ऐसी पंक्तियों को विशेषकर हिन्दी के आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करना सरल नहीं है. सवैया रचनाएँ, जहाँ वर्णक्रम नियत है वैसे शब्दों का चयन ही अपने आप में दुष्करहै. यहाँ तो भावों को शाब्दिक करना है. अतः आपका प्रयास मुग्धकारी है. 

फिर भी, तीसरी पंक्ति या पद को कुछ और समय दिया जाता तो अभिव्यक्ति और सुगढ़ होती. नहीं, इसमें कोई दोष नहीं है, बल्कि इस पंक्ति के दूसरे हिस्से की अभिव्यक्ति की बात कर रहा हूँ. फिर भी, यह तो मानना तो होगा, आपने अत्यंत संयमित प्रयोग किया है. 

शुभातिशुभ

 

Comment by नाथ सोनांचली on May 6, 2019 at 7:05pm

आद0 बासुदेव अग्रवाल नमन जी सादर अभिवादन। आपको रचना पसंद आई, लिखना सार्थक हुआ। आभार आपका।

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on May 5, 2019 at 3:36pm

वाह सुरेंद्र नाथ जी महाभुजंग प्रयात में अच्छी रचना हुई है। बधाई

Comment by नाथ सोनांचली on April 30, 2019 at 1:00pm

आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। आपका अनुमोदन मिला, रचना कर्म पूर्ण हुआ। आपका हृदय तल से आभार। सादर

Comment by Samar kabeer on April 29, 2019 at 6:01pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,अच्छा छन्द रचा आपने,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by नाथ सोनांचली on April 25, 2019 at 10:24pm

आद0 डॉ. प्राची सिंह जी सादर अभिवादन। रचना के भाव आप तक पहुंचे, लेखन सार्थक हुआ। आभार आपका


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 25, 2019 at 9:21pm

सचमुच ज़िन्दगी में व्यस्तताएं इस कदर उलझाए रखती हैं कि पता ही नहीं चलता ज़िन्दगी कब बीत गयी 

प्रस्तुति पर बधाई 

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