For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

२१२२ २१२२ २१२२ २१२२

दुश्मनी को भूल जाऊँ दोस्ती की बात तो हो

नफरतों को छोड़ भी दूँ इश्क़ के हालात तो हो।

मर चुके अहसास मेरे मान लेता हूँ चलो मैं

पर उधर भी तो पिघलता एक भी जज्बात तो हो।

जिंदगी में छा गया है अब अमावस सा अँधेरा

नूर सी चमके यहाँ भी चाँदनी इक रात तो हो।

हर कदम पर ठोकरें थकने लगा हूँ जूझ कर अब

जीतना मुमकिन नहीं है फिर चलो अब मात तो हो।

लो खड़ा है बिकने ‘चंदन’ इश्क़ के बाजार में अब

वो खरीदेगा मुझे क्या उसकी यह औकात तो हो 

मौलिक/अप्रकाशित

आशीष कुमार "चंदन"

Views: 648

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on December 18, 2018 at 7:03pm

' जिंदगी में छा गया है अब अमावस सा अँधेरा'

ऐब-ए-तनाफ़ुर,कहते हैं,एक शब्द के अंतिम अक्षर और उसके बाद आने वाले शब्द का पहला अक्षर समान होना,जैसे आपके मिसरे में 'अमावस सा'यानी अमावस शब्द का अतिंम अक्षर 'स' और उसके बाद 'सा' शब्द का पहला अक्षर 'स' समान हैं,उम्मीद है आप समझ गए होंगे ।

ग़ज़ल सीखने के लिए आप ओबीओ पर 'ग़ज़ल की कक्षा' और "ग़ज़ल की बातें" समूह का लाभ ले सकते हैं ।

Comment by Ashish Kumar on December 18, 2018 at 5:43pm

आदरणीय समर कबीर जी नमस्कार,
आपका बहुत बहुत आभार कि आपने गजल की समीक्षा की और त्रुटियाँ बताई।
मैंने अभी शुरुआत की है और गजल के नियमों से भलीभांति परिचित नहीं हूँ।
हालात और जज्बात बहुवचन हैं इनके साथ "हो" के स्थान पर "हों" आना चाहिए ये तो मैं समझ गया हूँ किन्तु "ऐब-ए-तनाफ़ुर" क्या होता है इससे मैं परिचित नहीं हूँ।
यदि इस पर कुछ सहायता मिल जाये तो बड़ा आभार होगा।

पुनः आपका और सभी गुणीजनों का प्रतिक्रिया के लिए आभार।

Comment by राज़ नवादवी on December 8, 2018 at 10:33pm

आदरणीय आशीष जी, गजल का अच्छा प्रयास है, बधाई. बाक़ी मंच के आदरणीय उस्ताज़ समर कबीर साहब ने जो अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रया दी है, उससे ग़ज़ल को संवारने का प्रयास करें. सादर. 

Comment by राज़ नवादवी on December 8, 2018 at 10:12pm

आदरणीय आशीष जी, गजल का अच्छा प्रयास है, बधाई. बाक़ी मंच के आदरणीय उस्ताज़ समर कबीर साहब ने जो अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रया दी है, उससे ग़ज़ल को संवारने का प्रयास करें. सादर. 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 6, 2018 at 6:59pm

आ. आशीष जी, गजल का अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई । आ. भाई समर जी की बात का संज्ञान लें ।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on December 6, 2018 at 4:16pm

आदरणीय आशीष जी अच्छी गजल कही आपने कामयाब कोशिश के लिए बहुत बहुत बधाई

Comment by Samar kabeer on December 5, 2018 at 2:27pm

जनाब आशीष कुमार 'चंदन' जी आदाब,पहली बार आपकी ग़ज़ल से रूबरू हो रहा हूँ ।

बह्र के हिसाब से आपकी ग़ज़ल ठीक है,लेकिन क़वाफ़ी के हिसाब से अभी आपको ग़ज़ल पर और समय देना होगा ।

'  

दुश्मनी को भूल जाऊँ दोस्ती की बात तो हो

नफरतों को छोड़ भी दूँ इश्क़ के हालात तो हो'

मतले के सानी मिसरे में 'हालात' शब्द बहुवचन है इस कारण से रदीफ़ 'हो' कि बजाय "हों" हो रही है ।

'  पर उधर भी तो पिघलता एक भी जज्बात तो हो'

इस मिसरे में भी 'जज़्बात' शब्द बहुवचन है,तो इस कारण से रदीफ़ 'हो' की जगह "हों" हो रही है ।

जिंदगी में छा गया है अब अमावस सा अँधेरा'

इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है "अमावस सा" 

जीतना मुमकिन नहीं है फिर चलो अब मात तो हो'

इस मिसरे में भी ऐब-ए-तनाफ़ुर है,"मुमकिन नहीं"

बाक़ी इस प्रयास पर बधाई स्वीकार करें ।

'  

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
22 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service