For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इस दीपावली एक ऐसा दीप जलायें - डॉo विजय शंकर

आओ इस दीपावली
एक ऐसा दीप जलायें
भटके हुए रहनुमाओं को
सही रास्ता दिखायें।
आओ इस दीपावली एक ……
वो जो अन्धकार को
अन्धकार से मिटाने
का दम भरते हैं,
दूसरों के लिए उठाया
हर कदम अन्धकार की
ओर ही रखते हैं ,उन्हें
दीप-ज्योति कुछ यूँ दिखायें ,
कभी दूसरों के लिये भी
रौशनी में चलना सिखायें।
आओ इस दीपावली एक ……

उनकी दीवाली शुभ हो ,
हमारी दीवाली शुभ हो ,
इस बार सबकी दीवाली
शुभ- और - शुभ बनायें।
आओ इस दीपावली एक ……

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 427

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 25, 2014 at 6:15pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण लाड़ीवाल जी , दीपावली की शुभ कामनाये , सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 24, 2014 at 12:08pm

बहुत सुंदर भाव रचित रचना के लिए बधाई एवं दीपोत्सव की अनंत शुभ कामनाए डॉ विजय शंकर जी 

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 23, 2014 at 3:46pm

आदरणीय सत्य  नारायण सिंह जी रचना को मान देने के लिए आभार ,  सादर ।  दीपावली की शुभ कामनायें

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 23, 2014 at 3:44pm

आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी आपके उत्साहवर्धन को नमन , सादर ।  दीपावली की शुभ कामनायें। 

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 23, 2014 at 3:42pm

प्रिय जीतेन्द्र जी , रचना को मान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।  दीपावली की शुभ कामनायें। 

Comment by Satyanarayan Singh on October 23, 2014 at 1:17pm

आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी सादर,

 अति सुन्‍दर भाव एवं प्रस्‍तुति हेतु हार्दिक बधाई. तथा  दीपावली की अनेकानेक शुभ कामनाओं सहित 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 23, 2014 at 10:56am

विजय सर !

आपकी सद्भावना को प्रणाम i

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 22, 2014 at 11:57pm

सुंदर आशाभरी पंक्तियाँ, बधाई स्वीकारें आदरणीय डा.विजय जी. दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामानाएं आपको..सादर!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"वतन में जतन (लघुकथा) : अमेरिका वाले ख़ास रिश्तेदार अपने युवा बच्चों को स्वदेश घुमाने और…"
1 hour ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय चेतन प्रकाश जी "
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
" ,आ, नीलेशजी कुल मिलाकर बहुत बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई,  जनाब!"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन।  गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार। भाई तिलकराज जी द्वार…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई तिलकराज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए आभार।…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"तितलियों पर अपने खूब पकड़ा है। इस पर मेरा ध्यान नहीं गया। "
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service