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निष्पक्षता -- डॉo विजय शंकर

कोई कितना भी काबिले तारीफ़ हो ,
हमें दिखाई देता नहीं ,
दुनिया उसे इनाम इकराम दे दे
तो हम भी फोटो ओटो
छपवा देते हैं उसकी ,
क़ि देखो एक देसी
कैसा नाम किया है देश का ॥
दो चार दिन ,बस ,ज्यादा नहीं ॥
बात पक्षपात की नहीं है ,
ऐसा न सोचियेगा , न कहियेगा ॥
क्योंकि जो अपराधी हैं ,
जो विदेशों में काला धन जमा किये हैं ,
वो भी तो हमें नहीं दिखाई देते ॥
हम अच्छे बुरे से ऊपर हैं,
सिर्फ अपना मतलब देखते हैं , बस ॥

मौलिक एवं अप्रकाशित

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 15, 2014 at 1:19pm

//हम अच्छे बुरे से ऊपर हैं,
सिर्फ अपना मतलब देखते हैं , बस ॥//

 

बात एकदम खरी खरी किन्तु सत्य, इस वैचारिक रचना हेतु दिल से बधाई आदरणीय डॉ विजय शंकर जी। 

Comment by khursheed khairadi on October 15, 2014 at 9:32am

कोई कितना भी काबिले तारीफ़ हो ,
हमें दिखाई देता नहीं 

आदरणीय विजयशंकर सा. सच यही है ,मतलबपरस्ती आज सभी के हाथ बांधे हुये है |सादर अभिनन्दन 

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 15, 2014 at 12:26am

जी , उसके आगे कुछ देख भी नहीं पाते  हैं।  रचना को स्वीकार करने केलिए आभार एवं आपकी बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद प्रिय जीतेन्द्र  जी  . 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 14, 2014 at 11:32pm

बस! यही एक सच है कि हम सिर्फ अपना मतलब ही देखते है. बहुत अच्छी रचना आदरणीय डा.विजय जी, हार्दिक बधाई स्वीकारें

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