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::::: मैं एक हर्फ़ हूँ ::::: Copyright ©

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▬► Photography by : Jogendrs Singh ©

::::: मैं एक हर्फ़ हूँ ::::: Copyright © (मेरी नयी कविता)
जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh ( 09 अगस्त 2010 )

मेरे मित्र आर.बी. की लिखी एक रचना जो नीचे ब्रैकेट्स में लिखी है से प्रेरित होकर मैंने अपनी रचना रची है..
आर.बी. की मूल रचना नीचे है आप देख सकते हैं ► ► ►
((hum dono jo harf hain....
hum ek roz mile....
ek lafz bana...
aur humne ek maane paaye,...
phir jaane kya hum per guzri ....
aur..
ab yun hain....
tum ek harf ho ek khaane mein ....
main ek harf hoon ek khaane mein ....
beech mein kitne lamhoN ke khaane khaali hain......
phir se koi lafz bane.....
aur hum dono ek maane paayeiN ......
aesa ho sakta hai...
lekin.....
sochnaa hogaa...
in khaali khaanoN Mein humeiN bharnaa kya hai... ► आर.बी.))

▬► NOTE :- कृपया झूठी तारीफ कभी ना करिए.. यदि कुछ पसंद नहीं आया हो तो Please साफ़ बता दीजियेगा.. मुझे अच्छा ही लगेगा..
▬► !!..धन्यवाद..!!
.

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Comment by विवेक मिश्र on September 9, 2010 at 5:22pm
आदरणीय जोगेंद्र जी.. आपकी नज़्म पढ़ी. बहुत ही अच्छी पेशकश है. पढ़कर आनंद आया. "हुलराना" शब्द का अर्थ स्पष्ट नहीं हुआ. ज़रा मेरा ज्ञान बढ़वाइये.
हाँ.. एक और बात. ये कविता जिसे आपके मित्र श्रीमान R.B. जी ने लिखा है, असल में जावेद अख्तर साहब की लिखी 'तरकश' से है. वहाँ इस नज़्म का शीर्षक है "मुअम्मा" (जिसका अर्थ 'पहेली या उलझन' होता है).
Comment by आशीष यादव on September 7, 2010 at 11:42am
jogendra ji aapki rachana padhkar ek hunk si uth rahi hai. lagta hai ki koi apna koso dur chala gaya hai jo hamaare bagair kabhi n rahne ki kalpna karta tha |
in par mai apni shayri pesh kar raha hu,
कभी इश्क में मरने की कसमें वो खाते थे;
अब देखो प्यार छोड़ किस कदर मुस्कराते हैं|
कहते थे, तेरे बिना हम चल नहीं सकते;
कैसे हाथ गैर का थाम, सामने से जाते हैं||
Comment by Subodh kumar on September 6, 2010 at 5:19pm
kya baat jogi...kya shaandaar likha hai tumne..bhai tum lekhak ke saat saath achche kalakaar bhi ho..kya edit kiya hai...ati sunder dost!
Comment by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on September 6, 2010 at 2:22pm
@ बागी भई , मानवर्धन के लिए धन्यवाद ... :)

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 6, 2010 at 2:16pm
अच्छी रचना है योगिंदर भाई, आप की शैली जबरदस्त है, बहुत बढ़िया, शानदार अभिव्यक्ति हेतु बधाई स्वीकार करे,

कृपया ध्यान दे...

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