For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नकेलें ग़म के मैं नथुनों में डालूँ (६६)

(१२२२ १२२२ १२२ )

.

नकेलें ग़म के मैं नथुनों में डालूँ
ख़ुदाया मैं भी कुछ खुशियाँ मना लूँ
**
मुझे भी तो अता कर चन्द मौक़े
ख़ुदा मैं भी तो जीवन का मज़ा लूँ
**
मुहब्बत में तिरी है जीत पक्की
भला फिर किसलिए सिक्का उछालूँ
**
हवा जब खुशबुएँ बिखरा रही है
ख़लल क्यों काम में बेकार डालूँ
**
पुराने दोस्त क्या कम हैं किसी से
नये क्यों आस्तीं में मार* पालूँ (साँप )
**
मुसीबत आ गई मेहमान बनकर
बता कैसे ख़ुदा घर से निकालूँ
**
ख़ुमारी चढ़ गई आँखों की मय की
भला अब होश मैं कैसे सँभालूँ
**
तुझे जब क़त्ल करना ही है मुझको
मिरी हिम्मत कहाँ ख़ुद को बचालूँ
**
'तुरंत ' आये क़ज़ा अपनी रजा से
नहीं बस में कि जब चाहे बुला लूँ
**
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी
मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 109

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on October 14, 2019 at 12:02pm

 // मेहमान  को वजन में अधिकतर सुख़नवरोँ के कलाम में २२१ ही देखा है २१२१ नहीं | इतना ही नहीं जिस भी लफ्ज़ में दूसरा अक्षर "ह" होता है उसमें उससे पहले के अक्षर की एक मात्रा गिरती हुई देखी है | जैसे मेहरबानी =१२२२ ,मोहलत =२२ , मेहनत =२२ , ज़ेहन =२१ , शोहरत =२२ , आदि | //

भाई 'ह' के पहले वाले अक्षर की मात्रा गिराने की ज़रूरत ही क्या है,आपने इस तरह के जितने शब्द उदाहरण में लिखे हैं,उनका सहीह उच्चारण देखिये:-

'मेहमान'--"महमान"

'मेहनत'--"मिहनत"

''ज़ेहन'--"ज़ह्न"

'शोहरत'--"शुहरत" 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on October 13, 2019 at 6:54pm

आदरणीय Samar kabeer साहेब ,आदाब , आपकी पृरखलुस हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया |  मेहमान  को वजन में अधिकतर सुख़नवरोँ के कलाम में २२१ ही देखा है २१२१ नहीं | इतना ही नहीं जिस भी लफ्ज़ में दूसरा अक्षर "ह" होता है उसमें उससे पहले के अक्षर की एक मात्रा गिरती हुई देखी है | जैसे मेहरबानी =१२२२ ,मोहलत =२२ , मेहनत =२२ , ज़ेहन =२१ , शोहरत =२२ , आदि | कृपया इस बारे में कोई जानकारी है तो प्रदान करें | 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on October 13, 2019 at 6:47pm

आदरणीय Shyam Narain Verma जी , रचना की सराहना के लिए सादर आभार 

Comment by Samar kabeer on October 13, 2019 at 2:56pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

'मुसीबत आ गई मेहमान बनकर'

इस मिसरे में 'मेहमान' को "महमान" कर लें,क्योंकि 'मेहमान' का वज़्न 2121 है ।

Comment by Shyam Narain Verma on October 12, 2019 at 5:23pm
प्रणाम आदरणीय, बहुत ही उम्दा प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बधाई लीजिए, छंदविशारद आप आए क्यों पर देर से, देने अपनी छाप ?? सादर "
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"जी ! सादर प्रणाम."
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपका सुझाव शिरोधार्य है. किंतु, एक मत यह भी हो सकता है, कि दोहा में प्रयुक्त…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहे   काम सदा इन्सान के, आता है इंसान । फोटो खूब खिंचाइये, किन्तु कीजिये दान ।।1   हाथ…"
2 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी इस प्रयास पर आपकी सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय  जी आपके…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई सत्यनारायण सिंह जी सादर, प्रदत्त चित्र के माध्यम से दीनों के हित कार्य करने का सन्देश…"
2 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से आभार आदरणीय अखिलेश कुमार जी सादर"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी इस उत्सव में आपका आना सुखद है। उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रदत्त चित्र पर सुंदर दोहा गीतिका रची है आपने. हार्दिक बधाई…"
2 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"उत्सासाहवर्धन के लिए हृदय से आभार आपका आदरणीया प्रतिभा पांडे जी"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी अति सुंदर गीतिका आधारित दोहा छंद , हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र को सुन्दरता के साथ आपने दोहों में परिभाषित…"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service