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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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उछहल मन

गोरी तोहरे संगे हम तर जइबेंतूँ जो नाही मिलबू त मर जइबें तोहरे ही याद में अब जिनगी बिताइलेरोज के सपनवा में तोहरा के पाइलेटूटी जो सपना त बिख…

Started by Pawan Kumar

0 Aug 12, 2015

बात बा(भोजपुरी गजल,मनन कु.सिंह)

बात अब चुनाव के बरिआत के बा, सब त लूटेवाला,देखीं लुटात के बा? बात अब रह गइल बस जात के बा, देखीं ना अब उहाँ गभुआत के बा? का होइ,ना होइ,गइल ग…

Started by Manan Kumar singh

0 Jun 1, 2015

रूप धूप में सुखाई मत(गजल,मनन कु.सिंह)

रूप अपन धूप में सुखाईं मत एने-ओने नजर भटकाईं मत। उछहल हियरा उछलबे करी बेशी ओकरा अब दबाईं मत। कबसे चकोर बा आँख गड़वले चंदनिया अबहुँ चोराईं मत…

Started by Manan Kumar singh

0 May 29, 2015

सदस्य टीम प्रबंधन

भोजपुरी ग़ज़ल // -सौरभ

२१२२ १२१२ २२ साफ़ बोले में बा हिनाई का ? काहें बूझीं पहाड़-राई का ? चाँद-सूरज में दोस्ती कइसे ? धंधा-पानी में ’भाई-भाई’ का ? सब इहाँ जी र…

Started by Saurabh Pandey

2 May 26, 2015
Reply by Saurabh Pandey

गजल

भोजपुरी गजल(07/05/2015) रूप अपन धूप में सुखाईं मत एने-ओने नजर भटकाईं मत। उछहल हियरा उछलबे करी बेशी ओकरा अब दबाईं मत। कबसे चकोर बा आँख गड़वले…

Started by Manan Kumar singh

0 May 7, 2015

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी लघुकथा : माई किरिया (गणेश जी बागी)

           लफुअन के संगत में पड़ कमे उमिर में गुड्डूआ के जुआ क लत लाग गईल. एक महीना बाद संघतिहन के निहोरा प उ डेरात-डेरात फेनु जुआ खेले बईठ…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

2 May 1, 2015
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी लघुकथा : असर (गणेश जी बागी)

                         पचीस बरिस पहिले राजेश्वर सिंह गाँव छोड़ बम्बई के एगो उद्योगपति के दमाद बनि ओहिजे बस गइले. हाइ-फाइ माहौल में जनमल आ…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

8 May 1, 2015
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

गजल(मनब कि ना मनब)

गजल मनब कि ना मनब, बेशी अगरइब तू? आइल बुढ़ापा,अब आउर पछतइब तू। खोज तार फूल अब कहाँ लेकेे जइब? नजर धुंधला गइल,सुँघब कि सटइब तू? बेरी-बेरी ह…

Started by Manan Kumar singh

1 May 1, 2015
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी लघुकथा : कुक्कुरजात (गणेश जी बागी)

"मुखियाजी, ई स्साला रॉकिया ’कुक्कुरजात’ के इज्जत खराब करे प तुलल बा." "अरे का भइल रे शेरुआ..... तनिका सोझ-सोझ बताउ.." "मुखियाजी, ई ससुरा का…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

7 Mar 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

एह साल गढ़ईबो गोरी तोहके झूलनिया |

मुँहवा फूलवले बाड़ू काहें मोर धनिया |   एह साल गढ़ईबो गोरी तोहके झूलनिया | देख गोरी खेतवा में रहर फूलायल ,मुँगवा के डलिया में मस्ती आयल | तिल…

Started by Shyam Narain Verma

2 Jan 30, 2015
Reply by Hari Prakash Dubey

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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
10 hours ago

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"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
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"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
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दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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