For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

क्या मीडिया की नकारात्मक सोच व्यापारिक आवश्कता है?

हमारा मीडिया, पिछले कुछ दिनों को छोड़कर, नकारात्मक भूमिका में ही दिखता रहा है. समाज में बहुत कुछ अच्छा भी हो रहा है पर उसके लिए पांच मिनट भी नहीं देते या पांच पंक्तियाँ भी नहीं लिखते ये लोग. वहीँ सनसनीखेज वारदातों के लिए बाकायदा प्रोग्राम दिखाते हैं. क्या यह इनकी व्यापारिक बाध्यता है? कामनवेल्थ की तैयारियों में इन्हें टूटी छत दिखी, गंदे बाथ रूम दिखे पर ये भव्यता नहीं दिखी जो चित्रों में दिख रही है.

Views: 1054

Reply to This

Replies to This Discussion

आदरणीय शेषधर तिवारी जी, सबसे पहले तो मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ जो यह मुद्दा ओपन बुक्स ऑनलाइन के ओपन मंच से आपने उठाया है,
कहा जाता है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है, पर यदि सत्य पूछा जाय तो राष्ट्र मंडल खेलो को लेकर मीडिया कि भूमिका बहुत ही नकरात्मक रही है, जिस तरह से तैयारी कि खामियों को लेकर हो हल्ला मीडिया वालों ने उठाया था, विदेशी मेहमानों का डर जाना स्वाभाविक था, कुछ दिनों पहले एक न्यूज़ चैनल पर स्टेडियम के बाहर फेका गया कूड़ा करकट और उसके पास घुमते कुत्ते को जिस अंदाज मे दिखाया जा रहा था जैसे बहुत ही सनसनी खेज कोई मुद्दा हो, जबकि निर्माण के बाद कूड़ा, साफ़ सफाई एक प्रक्रिया है जो अंत मे सम्पादित किया जाता है, आज खेल गाँव की तारीफ़ विदेशी मेहमान भी कर रहे है |
ऐसा नहीं है कि मीडिया की नकरात्मक सोच व्यावसायिक आवश्यकता है पर सबसे तेज कहलाने के चक्कर मे मीडिया वाले अपने कर्त्तव्य को भूलते जा रहे हैं |
राष्ट्र मंडल खेलों का रंग रंग और भव्य उदघाटन नकारात्मक सोच वालों के मुंह पर करारा तमाचा हैं |
तिवारी जी वाकई में यह नहीं होना चाहिए मीडिया में ,की हर चीजो को साफ़-साफ़ रखे.कहा जाता है की मीडिया देश की सबसे बड़ी सरकार है और स्वतंत्र भी ,लेकिन इस स्वतंत्रता का गलत फायदा नही उठाना चाहिए मीडिया को मैं यह भी मानता हु.लेकिन क्या आप मुझे यह बताएँगे की अगर मीडिया राष्ट्रमंडल khel की आँखों की किरकिरी नहीं बनी होती तो आजतक जितने भी घोटाले ,गड़बडिया,और सड़क धसने की जो घटनाये अब तक उजागर हुई है वो हमारे और आपके सामने आई होती .रही बात गंदे बाथरूम दिखाने की तो मेरे समझ से वो भी ठीक है ,क्योकि वो गन्दा बाथरूम अगर मीडिया के द्वारा नहीं दिखाया जाता तो सायद अबतक वो गन्दा ही रहता ,और यदि वो साफ़ हुआ तो हमें मीडिया को धन्यवाद् देना चाहिए ,क्योकि उसका सारा श्रेय उस टी.बी चैनल वालो को ही जाती है.आप और हम अपने देश के स्य्स्यतेम से भली भाती परिचित है .मान्यवर , जैसे जैसे रह्स्त्रमंडल खेल का तारीख नज़दीक आते गया वैसे वैसे एक से एक खामिया पैदा होती गयी.कभी इस इलाका का सड़क धस गया तो कभी उस इलाका का सड़क धस गया ,लेकिन इसके बावजूद भी हमारी केंद्र सरकार अनभिज्ञ रही और दिल्ली सरकार तो पहले से ही दूर रही है .जब बात भारत के प्रतिष्ठा को खरोच लगने तक पहुच गयी तब आनन् फानन में माननीय प्रधानमंत्री ने दिलचस्पी लिया ,तो क्या इसमें मीडिया की भूमिका अहम् और सराहनीय नहीं है ?ऐसी बात नहीं है की भारत सरकार को एक या २ महीने पहले इस बात का पता लगा हो की भारत में राष्ट्रमंडल खेल आयोजित होने वाला है जिसकी वजह से अभी तक तैयारिया पूरी नहीं हुई.
अगर इस पुरे मसले को देखा जाये तो परिणाम यही निकलता है की अगर मीडिया रस्ज्त्रमंडल खेल के आँखों की किरकिरी नहीं बनी होती तो सायद ही इतनी तैयारीया पूरी होई होती .हम सब जानते है की इस खेल में कितने घोटाले हुए है ,लेकिन इन सब के बावजूद .........मीडिया मनो जैसे डंडे लेकर घोटालेबाजों के पीछे कड़ी हो और कह रही है की "ये पूरा नहीं हुआ ,ये बाकि है पूरा करो" क्योकि मसला हमारे देश के छवि का है .



रत्नेश रमण पाठक

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service