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MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI
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Samar kabeer commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post तसल्ली  (लघुकथा)
"जनाब मुज़फ़्फ़र इक़बाल साहिब आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
19 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post तसल्ली  (लघुकथा)
"हमारे समाज के बुज़ुर्ग मां-बाप के एक अहम मसले और आभासी तसल्ली को उभारती विचारोत्तेजक व सामाजिक सरोकार की बहुत बढ़िया रचना के लिए बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मुज़फ़्फ़र इक़बाल सिद्दीक़ी साहिब। शुरू के भाग मेंं कुुुछ शब्द कम किये जाने की गुंजााइश लगती…"
22 hours ago
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post तसल्ली  (लघुकथा)
"बहुत बहुत आभार ,आदरणीय "
Saturday
Shyam Narain Verma commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post तसल्ली  (लघुकथा)
"सुन्दर सार्थक रचना  ने लिये आपको बधाई …."
Friday
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI posted a blog post

तसल्ली  (लघुकथा)

 "अरे  ...  ये तुम्हारा नेटवर्क कभी भी आता - जाता रहता है। मैं तो परेशान हो गया। पुराना बदल कर, ये तुम्हारी कम्पनी का नया वाला ब्रॉडबेंड लिया। उसका भी यही हाल है।  तुम ही बोल रहे थे न , ...  कि इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी।  सर्विसिंग भी अच्छी है। अब तुम्हारे साथ भी वही रोना है।" शर्मा जी  ने गुस्से से कहा।नहीं सर, आपको कोई दिक्कत नहीं होगी। "ये लीजिये कनेक्टिविटी आ गई।",  उसने मॉडेम सेट करते हुए बोला । सर, "मेरा नाम चंद्रशेखर है। आपके एरिये का सर्विस इंजीनियर हूँ। ये मेरा कार्ड रख लीजिये।" …See More
Friday
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
"आप सब के इतने खूबसूरत कमैंट्स पढ़ कर दिल खुश हो गया। मैं वक़्त रहते देख नहीं पाया, इसका अफ़सोस है ।  आदरणीय   Mohammed Arif , Neelam Upadhyaya   babitagupta  Samar…"
Wednesday
vijay nikore commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
"लघु कथा अच्छी लगी... हार्दिक बधाई"
Jul 12
Mohammed Arif commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
"आदरणीय मुज़फ़्फ़र साहब आदाब,                              घर से ऑफिस और फिर पत्नी जी हिदायत और केयरिंग के बीच बारिश । बहुत ही बेहतरीन कथानक । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । नोट:-…"
Jul 9
Neelam Upadhyaya commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
"आदरणीय  मुज़फ्फर इक़बाल साहब, नमस्कार ।  काश हम भी ऐसी बारिश का मुकाबला करते और दफ्तर से घर के लिए भीगते हुए मेट्रो तक पहुँचते।  पर  मॉनसून का आना मात्र एक रस्म निभायगी  बन  कर रह गयी । बहुत बढ़िया प्रस्तुति के लिए हार्दिक…"
Jul 9
babitagupta commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
" बारिश पर  कघुकथा पढ़कर शुष्क वर्षा ऋतू में बारिश  का अनुभव करवा दिया.हार्दिक   बधाई स्वीकार  कीजियेगा आदरणीय सरजी "
Jul 8
Samar kabeer commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
"जनाब मुज़फ़्फ़र इक़बाल साहिब आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
"आद0 मुज़फ्फर इकबाल जी सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा कही आपने। वैसे अभी तक हमारे यहाँ कोई खास बारिश हुई नही है,, अतएव आपकी लघुकथा के माध्यम से ही बारिश का आनन्द ले रहा हूँ। बहुत बहुत बधाई आपको।"
Jul 8
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
"बहुत बहुत शुक्रिया, शेख साहब। "
Jul 8
Sheikh Shahzad Usmani commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
"वाह। भिगो दिया बरसात की शाब्दिक बौछार ने। हार्दिक बधाइयां आदरणीय मुज़फ़्फ़र इक़बाल सिद्दीक़ी साहिब।"
Jul 7
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Jul 7
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Jul 2

Profile Information

Gender
Male
City State
BHOPAL MP
Native Place
rahatgarh sagar
Profession
employee

MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's Blog

तसल्ली  (लघुकथा)

 "अरे  ...  ये तुम्हारा नेटवर्क कभी भी आता - जाता रहता है। मैं तो परेशान हो गया। पुराना बदल कर, ये तुम्हारी कम्पनी का नया वाला ब्रॉडबेंड लिया। उसका भी यही हाल है। 

 तुम ही बोल रहे थे न , ...  कि इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी।  सर्विसिंग भी अच्छी है। अब तुम्हारे साथ भी वही रोना है।" शर्मा जी  ने गुस्से से कहा।
नहीं सर, आपको कोई दिक्कत नहीं होगी।

"ये लीजिये कनेक्टिविटी आ गई।",  उसने मॉडेम सेट करते हुए बोला । …
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Posted on July 19, 2018 at 8:00pm — 4 Comments

"मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)

मौसम विभाग ने तो मई के अंतिम सप्ताह में ही सम्भावना व्यक्त कर दी थी कि इस साल औसत से कहीं अधिक बारिश होगी । सभी लोग इस खबर को पढ़ कर खुश भी थे ।   कल रात से ही मानसून का सिस्टम सक्रिय हो गया । बहुत तेज़ गरज के साथ बादलों की आवाजाही होने लगी। 

 एक दम काली घटा ने सारे आसमान पर जैसे क़ब्ज़ा जमा लिया हो। रात से ही मूसलाधार बारिश हो रही थी।   सौरभ जैसे ही सुबह दस बजे घर से आफिस के लिए कार में जैसे ही बैठा , श्रुति बारिश में भीगती आईं , कार के…
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Posted on July 7, 2018 at 11:30pm — 9 Comments

" उमस " ( लघु कथा )

" हेलो - क्या हाल है , आसिफ ? " मैं तो ठीक हूँ तलत ,

" लेकिन मौसम बहुत बेकार है दिन भर बादलों की आना जाना जारी है लेकिन बारिश की कोई संभावना नज़र नहीं आती । घनघोर घटाएँ छाती तो हैं लेकिन वैसी बारिश नहीं होती जैसी होनी चाहिए। हलकी फुल्की फौहार थोड़ी देर के लिए माहौल में ठंडक पैदा कर देती। सूरज की तपिश इसी ठंडक को उमस में परिवर्तित कर देती है। बस ये उमस ही बर्दाश्त से बाहर है। बड़ी बेचैनी होती है। एक अजीब सी घुटन है। 

काश ! कोई इन घटाओं से कह दे आएं…

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Posted on August 20, 2017 at 6:50am — 6 Comments

" फर्ज " ( लघु कथा )

देख , रुचि - " अंश बहुत अच्छा लड़का है । घर के लोग भी कुलीन हैं और फिर बैंगलोर में ही है । शादी के बाद तुझे जॉब भी स्विच नहीं करना पड़ेगा । तेरे पिताजी ने तो पंडित जी से कुंडली भी मिलवा ली है। 

अब तू ,ना ... मत करना । इन्हें भी तेरी बहुत चिंता है । एक ही साल तो रह गया है रिटायर होने में ।। 

नहीं माँ , ... " मैं कितनी बार बोल चुकीं हूँ । अभी मुझे शादी नहीं करनी । जब करनी होगी तो बता दूँगी ।"…

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Posted on August 20, 2017 at 1:11am — 5 Comments

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At 7:56am on May 3, 2017, MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI said…

धन्यवाद 

At 12:35am on January 8, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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