आदरणीय साथिओ,
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रचना के मर्म तक पहुंचें हेतु हार्दिक आभार भाई उस्मानी जीI
हार्दिक बधाई आदरणीय योगराज भाई जी। बेहतरीन प्रस्तुति।पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरियों को दर्शाती शानदार लघुकथा।
बहुत बहुत शुक्रिया आ० तेजवीर सिंह जीI
मोहतरम जनाब योगराज साहिब , प्रदत्त विषय पर अलग अंदाज़ में अच्छी लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
दिल से शुक्रिया आ० तसदीक़ अहमद खान साहिबI
लघुकथा पसंद करने हेतु हार्दिक आभार भाई महेंद्र कुमार जीI
रचना के मर्म तक पहुँचने और उसकी मुक्तकंठ प्रशंसा हेतु तह-ए-दिल से आपका शुक्रिया मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब.
आदरणीय योगराज जी सादर,
बेमिसाल, अतिउत्कृष्ट लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई , निम्न अंतिम पञ्च लाइन लाजबाब
"वो देखो! हमारे भगवान और अल्लाह हमें छोड़ कर जा रहे हैंI"
सादर बधाई स्वीकार करें
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