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प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'
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प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s Page

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Tasdiq Ahmed Khan commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"जनाब प्रदीप साहिब ,ग़ज़ल की अच्छी कोशिश की है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । मुहतरम समर साहिब की बातों पर गौर करें"
23 hours ago
Mohammed Arif commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"ज़माना फिर न जाने क्यों ख़फ़ा होने लगा है। मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है।। वाह! वाह!! बहुत माक़ूल बात कही आपने । ज़माना तो सदियों से प्यार का शत्रु रहा है । बहुत ही उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप कुमार पाण्डे जी ।"
23 hours ago
Samar kabeer commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"जनाब प्रदीप कुमार पाण्डेय'दीप'जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा, 'वहाँ पर हाल कैसा है,वही बस जान पाया यहाँ पर ज़ख़्म ज़ख़्मों की दवा होने लगा है' इस शैर के दोनों मिसरों में…"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"आद0 प्रदीप पांडेय जी बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। बधाई आपको।"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"वाहहहह आ0 प्रदीप जी इस खूबसूरत ग़ज़ल पर शेर दर शेर दाद हाजिर है। हृदय से बधाई।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"बहुत बढ़िया। हार्दिक बधाई आपको आदरणीय प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' जी।"
Saturday
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' posted a blog post

मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है

*1222 1222 1222 122* ज़माना फिर न जाने क्यों ख़फ़ा होने लगा है।मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है।। कभी वादे किये जिसने कसम खाकर ख़ुदा की,वही फिर अब न जाने क्यों ज़ुदा होने लगा है।। वहाँ पर हाल कैसा है, वही बस जान पाया,यहाँ पर ज़ख़्म, ज़ख़्मों की दवा होने लगा है।। समझ बैठा था' तुमको मैं, मुहब्बत का समंदर,गुमाँ मेरा यहाँ आकर, रफ़ा होने लगा है।। मुहब्बत का हमेशा ही यही अंज़ाम होता,शमा से मिल के' परवाना फ़ना होने लगा है।। नज़र से पीने' का पहले, मज़ा दिलकश लगा था,मगर अब ज़ाम पीने का, जिया होने…See More
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय प्रदीप जी.."
Friday
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"शुक्रिया ज़नाब अफ़रोज़ साहिब!"
Friday
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"ज़नाब समर कबीर साहिब! शुक्रिया! बिल्कुल सही फ़रमाया।"
Friday
Samar kabeer commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"मक़्ते के सानी मिसरे में 'क़ाबिल'शब्द मुनासिब नहीं लगता,मेरे ख़याल से मक़्ता यूँ होना चाहिए :- 'फ़र्ज़ बाक़ी रहे जब तलक एक भी 'दीप'मत सोचना,ख़ुदकुशी के लिए'"
Friday
Afroz 'sahr' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"जनाब प्रदीप पाण्डेय जी अब मक्ता ठीक है,,सादर"
Friday
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' joined Admin's group
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चित्र से काव्य तक

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोंत्सव" में भाग लेने हेतु सदस्य इस समूह को ज्वाइन कर ले |See More
Friday
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"ज़नाब अफ़रोज़ साहिब! ग़ज़ल में आपकी शिरकत के लिए शुक्रिया। अगर मक़्ते को कुछ यूँ कहें तो...... फ़र्ज़ बाकी रहे, जब तलक एक भी, 'दीप' काबिल नहीं, ख़ुदकुशी के लिए।।"
Friday
Afroz 'sahr' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"आदरणीय प्रदीप कुमार जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको। मक्ते में रब्त नहीं दिख रहा ,,,सादर"
Friday
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"आद० बासुदेव अग्रवाल 'नमन' दादा जी! सादर वंदन! आपकी कृपादृष्टि जिस किसी पर भी रहेगी, वह जहाँ भी रहेगा, सक्रिय रहेगा। बहुत बहुत धन्यवाद आपका। कृपादृष्टि बनाए रखिए।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
भुज, गुजरात
Native Place
सिमरिया,

प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s Blog

मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है

*1222 1222 1222 122*



ज़माना फिर न जाने क्यों ख़फ़ा होने लगा है।

मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है।।



कभी वादे किये जिसने कसम खाकर ख़ुदा की,

वही फिर अब न जाने क्यों ज़ुदा होने लगा है।।



वहाँ पर हाल कैसा है, वही बस जान पाया,

यहाँ पर ज़ख़्म, ज़ख़्मों की दवा होने लगा है।।



समझ बैठा था' तुमको मैं, मुहब्बत का समंदर,

गुमाँ मेरा यहाँ आकर, रफ़ा होने लगा है।।



मुहब्बत का हमेशा ही यही अंज़ाम होता,

शमा से…

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Posted on November 17, 2017 at 5:30pm — 6 Comments

दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए

*212 212 212 212*



हो गया ख़ास वह, ज़िंदगी के लिए।

दिल धड़कता था' जिस, अज़नबी के लिए।।



दूर तुम से रहा, आज तक मैं सनम,

हूँ ख़तावार उस, बेबसी के लिए।।



जान देकर तुझे, जान जाता अगर,

जान जीता नहीं, मयकशी के लिए।।



देख चहरा तिरा, चाँद शरमा गया,

बन गई शम'अ तू, तीरगी के लिए।।



मुझको' रब की कई, नेमतें मिल गईं,

सर झुकाया सदा, बंदगी के लिए।।



बिन तिरे एक पल, मुझको' जीना नहीं,

दिलनशीं चाहिए, दिल्लगी के… Continue

Posted on November 15, 2017 at 3:34pm — 17 Comments

न बदले गर ये हालात

*1222 1221



न बदले गर ये' हालात।

फिर आ जायेगी बरसात।।



भले ही कुछ दिनों बाद

मगर होगी करामात।।



तुम आशिक हो ही' बदनाम

दिखा दी अपनी' औकात।।



मुझे कोई न इतराज़

कभी कर लो मुलाकात।।



करूँ कैसे अब इतिबार,

तुम आये हो अकस्मात।।



किसी से कुछ न अब उम्मीद,

सुनो मेरे खयालात​।।



फ़ना तुझपे दिलो जान

करूँ तो फिर बने बात।।



ज़वानी जोश में आज

न कर बैठे कुछ उत्पात।।



नहीं है 'दीप'… Continue

Posted on November 11, 2017 at 10:50pm — 4 Comments

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