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नवेली का भोज -डॉo विजय शंकर

नई नई शादी हुयी थी उनकीं। कुछ दिन दावतों वावतों का दौर चला फिर कुछ ख़ास दोस्तों ने कहना शुरू किया , " भाभी जी क्या बनाती हैं , कैसा बनाती हैं , कभी हम भी तो देखें। " जी , भाई साहब , क्यों नहीं , जरूर ", भाभी जी का सभी को यही जवाब होता था। फिर एक दिन उन्होंने पूरा भोज बनाया, कई तरह के पकवान बनाये , डाइनिंग टेबल पर सब सजाया , चारों एंगिल से उसकी फोटो खींची और फेसबुक पर डाल दी और लिख दिया , "सभी जानने वालों के देखने के लिए "
डेढ़ सौ लाइक आ गए और बहुतों ने कमेंट भी किया , " मजा आ गया , बहुत ही स्वादिष्ट ".


मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker on October 21, 2014 at 7:38pm

आपको लघु कथा पसंद आई , कथा सार्थक हुयी , बधाई के लिए सादर धन्यवाद आदरणीय विजय निकोर जी।

Comment by vijay nikore on October 21, 2014 at 2:58am

बहुत ही सुंदर लघुकथा है। हार्दिक बधाई।

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 19, 2014 at 9:59pm

बधाई के लिए धन्यवाद आदरणीय महिमा श्री जी , 

Comment by MAHIMA SHREE on October 19, 2014 at 8:19pm

हा हा बढिया रहा ....हार्दिक बधाई प्रेषित है ..

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 19, 2014 at 3:04pm
प्रिय जितेन्द्र जी , आजकल फेसबुक पर यही दिखाई दे रहा है , आपकी बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
Comment by Dr. Vijai Shanker on October 19, 2014 at 2:59pm
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी।
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 19, 2014 at 10:31am

गजब का प्रहार किया है आपने. बिलकुल स्वच्छता अभियान में झाड़ू के साथ फोटो निकलवाने जैसा.. :)) . बधाई स्वीकारें आदरणीय डा.विजय शंकर जी

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 18, 2014 at 10:37pm

फेस बुक पेज पर खुशबू आ रही होगी जिसे सूंघ कर कमेन्ट किया होगा - " मजा आ गया , बहुत ही स्वादिष्ट ". हां हां आहा हां-----

सुंदर हास्य का पुट लिए लघु कथा वाह ! बधाई डॉ विजय शंकर जी 

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 18, 2014 at 10:14am
आदरणीय सोमेश कुमार जी रचना की स्वीकृति के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
Comment by somesh kumar on October 17, 2014 at 11:13pm

नए समय की नई परिपाटी पर सटीक प्रहार |उत्तम रचना |

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