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Harjeet Singh Khalsa's Discussions (198)

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प्रधान संपादक

"आदरणीय सदस्यों समय की कमी के कारण आप सब लोगो की रचनाओ की प्रशंसा न कर सका तो उसके लि…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 11, 2010 to "OBO महा इवेंट" अंक-२ (रपट)

15 Dec 12, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

"वह भाई, अरुण जी बहुत ही कमाल लिखा है, सत्य को कहने का आपका तरीका प्रशंसनीय है.... नय…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 2, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

"जानती हो तुम ?? कि प्रेम कविता कैसे जन्म लेती है..... जब याद तुम्हरी थका दे धड़कनो…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 2, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

"क्या बात है योगराज जी और नवीन जी. आपके लिखने का या किसी बात को कहने का अंदाज दिल को…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 2, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

सदस्य टीम प्रबंधन

"धन्यवाद बागी जी, हाँ वहाँ पीर होना चाहिए था... पहली कोशिश है इसीलिए ग़लती हो गई..."

Harjeet Singh Khalsa replied Nov 23, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

"धन्यवाद योगराज जी, आप ही से सीख रहा हूँ जी..."

Harjeet Singh Khalsa replied Nov 23, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

"हवा करती है सरगोशी बदन ये कांप जाता है, ह्रदय में उठती पीर को मौसम ये भांप जाता है..…"

Harjeet Singh Khalsa replied Nov 23, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

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समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
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आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
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सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

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