For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चंद क्षणिकाएँ :जीवन

चंद क्षणिकाएँ :जीवन 

बदल गया
जीवन
अवशेषों में
सुलझाते सुलझाते
गुत्थियाँ
जीवन की

आदि द्वार पर
अंत की दस्तक
अनचाहे शून्य का
अबोला गुंजन

अवसान
आदि पल की
अंतिम पायदान

प्रेम
अंतःकरण की
अव्याखित
अनिमेष
सुषमा रशिम


ज़माने को

लग गई
नई नेम प्लेट
बदल गई
घर की पहचान
शायद चली गई
थककर
दीवार पर टंगे टंगे
पुरानी

नेम प्लेट में
लिपटी

घर की जान 


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 614

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on November 5, 2019 at 4:40pm

आदरणीया सुरेन्द्र नाथ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है ।

Comment by Sushil Sarna on November 5, 2019 at 4:39pm

आदरणीया ऊषा जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है ।

Comment by Sushil Sarna on November 5, 2019 at 4:38pm

आदरणीया डॉ गीता चौधरी जी सृजन पर आपकी हृदयग्राही प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on November 5, 2019 at 4:36pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब .... बन्दे के सृजन पर बेशकीमती तारीफ़ का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on November 5, 2019 at 4:35pm

आदरणीय शेख़ उस्मानी साहिब, आदाब .... बन्दे के सृजन पर आपकी हृदयग्राही प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by नाथ सोनांचली on November 2, 2019 at 4:59pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। हर बार की तरह पुनः एक बेहतरीन रचना,, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये। सादर

Comment by Usha on November 2, 2019 at 11:32am

आदरणीय श्री सुशील सरना जी, दो अकाट्य सत्यों 'जीवन और मृत्यु' जिनसे हम भली-प्रकार अवगत होते हुए भी सुलझने से ज़्यादा उलझते हुए हम इस सफ़र पर को निभाते हैं। आपने बड़ी ही खूबसूरती से इनके महत्व को व्यक्त किया। हार्दिक बधाई। सादर।

Comment by Dr. Geeta Chaudhary on November 2, 2019 at 6:57am

आदरणीय सुशील सरना जी नमस्कार, फिर आपकी सुंदर क्षणिकाएं आ गई मंच पर नहीं दिल पर दस्तक देने.. हर क्षणिका अपने में पूरा जीवन दर्शन समेटे हुएI सुंदर  भावों को सुंदर शब्दों में ढालने के लिए बहुत बधाई!

Comment by Samar kabeer on November 1, 2019 at 2:21pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 31, 2019 at 10:16pm

आदाब। बेहतरीन भाषा-शिल्पमय बेहतरीन क्षणिकायें।  दार्शनिकता, मनौवैज्ञानिकता,  व्यावहारिकता.. सब कुछ शाब्दिक होता है आपकी रचनाओं/क्षणिकाओं में। हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय सुशील सरना साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted blog posts
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
16 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
16 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
16 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
16 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
17 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
17 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service