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वाराणसी की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था " परिवर्तन " की ७४ वीं गोष्ठी में पढ़ी गयी मेरी एक ग़ज़ल !

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Comment by Abhinav Arun on March 10, 2012 at 12:56pm

हार्दिक आभार श्री राकेश जी | लिखना और उसे मंच पर पढना दो अलग अलग पहलू है फिर भी प्रयास जारी है आप सबका स्नेह मिलता रहे सफलता ज़रूर मिलेगी !!

Comment by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' on March 9, 2012 at 12:48pm

Bahut khub Arun ji, Prastuti ka Lahja bhi bahut umda hai, "chal ke aayin hai meelo se lahare, ghat ki seedhiya dhone do".... Vah vah!!!

Comment by Abhinav Arun on February 29, 2012 at 2:38pm
Waah Venus Ji apki tarif ka jawab nahin.Man bag bag ho gaya :-)
Comment by वीनस केसरी on February 29, 2012 at 1:31pm

आज बातों का असर होता नहीं
मुझको दो चार जादू टोने दो 

बहुत ऊँचा शेर है
बहुत ही ऊँचा

हर लिहाज से जिंदाबाद

Comment by Tapan Dubey on February 29, 2012 at 11:03am

waah waah kya baat hai

Comment by Abhinav Arun on November 2, 2011 at 7:45pm
Adarniy Saurabh Ji apke protsahan se nikhar ayega ! Abhari hoon !

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 2, 2011 at 1:21pm

बहुत प्रभावी पाठ.  ऐसे अवसरों और प्रयासों से साहित्यिक चेतना समृद्ध होती है.

हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ ... .

 

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