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खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

ओपन बुक्स ऑनलाइन के सभी सदस्यों को प्रणाम, बहुत दिनों से मेरे मन मे एक विचार आ रहा था कि एक ऐसा फोरम भी होना चाहिये जिसमे हम लोग अपने सदस्यों की ख़ुशी और गम को नजदीक से महसूस कर सके, इसी बात को ध्यान मे रखकर यह फोरम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमे सदस्य गण एक दूसरे के सुख और दुःख की बातो को यहाँ लिख सकते है और एक दूसरे के सुख दुःख मे शामिल हो सकते है |

धन्यवाद सहित
आप सब का अपना
ADMIN
OBO

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आदरणीय सत्यनारायणभाईजी, आपकी आत्मीयता हमारे प्रयासों का संबल है. आपका औदार्य बना रहे.

आदरणीय सौरभ  जी  के जन्म दिवस पर सादर

सौरभ से मह्का कभी        था घर का उद्यान

लेते परिमल वास सब            बड़े-बड़े विद्वान्

 

सौरभ का है जन्म दिन          फूलो का शृंगार

शरद प्रफुल्लित  हो उठा  बही अमिय की धार

 

खंजन मधु-माता उड़ा         घर की चढ़ा मुडेर

पंख फुला करता सतत          है सौरभ की टेर  

 

वदन कुमिदिनी हास है      सिर पर फूले कास

जलज-ह्रदय वातावरण        में सौरभ का वास

 

सौरभ सुरभित है स्वयं       ऋतुओ का है अंत

पवन  यान पर उड़ रहा     सौरभ अमर अनंत

गद-गद मन संसार है, शुभ सुनकर गोपाल
बनी रहे हर कामना, रखे सतत खुशहाल..

आदरणीय गोपाल नारायनजी, आपकी गीति-कामनाओं ने सुख से आप्लावित कर दिया है.
सादर आभार..

आदरनीय सौरभ भाई आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनायें । माता सरस्वती की कृपा सदा आप पर बरसती रहे , आप खूब लिखें, हम खूब पढें ।

शुभकामनाओं के लिए हृदय से आभारी हूँ आदरणीय गिरिराजभाईजी..

आदरणीय सौरभ जी, आपको जन्म दिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।"परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है की वो आपकी हर मुराद पूरी करे। 

आदरणीय सुशील सरनाजी, यह आपकी सदाशयता है. आपकी शुभकामनाओं से मन मुग्ध है.
सादर धन्यवाद

आदरणीय श्री सौरभ पाण्डेय जी के जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं ...वैसे बागी जी की गुड़ही जिलेबी देखकर कब से जीभ से लार टपक रही है...वे कह रहे हैं एक ही मिलेगी ...एक ही सही ...लेकिन पहले सौरभ सर शुरुआत तो करें!

भाई जवाहर लालजी, आपकी शुभाकामनाओं के लिए हृदय से धन्यवाद.
मैं आज ही बलिया और उस क्षेत्र से लौटा हूँ, सो ’जबेली’ जीम के आ रहा हूँ. भाई गणेशजी द्वारा पुनः खिलाया जाना रसमय कर गया.
:-))

खूब ढेर सारी मंगल कामनाओं के साथ जन्मदिन की हार्दिक बधाई , आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी।

आदरणीय विजय शंकरजी, आपकी शुभकामनाओं के लिए हृदय से धन्यवाद.
सादर


आदरणीय सौरभ जी, आप जलेबी और रसगुल्ला के रस से सराबोर हैं मैं लखनऊ की सूखी रेवड़ी ही खिला दूँ. 3 दिसम्बर 1963 मैं सातवीं कक्षा की दहलीज पार करने की तैयारी कर रहा था; 3 दिसम्बर 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध छिड़ा था; 3 दिसम्बर 1974 मैं नौकरी जीवन शुरू करने हेतु पहली बार घर से दूर अहमदाबाद पहुँचा था; 3 दिसम्बर 1979 मैं अपनी पी.एच.डी. थीसिस जमा कर रहा था; 3 दिसम्बर 1985 मैंने जहाज़ से पहली बार मॉरीशस की झलक देखी थी; 3 दिसम्बर 1989 मैं दूसरी बार अंटार्कटिका की यात्रा में निकल पड़ा था; 3 दिसम्बर 2009 मैं चौथी बार अंटार्कटिका को लक्ष्य कर दुबई से साओ पॉलो की यात्रा कर रहा था; 3 दिसम्बर 2011 मेरे सेवानिवृत्त होने के उपरांत अंतिम विदाई समारोह हुआ था.........वह सब इतिहास है. चिरंतन सत्य है कि आज भी 3 दिसम्बर है और आपका जन्मदिन है......आपको मेरी और कुंती की ओर से शुभकामनाएँ भेजते हुए मुझे अपार हर्ष हो रहा है. आप अपने रचनाकर्म से हमें और आपके अगणित पाठकों को अनंत काल तक मोहित करते रहें यही प्रार्थना है. सादर.

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