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मुक्तिका : संजीव 'सलिल'

मुक्तिका :
नया आज इतिहास लिखें हम
संजीव 'सलिल'

*
नया आज इतिहास लिखें हम.
गम में लब पर हास लिखें हम..

दुराचार के कारक हैं जो
उनकी किस्मत त्रास लिखें हम..

अनुशासन को मालिक मानें
मनमानी को दास लिखें हम..

ना देवी, ना भोग्या मानें
नर-नारी सम, लास लिखें हम..

कल की कल को आज धरोहर
कल न बनें, कल आस लिखें हम..
(कल = गत / आगत / यंत्र / शांति)

नेता-अफसर सेवक हों अब
जनगण खासमखास लिखें हम..

स्वार्थ भावना दूर करें
सर्वार्थ भावना पास लिखें हम..

हाथ मिला जीतें हर बाधा
मरुथल में मधुमास लिखें हम..

श्रम हो कृष्ण, लगन हो राधा
'सलिल' सफलता रास लिखें हम..

*****

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Comment

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Comment by sanjiv verma 'salil' on January 12, 2013 at 8:21pm

anvesh ji dhanyavad. aap ise miton ke sath avashya bantiye aur unkee pratikriya bhee mujh tak pahunchaiye. hm is taram sahityok sahbhagita ka itihas bana ssakte hain.

Comment by Anwesha Anjushree on January 11, 2013 at 7:06pm

Adhbhut rachna....agar aagya de to mitron se share karna chahungi......naman

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 10, 2013 at 4:01pm

आदरणीय सलिल जी 

अब नया इतिहास लिखें 

सुन्दर 

बधाई 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 10, 2013 at 2:11pm

//ना देवी, ना भोग्या मानें
नर-नारी सम, लास लिखें हम..//

बहुत ही सुन्दर मुक्तिका, सभी द्विपदियाँ खुबसूरत और भाव प्रधान बन पड़ीं हैं, बहुत बहुत बधाई इस शानदार अभिव्यक्ति पर |

कृपया ध्यान दे...

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