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साहित्य (63)

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हिंदी की 50 सर्वश्रेष्ठ कह-मुकरियाँ

हिंदी की 50 सर्वश्रेष्ठ कह-मुकरियाँ  "कह-मुकरी" एक बहुत ही पुरातन और लुप्तप्राय: काव्य विधा है! हज़रत अमीर खुसरो द्वारा विकसित इस विधा पर भ…

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दिल्ली के गुलाबी मौसम में सम्मिलन सह काव्य-गोष्ठी

ओपेन बुक्स ऑनलाइन (ओबीओ) के प्रबन्धन द्वारा इसके प्रादुर्भाव काल से ही इसके उद्येश्यों के मुख्य विन्दुओं को सदा से मुखर रखा गया है. साहित्य…

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प्रयाग-क्षेत्र में ओबीओ के तत्त्वावधान में काव्य-गोष्ठी का आयोजन

आज की तारीख में नेट पर समाज के हर क्षेत्र में ऐसा बहुत कुछ सकारात्मक हो रहा है जो अधिक नहीं मात्र दसेक वर्ष पूर्व इस तरह की गतिविधियों के ब…

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पं० चंद्रशेखर पाण्डेय ’चंद्रमणि’ जी की नाट्यधर्मिता :: एक तात्विक विवेचन                  डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

   भारत में नाटक की परंपरा अत्यधिक प्राचीन है I यद्यपि वर्तमान में उपलब्ध भरत मुनि का नाटयशास्त्र ही सबसे पुराना है जो पाश्चात्य विद्वानों…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

0 Apr 18, 2019

मध्यकालीन हिदी साहित्य में होली का कोलाज - डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

हिन्दी साहित्य में काल विभाजन के अनुसार आदिकाल और आधुनिक काल के बीच का समय मध्ययुग (1318ई०-1843ई०) कहलाता है I इस प्रकार भक्ति एवं रीतिकाल…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

0 Mar 21, 2019

लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 भारतीय संस्कृति में विनम्रता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है I अपनी  तारीफ सुनकर आज भी विनम्र लोग शील सँकोच से सिकुड़ जाते हैं I  पर पाश्चात्य स…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

6 Feb 9, 2019
Reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

बदलते रहे है हिंदी कविता में संयोग शृंगार के प्रतिमान  ///    डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव

काव्य-शास्त्र के अनुसार वियोग शृंगार के चार प्रकार हैं –पूर्वराग, मान, प्रवास और करुण I इसकी दस दशायें होती हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह ह…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

0 Feb 6, 2019

मुल्ला दाउद  के ‘चंदायन’ से मुतासिर रहे है जायसी -डॉ, गोपाल नारायन श्रीवास्तव

‘पद्मावत’ मूवी के आने पर आज का आत्ममुग्ध भारतीय यह जान सका कि मलिक मुहम्मद ‘जायसी’ नाम का भी कोई कवि भी था, जिसने अवधी लोक-भाषा में ‘पद्माव…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

4 Jan 8, 2019
Reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

सीता-चरित्र के नए प्रतिमान गढ़ता हुआ उपन्यास ‘सीता सोंचती थीं’-   डॉ० गोपाल नारायण श्रीवास्तव

       राम भगवान थे या सामान्य मानव, अवतार थे या इतिहासपुरुष, काल्पनिक चरित्र थे या सचमुच कोई विश्रुत लोकनायक. इन सब बातों पर मतभेद हो सकता…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

0 Feb 19, 2018

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कविता की विकास यात्रा : नयी कविता, गीत और नवगीत (भाग -१) // --सौरभ

मानवीय विकासगाथा में काव्य का प्रादुर्भाव मानव के लगातार सांस्कारिक होते जाने और संप्रेषणीयता के क्रम में गहन से गहनतर तथा लगातार सुगठित हो…

Started by Saurabh Pandey

8 Sep 26, 2016
Reply by Kalipad Prasad Mandal

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दिल्ली के गुलाबी मौसम में सम्मिलन सह काव्य-गोष्ठी

ओपेन बुक्स ऑनलाइन (ओबीओ) के प्रबन्धन द्वारा इसके प्रादुर्भाव काल से ही इसके उद्येश्यों के मुख्य विन्दुओं को सदा से मुखर रखा गया है. साहित्य…

Started by Saurabh Pandey

27 Sep 26, 2016
Reply by योगराज प्रभाकर

प्रधान संपादक

जनाब दीपक "जैतोई" साहिब की पंजाबी ग़ज़ल का हिंदी अनुवाद

सुनके  मज़ा न आए, उसको ग़ज़ल न बोलें !  दिल में उतर न जाए, उसको ग़ज़ल न बोलें !   खूबी ग़ज़ल की है ये, दिल को चढ़ाये मस्ती, और जो दिमाग खाए, उ…

Started by योगराज प्रभाकर

29 Sep 22, 2016
Reply by Samar kabeer

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कविता की विकास यात्रा : नयी कविता, गीत और नवगीत (भाग -२) // --सौरभ

भाग - २ ===== ’दूसरा सप्तक’ की भूमिका लिखते समय अज्ञेय ने कहा है, कि, ’प्रयोग का कोई वाद नहीं है । हम वादी नहीं रहे, न ही हैं, न प्रयोग अपन…

Started by Saurabh Pandey

7 Sep 6, 2016
Reply by Saurabh Pandey

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" //मत ले मैं आपने मंजर और खंजर इस्तेमाल कर लिया है इसलिए यह ग़ज़ल जर अंत वाले काफिये की कैद…"
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Samar kabeer commented on विवेक ठाकुर "मन"'s blog post एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ
"जनाब विवेक ठाकुर 'मन' जी आदाब,पहली बार ओबीओ पर आपकी रचना पढ़ रहा हूँ,आपका स्वागत है । ग़ज़ल…"
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Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post एक अभागिन किन्नर
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,किन्नर पर रचना का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । शीर्षक में…"
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Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,लगता है ये ग़ज़ल आपने जल्द बाज़ी में कही है । 'मेरे कमरे में रात गए…"
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Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
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Manoj kumar Ahsaas commented on विवेक ठाकुर "मन"'s blog post एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ
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Manoj kumar Ahsaas commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जिसके पुरखे भटकाने की - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"अच्छी गजल हुई आदरणीय मित्र हार्दिक बधाई सतत प्रयत्नशील रहें सादर"
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Manoj kumar Ahsaas commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (चाहा था हमने जिसको हमें वो मिला नहीं)
"प्रिय मित्र आपने इस ग़ज़ल पर इसके अरकान नहीं लिखे हैं कृपया ग्रुप में जो भी गजल डालें उस पर उस के…"
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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post ग्राहक फ्रेंडली(लघुकथा)
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