For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कितने "अपने"

पहचाने थे यही रास्ते

पेड़ों की छाँह ओढ़े

कुहनी टेक

सरक जाते थे कितने

अच्छे-बुरे तजुर्बे

अचानक

चौंक जाती थी शाम

"मुझको घर जाना है"

तुम्हारे अरुणिम ललाट पर

अकस्मात चिंता की छायाएँ

और फिर ...

और फिर देख 

मेरी आँखों में अपनी आँखों की चमक

तुम्हारा ही मन नहीं करता था 

हाथ छोड़ चले जाने को

कि मानो जाते-जाते रुक जाती थी शाम

एक "और" आज के प्रेम-पत्र पर

सत्य की मुहर लगाने को

सुना है, मेरी तरह

तुम भी सहम-सहम कर

कभी लड़खड़ाती, कुछ बुदबुदाती

अतीत के टुकड़ों में मेल-जोल

जोड़-तोड़ करती

समर्पणशील भोली लहर-सी

खो देती हो खुद को इस नई शाम में

और सन्धया वेला की आरती उतारते

ढूँढती हो हवाओं के बेसब्र आलापों में

अब कुचली हुई उस पुरानी परेशान शाम को

सुनो, रुको-रुको

ज़िन्दगी के मैदानों में 

घनी-घनी काँपती काली छायाओं में

सुनता हूँ मैं मीठे समीर-सी

लौटते हुए पहचाने पैरों की 

आत्मा की आहट

शायद ... 

            -------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 489

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on October 4, 2019 at 4:28pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, भाई समर कबीर जी।

Comment by vijay nikore on October 4, 2019 at 4:27pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, मित्र लक्ष्मण धामी जी

Comment by Samar kabeer on October 4, 2019 at 11:10am

प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,बहुत ख़ूब, वाह, बहुत अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 2, 2019 at 2:20pm

आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन। साथ ही इस भावविभोर करती रचना के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by vijay nikore on October 2, 2019 at 12:07pm

 सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, मित्र बृजेश जी।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 1, 2019 at 12:08pm

अनुपम भाव रचना आदरणीय विजय जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service