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Ashish Kumar
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Ashish Kumar commented on Ashish Kumar's blog post दिले बेक़रार को थोड़ा करार मिल जाए
"आदरणीय समर कबीर जी नमस्कारसराहना और उत्साहवर्धन के लिए आपका आभार ये ग़ज़ल बहर पर नहीं लिखी है . बेबह्र ग़ज़ल का प्रयास किया है."
Dec 24, 2018
Samar kabeer commented on Ashish Kumar's blog post दिले बेक़रार को थोड़ा करार मिल जाए
"जनाब आशीष जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । इस ग़ज़ल के अरकान लिख दें तो कुछ कहना हो ।"
Dec 22, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ashish Kumar's blog post दिले बेक़रार को थोड़ा करार मिल जाए
"वाह बढ़िया आदरणीय..बहुतखूब...शब्दों के मायने लिख के आपने बहुत अच्छा किया..मापनी और लिख देते तो हम जैसो को और आसानी हो जाये..बधाई"
Dec 22, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - ०२
"वाह जी खूब ग़ज़ल कही है..बधाई"
Dec 22, 2018
राज़ नवादवी commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - ०२
"आदरणीय आशीष कुमार जी, आदाब. ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, दाद के साथ बधाई स्वीकार करें. सादर "
Dec 21, 2018
Ashish Kumar posted a blog post

दिले बेक़रार को थोड़ा करार मिल जाए

दिले बेक़रार को थोड़ा करार मिल जाए,गुलशने वीरां को राहे बहार मिल जाए।हट जाए ये फ़सुर्दगी मेरे दीदा-ए-मजहूर से,मेरी माहपारा जो तेरा दीदार मिल जाए।रख्शे-बेईना सा मन दौड़ता है इधर उधर,है आरजू कि तुझ सा सवार मिल जाए।खुश्क आँखों को तलाश अब नमी की है,तेरे दीदा-ए-तर से अश्क उधार मिल जाए।मुझे मिल जाए तुझ सी पैकरे-रअनाई ,तुझे 'चंदन' सा कोई परस्तार मिल जाए।*******************************************फ़सुर्दगी - उदासी, दीदा ए मजहूर- वियोग से दुखी नेत्रमाहपारा - चाँद का टुकड़ा, रख्शे बेईना - बेलगाम घोड़ादीदा ए तर…See More
Dec 20, 2018
Ashish Kumar commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - ०२
"आदरणीय समर कबीर जी बहुत बहुत आभार ।"
Dec 20, 2018
Samar kabeer commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - ०२
"जनाब आशीष कुमार "चन्दन" जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 20, 2018
Ashish Kumar posted a blog post

ग़ज़ल - ०२

२१२  २१२  २१२  २१२क्या पता चाँद रोशन रहे ना रहेकल ये’ चूड़ी ये’ कंगन रहे ना रहे। भीग जा मेरे’ नैनों की’ बरसात मेंक्या पता कल ये’ सावन रहे ना रहे। छू के’ देखूँ जरा अनछुए फूल कोक्या पता कल ये’ मधुबन रहे ना रहे। आ मिला लें’ अधर से अधर आज हमक्या पता कल ये’ यौवन रहे ना रहे। तेरी’ साँसों में’ घुल के महक जाऊँ’ मैंक्या पता कल ये’ चन्दन रहे ना रहे।***********************************स्वरचित एवं मौलिक आशीष कुमार "चन्दन"See More
Dec 19, 2018
Samar kabeer commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - 01
"' जिंदगी में छा गया है अब अमावस सा अँधेरा' ऐब-ए-तनाफ़ुर,कहते हैं,एक शब्द के अंतिम अक्षर और उसके बाद आने वाले शब्द का पहला अक्षर समान होना,जैसे आपके मिसरे में 'अमावस सा'यानी अमावस शब्द…"
Dec 18, 2018
Ashish Kumar commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - 01
"आदरणीय समर कबीर जी नमस्कार,आपका बहुत बहुत आभार कि आपने गजल की समीक्षा की और त्रुटियाँ बताई।मैंने अभी शुरुआत की है और गजल के नियमों से भलीभांति परिचित नहीं हूँ। हालात और जज्बात बहुवचन हैं इनके साथ "हो" के स्थान पर "हों" आना चाहिए…"
Dec 18, 2018
राज़ नवादवी commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - 01
"आदरणीय आशीष जी, गजल का अच्छा प्रयास है, बधाई. बाक़ी मंच के आदरणीय उस्ताज़ समर कबीर साहब ने जो अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रया दी है, उससे ग़ज़ल को संवारने का प्रयास करें. सादर. "
Dec 8, 2018
राज़ नवादवी commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - 01
"आदरणीय आशीष जी, गजल का अच्छा प्रयास है, बधाई. बाक़ी मंच के आदरणीय उस्ताज़ समर कबीर साहब ने जो अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रया दी है, उससे ग़ज़ल को संवारने का प्रयास करें. सादर. "
Dec 8, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - 01
"आ. आशीष जी, गजल का अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई । आ. भाई समर जी की बात का संज्ञान लें ।"
Dec 6, 2018
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - 01
"आदरणीय आशीष जी अच्छी गजल कही आपने कामयाब कोशिश के लिए बहुत बहुत बधाई"
Dec 6, 2018
Samar kabeer commented on Ashish Kumar's blog post ग़ज़ल - 01
"जनाब आशीष कुमार 'चंदन' जी आदाब,पहली बार आपकी ग़ज़ल से रूबरू हो रहा हूँ । बह्र के हिसाब से आपकी ग़ज़ल ठीक है,लेकिन क़वाफ़ी के हिसाब से अभी आपको ग़ज़ल पर और समय देना होगा…"
Dec 5, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Moradabad
Native Place
Moradabad
Profession
Job

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दिले बेक़रार को थोड़ा करार मिल जाए

दिले बेक़रार को थोड़ा करार मिल जाए,

गुलशने वीरां को राहे बहार मिल जाए।

हट जाए ये फ़सुर्दगी मेरे दीदा-ए-मजहूर से,…

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Posted on December 20, 2018 at 5:14pm — 3 Comments

ग़ज़ल - ०२

२१२  २१२  २१२  २१२

क्या पता चाँद रोशन रहे ना रहे

कल ये’ चूड़ी ये’ कंगन रहे ना रहे।

 …

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Posted on December 18, 2018 at 5:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल - 01

२१२२ २१२२ २१२२ २१२२

दुश्मनी को भूल जाऊँ दोस्ती की बात तो हो

नफरतों को छोड़ भी दूँ इश्क़ के हालात तो हो।…

Continue

Posted on December 4, 2018 at 1:30pm — 7 Comments

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