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हे लोकतंत्र के निर्माता - डॉo विजय शंकर

हे लोकतंत्र के निर्माता
नेताओं के भाग्यविधाता ,
तंत्र के मायाजाल से अंजान
तुम्हें ही लोकतंत्र नहीं आता।
वो दूर मंच से तुम्हें ,
शब्दों के लॉलीपॉप दिखाता ,
कोरे रंगीन सपने दिखाता और
मन ही मन अपने सपने सजाता ,
हाथ जोड़ कर तुमसे उन्हें पूरे कराता ,
और पांच साल के लिए
तुम्हारा ही भाग्यविधाता बन जाता।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on January 9, 2017 at 7:30pm
आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , इस गंभीर विषय पर आपकी अभिव्यक्ति बहुत अच्छी लगी। व्यवस्था कोई भी हो , उसकी सफलता के लिए एक गंभीरता की आवश्यकता होती है , जब वही अपेक्षित रह जाती है तो व्यवस्था कमजोर और निष्प्रभावी हो जाती है। आपके विचारों के लिए ह्रदय से आभार और धन्यवाद। सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 9, 2017 at 7:23pm
आदरणीय विजय निकोर जी , आपकी उपस्थिति और अभिव्यक्ति दोनों ही सुखद रही , आशा है आप पूर्ण स्वस्थ हैं और आगे भी रहें। रचना पर आपके आगमन हेतु आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 9, 2017 at 7:23pm
प्रिय मिथिलेश वामनकर जी , लोक और लोकतंत्र में एक सामंजस्य का होना जरूरी होता है , सम्प्रति तो उसकी आवश्यकता है। रचना पर आपकी उपस्थित और अभिव्यक्ति दोनों के लिए आभार और धन्यवाद , सादर।
Comment by Samar kabeer on January 9, 2017 at 4:11pm
आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,लोकतंत्र महज़ एक तमाशा बनकर रह गया है,और हम तमाशाई बने (मदारी)निर्माता का मुंह देख रहे हैं,बहतरीन तंज़,इस शानदार प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by vijay nikore on January 9, 2017 at 8:14am

लोकतंत्र पर यह रचना अच्छी लगी। बधाई, आदरणीय विजय जी।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 8, 2017 at 9:12pm

आदरणीय डॉ. विजय शंकर सर, लोकतंत्र और भारतभाग्य विधाताओं की वास्तविकता को उजागर करती बहुत बढ़िया प्रस्तुति हुई है. इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई निवेदित है. सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 8, 2017 at 8:31pm
आदरणीय डॉo आशुतोष मिश्र जी , रचना के इतनेसुंदर अनुमोदन हेतु आभार , आपकी बधाई हेतु हार्दिक धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 8, 2017 at 8:29pm
आदरणीय महेंद्र कुमार जी , इस रचना के अनुमोदन हेतु , आभार , आपकी बधाई हेतु हार्दिक धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 8, 2017 at 8:29pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , आपने इस रचना को अनुमोदन किया , आभार , आपकी बधाई हेतु हार्दिक धन्यवाद , सादर।
- डॉo विजय शंकर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 8, 2017 at 10:29am
आदरणीय विजय सर मैं आपकी रचना के तथ्यों से पूरी तरह से सहमत हूँ वाकई ऐसा ही हो रहा है इस रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करेंसादर

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