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क्या शहर ,क्या गाँव

मेरे लिए
क्या शहर ,क्या गाँव
जीवन तपती दुपहरी
नहीं ममता की छाँव
 
गाँव में,भाई को
मेरी देख रख में डाल
माँ जाती ,भोर से
खेती की करने
सार सम्भाल
 
शहर में,बड़ा भाई
जाता है कारखाने
गृहस्थी का बोझ बंटाने
खुद को काम में खपाने
 
कच्ची उम्र की मजबूरी
काम पूरा,मजदूरी मिलती अधूरी
हाथ में कलम पकड़ने की उम्र में
बनाता है ,कारखाने में बीड़ी
बाल श्रम का यह रोग
पहुँचता जाएगा
पीढ़ी दर पीढ़ी
 
छोटे भाई की देख रख का
नहीं हैं मलाल
पर मेरे लिए,जाने कब
आयेगा वह साल
जब मैं भी
जा सकूंगी स्कूल
 
ज़िंदगी की चक्की  से
गर दो घंटे भी
फुर्सत पाऊँ
खुद पढूँ ,साथ मैं
छोटे भैया को भी पढाऊँ

 
कुछ कर गुजरने की चाह
मन में संवारती
छोटे भाई को दुलारती
गीली लकड़ियाँ सुलगाती
रांधती हूँ दाल भात
माँ वापिस आती,थकी हारी
लिए शिथिल गात
 
दिन भर  की थकान से पस्त
सो जाती,बिन किये कोई बात
ममता के दो बोल को तरसता
जीवन मेरा,मेरे जीवन का नाम अभाव
मेरे लिए क्या शहर ,क्या गाँव
जीवन तपती दुपहरी,नहीं ममता की छाँव
 

  • रजनी छाबड़ा

Views: 617

Comment

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 3, 2012 at 11:32pm

ममता के दो बोल को तरसता 
जीवन मेरा,मेरे जीवन का नाम अभाव
मेरे लिए क्या शहर ,क्या गाँव 
जीवन तपती दुपहरी,नहीं ममता की छाँव

आदरणीया रजनी  जी ..सुन्दर रचना ..काश ऐसा न हो ..बेटियों को भरपूर प्यार मिलना ही चाहिए  ..भ्रमर ५ 

  ..भ्रमर ५ 

 

Comment by rajni chhabra on May 6, 2012 at 9:50pm

thanx,Gaurav for ur review

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on May 6, 2012 at 5:23pm

ज़िंदगी की चक्की  से
गर दो घंटे भी 
फुर्सत पाऊँ
खुद पढूँ ,साथ मैं
छोटे भैया को भी पढाऊँ

आदरणीया रजनी जी इस भावपूर्ण लेखन के लिए बधाई

Comment by rajni chhabra on May 3, 2012 at 10:27pm

dushyant jee,kavita ke mrm tak pahunchane ke liye abhaar

 

Comment by rajni chhabra on May 3, 2012 at 10:26pm

kushwaha jee,bahut bahut abhaar aapke amuly comment ke liye

 

Comment by दुष्यंत सेवक on May 3, 2012 at 4:31pm

आदरेया रजनी जी मजदूर की अवस्था का मार्मिक बखान आपने अपनी कविता में सुन्दर शब्दों के माध्यम से किया है.. बात सीधे मर्म पर चोट करती है.. इस भावपूर्ण लेखन के लिए बधाई व शुभकामनायें स्वीकारें

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 1:14pm

bacche ki manobhavna, man ki pida ka bahut sundar tarike se prastut karne par badhai.aadarniyaa rajni ji, saadar

Comment by rajni chhabra on May 1, 2012 at 10:41pm

shukriya,Chotu Singh ji, main appkee rai se itefaq rkhtee hon

Comment by rajni chhabra on May 1, 2012 at 5:30pm

RAJESH KUMAREE JII,TAHE DIL SE SHUKRIYA ,ITNE UMDA COMMENT KE LIYE

Comment by rajni chhabra on May 1, 2012 at 5:29pm

Saurabh ji,aapke swaednsheel comment ke liye abhaar

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