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Mohan Begowal
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Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"      कौन कहता है कि ऐसे बे जुबाँ हो जाएंगे। हम जुबाँ वाले ज़मीं से आसमां हो जाएंगे। फैल जाना है हमें पक्का टिकाना जब नहीं, आग में जल कर तो आखर हम धुआं हो जाएंगे। चाहते अब हम नहीं बातें हमारी तुम करो,क्या पता था तुम हमारे मेहरबाँ हो…"
Jul 27, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Mohan Begowal's blog post जिंदगी की उधेड़बुन (लघुकथा )
"बहुत ही संवेदनशील लघु कथा हुई आदरणीय..लेकिन आखरी दो पंक्तियों में कसावट की कमी लगी.."
Jul 13, 2018
Samar kabeer commented on Mohan Begowal's blog post जिंदगी की उधेड़बुन (लघुकथा )
"जनाब मोहन जी आदाब,लघुकथा का प्रयास अच्छा हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 11, 2018
मोहन बेगोवाल commented on Mohan Begowal's blog post जिंदगी की उधेड़बुन (लघुकथा )
"   सुबह आठ बजे से उसका साईकल इस एवन्यु में घूम रहा था । उसके भोंपू की आवाज़ एवन्यु के हर कोने तक पहुंच चुकी थी। मगर न कोठी से कोई भी औरत न ही माँ के साथ बच्चा बाहर आया। उसके साईकल पर लगे बड़े, छोटे गुबारे, छोटी बड़ी कार या कोई बजाने वाले…"
Jul 9, 2018
babitagupta commented on Mohan Begowal's blog post जिंदगी की उधेड़बुन (लघुकथा )
"बच्चे के स्वाभिमान की रक्षा के लिए  और उसकी सहायता करने के लिए खिलौना खरीदना फिजूल था तो घर का कुछ काम कराकर ,उसकी सहायता की जा  सकती थी.,वैसे कहानी बहुत कुछ आज की व्यवस्था के नजदीक  दिखाई देती हैं.उम्दा रचना के लिए आर्थिक बधाई…"
Jul 9, 2018
Neelam Upadhyaya commented on Mohan Begowal's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय  मोहन बेगोवाल जी, नमस्कार ।  अच्छी ग़ज़ल की पेशकश के लिए बधाई । "
Jul 9, 2018
Neelam Upadhyaya commented on Mohan Begowal's blog post जिंदगी की उधेड़बुन (लघुकथा )
" हाथ  में  कुछ पकड़ा देने से तो बच्चे के  स्वाभिमान की रक्षा नहीं हुई ।  हाँ, कुछ सहायता अवश्य हो जाएगी, उसकी माँ के  इलाज में।  लेकिन मेरे विचार से  अच्छा  होता अगर  बच्चे से कोई खिलौना खरीद  कर…"
Jul 9, 2018
Mohan Begowal posted a blog post

जिंदगी की उधेड़बुन (लघुकथा )

सुबह आठ बजे से उसका साईकल इस एवन्यु में घूम रहा था । उसके भोंपू की आवाज़ एवन्यु के हर कोने तक पहुंच चुकी थी। मगर न कोठी से कोई भी औरत न ही माँ के साथ बच्चा बाहर आया। उसके साईकल पर लगे बड़े, छोटे गुबारे, छोटी बड़ी कार या कोई बजाने वाले खिलौने सभी उस की तरफ झाक रहे थे । दो घंटे हो गए थे इस एवन्यु दाखल हुए। साईकल की रफ्तार भी धीमी हो चली थी। चेहरा उदास और आँखों में नमी बढने लगी अचानक ही उस ने इक कोठी के आगे साईकल आ लगाई, इक बार बेल्ल बजाई कोई जवाब नहीं आया। उसने फिर बेल्ल बजाई। थोड़ी देर बाद इक बाऊ…See More
Jul 9, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mohan Begowal's blog post ग़ज़ल
"आ. मोहन जी, अच्छी गजल हुयी है , हार्दिक बधाई ।"
Jul 8, 2018
Mohan Begowal commented on Mohan Begowal's blog post ग़ज़ल
" आदरनीय समर जी और दोस्तो बहुत शुक्रिया ।"
Jul 8, 2018
Samar kabeer commented on Mohan Begowal's blog post ग़ज़ल
"जनाब मोहन बेगोवाल। जी आदाब,बह्र-ए-मीर पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । आपकी ग़ज़ल बह्र के हिसाब से ठीक है,लेकिन इस बह्र में ये बात भी ध्यान देने योग्य है कि बह्र के साथ मिसरों का लय में होना भी ज़रूरी है और उसके साथ शिल्प की पकड़ भी मज़बूत…"
Jul 8, 2018
Mohammed Arif commented on Mohan Begowal's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आदाब,                         ग़ज़ल का बहुत ही बेहतरीन प्रयास । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Jul 8, 2018
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohan Begowal's blog post ग़ज़ल
"आद0 मोहन बोगोवाल जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल का बढिया प्रयास है। गुणीजनों के इस्लाह की प्रतीक्षा कीजिये  मेरी बधाई स्वीकार करें।"
Jul 8, 2018
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohan Begowal's blog post बड़ा सवाल(लघुकथा )
"शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों की आपबीती से लेकर घरेलू महिला सरोकार के गंभीर मुद्दे उभारती बहुत ही कटाक्षपूर्ण रचना के लिए हार्दिक. बधाईयां आदरणीय मोहन बेगोवाल साहिब।"
Jul 7, 2018
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohan Begowal's blog post जुआ (लघुकथा)
"बहुत ही उपेक्षित मुद्दे को उभारकर बेहतरीन उम्दा कथानक के साथ बढ़िया विचारोत्तेजक सृजन। हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय मोहन बेगोवाल साहिब।"
Jul 7, 2018
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohan Begowal's blog post ग़ज़ल
"बहुत बढ़िया ग़ज़ल। हार्दिक बधाई आदरणीय मोहन बेगोवाल साहिब । मुझे ऐसा लगा कि कुछ अशआर में सम्मानित गुरुुजन इस्लाह देेेना चाहेंंगे।"
Jul 7, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical
About me
Professor

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जिंदगी की उधेड़बुन (लघुकथा )

सुबह आठ बजे से उसका साईकल इस एवन्यु में घूम रहा था । उसके भोंपू की आवाज़ एवन्यु के हर कोने तक पहुंच चुकी थी।

मगर न कोठी से कोई भी औरत न ही माँ के साथ बच्चा बाहर आया। उसके साईकल पर लगे बड़े, छोटे गुबारे, छोटी बड़ी कार या कोई बजाने वाले खिलौने सभी उस की तरफ झाक रहे थे । दो घंटे हो गए थे इस एवन्यु दाखल हुए। साईकल की रफ्तार भी धीमी हो चली थी। चेहरा उदास और आँखों में नमी बढने लगी अचानक ही उस ने इक कोठी के आगे साईकल आ लगाई, इक बार बेल्ल बजाई कोई जवाब नहीं आया। उसने फिर बेल्ल बजाई। थोड़ी देर बाद…

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Posted on July 8, 2018 at 1:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल

   

चाहा ये दिल तेरा पाना हम को।
महका के राहों को जाना हम को।

कहते कोई तो अफ़साना हम भी,
कैसे बुनता ताना बाना हम को।

आये जाये मिलकर बैठे बिछड़ें,
कहना जो भी होता पाना हम को।

कैसा होगा अब ये हम का जीना,
जब राहों इन आना जाना हम को।

औरत बन के तुझको भी आना होगा,
क्यूँ होता इलजाम निभाना हम को।

  1. मौलिक व अप्रकाशित

Posted on July 7, 2018 at 3:07pm — 8 Comments

जुआ (लघुकथा)

 ड्यूटी के बाद मैं घर को पैदल चल पड़ा। ऐसा आजकल मैं अकसर ही करता हूँ। क्यूँ कि डाक्टर ने मुझे ज्यादातर पैदल चलने को कहा है। कुछ कदम चलते ही मेरे साथ रिक्शा इक रिक्शा भी चलने लगा।

चलते हुए बार बार रिक्शे वाला रिकशे पर बैठने को कहता रहा।

“बाऊ जी,दस दे देना,मगर मैं चलता रहा, फिर उसने पास आकर कहा,चलो पाँच ही दे देना।"

“अरे भाई, बात पाँच या दस की नहीं, मैंने कहा। मैं बैठना नहीं चाहता।"

मगर इस बार उस के कहने में एक तरला सा लगा, “बाऊ जी, बैठ जाओ न।“

आखिर, मैं रिक्शे…

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Posted on July 4, 2018 at 11:30pm — 9 Comments

बड़ा सवाल(लघुकथा )

गीता पाठशाला से अभी घर पहुंची, उसने आते ही माँ से सवाल किया, “ प्रोजेक्ट पर काम तो हम सब बच्चों ने किया था।”

“हाँ, प्रोजेक्ट तो होता ही है कि सभी बच्चे एक साथ काम करें।” मम्मी ने गीता को समझाने के अंदाज़ में कहा

“तो प्रोजेक्ट हम सभी बच्चों की मेहनत से पूरा हुआ ” गीता ने फिर कहा।

"हाँ " ।

“इस का क्रेडिट भी हम बच्चों को मिलना चाहिए ”, गीता ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा

“मगर इनाम तो हमें नहीं मिला", ये तो प्रिंसिपल को मिला” गीता ने कहा

“हाँ, बच्चे ऐसा ही होता है,…

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Posted on July 3, 2018 at 11:00pm — 9 Comments

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At 7:29am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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