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योगराज प्रभाकर
  • Male
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  • India
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योगराज प्रभाकर's Discussions

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 में सम्मिलित सभी लघुकथाएँ
13 Replies

(1). आ० मोहम्मद आरिफ़ जी कलयुग . एक था कछुआ , एक था खरगोश जैसा कि आपको पता है । आप कहेंगे इसमें कौन-सी नई बात है । जो कथा आपने पढ़ी-सुनी थी अब उसका कलयुगी संस्करण आया है । तो सुनो , खरगोश ने कछुए से…Continue

Started this discussion. Last reply by विनय कुमार Aug 2.

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक 39 में शामिल सभी लघुकथाएँ
5 Replies

(१). आ० मोहम्मद आरिफ़ जी  विदाई .  " मैंने शैलजा की स्वीकृति ले ली है । वह पूरी तरह से सहमत है ।" आनंद जी ने पत्नी को खुश होकर कहा । " क्या कहा ! ज़रा फिर से तो कहना , मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है । "…Continue

Started this discussion. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Jul 27.

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-38 में शामिल लघुकथाएँ
12 Replies

(1). आ० महेंद्र कुमार जी   मृग-मरीचिका‘‘प्यार से कोई आदमी कैसे डर सकता है?’’ यही वो सवाल था जिसने उसे उस पागल को केस स्टडी बनाने पर मजबूर कर दिया। जब वह पहली बार उससे मिली तो वो ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by Dr Ashutosh Mishra Jun 3.

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 में स्वीकृत सभी लघुकथाएँ
6 Replies

(1). आ० मोहम्मद आरिफ़ जी उपाय------------------------------ब्रह्म ज्योतिषी के आगे हाथ बढ़ाते हुए -" इन रेखाओं को देखकर बताइए आखिर ये क्या कहती है ? "ब्रह्म ज्योतिषी ने जैसे ही उसके हाथों की रेखाओं को…Continue

Started this discussion. Last reply by Mahendra Kumar May 14.

 

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प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"//उनकी याद ना छन भर बिसरे ।दो अँखियों का कजरा पसरे ।// बहुत खूब, प्रदत्त विषय पर सुंदर गीत रचा है आ0 सतीश मापतपुरी भाई जी। बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें।   "
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ आदरणीय समर कबीर साहिब। कम से कम वरिष्ठ सदस्यों को ऐसी टिप्पणियां देने से गुरेज करना चाहिए। यह रिवाज़ सोशल मीडिया का है ओबीओ का क़तई नही।"
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"कृपया यह आलेख अवश्य पढ़ें आद्रणीय: http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/topics/5170231:Topic:506586"
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
""उठी उठी" से अंत किया है, "लघु गुरु" कैसे तात दिया है? "दो-दो", "इक-इक-दो" चलता है, "इक-दो" तो हमको खलता है।    "
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"बहुत उम्दा राजनैतिक व्यंग्य है। इस उम्दा अतुकांत कविता पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें भाई उस्मानी जी।"
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"वाह वाह वाह, अति सुंदर, सरस और प्रभावशाली दोहावली हुई है भाई अजय गुप्ता, हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"//कागजी नाव रिमझिम बारिश बच्चों का चाव// कितना मासूम सा हाइकु है, वाह वाह वाह ! बाकी हाइकु भी उम्दा हुए हैं जिस हेतु मेरी दिली बधाई स्वीकार करें । "
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"सावन के विभिन्न आयामों को छोटी हुई आपकी यह अतुकांत कविता अति सुंदर एवं विषयानुकूल हुई है भाई विनय कुमार सिंह जी। बहुत-बहुत बधाई स्वीकार करें।   "
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"अति सुंदर एवं विषयानुकूल दोहावली रची है डॉ छोटेलाल सिंह जी। विरह की छोंक से अभिव्यक्ति और भी मर्मस्पर्शी हो गई है। इस उम्दा प्रस्तुति हेतु मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई स्वीकार करें।"
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"सावन की आमद में विरह की वेदना से भीगा बेहद उम्दा गीत रचा है आदरणीय वासुदेव अग्रवाल नमन  जी। बहुत-बहुत बधाई स्वीकार करें। "
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"//झुग्गी सहमी सी रहे , जब आये बरसात।  रिसता  टपरा  झेलता,  टप  टप  सारी  रात।।// वाह वाह वाह।  सावन से जुड़ा हुआ कोई पहलू अछूता नहीं छोड़ा आपने इस दोहावली में। उपरोक्त दोहा तो अति-विशिष्ट हुआ है। मुझे मेरी…"
Friday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"मोहब्बत का संदेसा लिए अच्छी कविता रची है आ० कनक हरलालका जी, बहुत बहुत बधाई। "
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"//देख कर मंज़र भड़क जाएँ न शोले कल्ब मेंभीगा भीगा उनका है तन आया सावन झूम केl// क्या कहने हैं आ० तस्दीक़ अहमद खान साहिब। सभी अशआर लाजवाब हुए हैं, शेअर दर शेअर दाद और मुबारकबाद स्वीकार करें। "
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"सावन और विरह के रंग में सराबोर आपका यह गीत अच्छा लगा आ० मोहम्मद आरिफ जी। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Friday
विनय कुमार replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 में सम्मिलित सभी लघुकथाएँ
"सर्वप्रथम ओ बी ओ लाइव लघुकथा गोष्ठी अंक ४० के सफल संचालन और सुंदर संकलन हेतु आदरणीय योगराज प्रभाकर सर सहित, पूरी टीम को हार्दिक बधाई. संकलन में शामिल सभी १९ लघुकथाकारों के मेरी ओर से हार्दिक बधाई. संकलन में मेरी रचना को शामिल करने के लिए चयन सीमिति…"
Aug 2
Neelam Upadhyaya replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 में सम्मिलित सभी लघुकथाएँ
"ओबीओ लघुकथा गोष्ठीके अंक 40 के सफल संचालन  एवं त्वरित संकलन के लिए आदरणीय योगराज प्रभाकर जी का हार्दिक आभार ।  इस बार के आयोजन में भी मेरी लघुकथा को स्थान मिला साथ ही गुणीजनों का मार्गदर्शन भी।  इसके लिए बहुत बहुत आभार।  आयोजन…"
Aug 2

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तरही ग़ज़ल-2 (आ० समर कबीर जी को समर्पित)

1222 1222 122
.
हमारा धर्म दहशत है? नहीं तो!

तो पूरी क़ौम सहमत है? नहीं तो!
.
तेरे हाथों में ख़ंजर है, मेरे भी
ये क्या अच्छी अलामत है? नही तो



फ़क़त मंदिर ओ मस्जिद के मसौदे,

यही क़ौमी क़यादत है? नही तो!  



अज़ीमुशशां मक़ाबिर के जो खालिक,

कहीं उनकी भी तुर्बत है? नही तो!


जहाँ पत्थर की हर देवी सुरक्षित,…
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Posted on May 7, 2017 at 7:30pm — 16 Comments

आते जाते पल (लघुकथा)

वह अपनी धुंधली आँखों से बीत रहे वर्ष की पीठ पर बने रंग बिरंगे चित्रों को बहुत गौर से निहार रही थी, वह अभी उनमें छुपे चेहरों को पहचानने का प्रयास ही कर रही थी कि सहसा वे चित्र चलने फिरने और बोलने लग पड़ेI   

"माँ जी! कितनी दफा कहा है कि इन बर्तनों को हाथ मत लगाया करोI" 

नये टी सेट का कप उससे क्या टूटा उसके घर में कलेश ने पाँव पसार लिए थेI 

अगले दृश्य में नए साल की इस झांकी को होली के रंगों ने ढक लियाI  

"बेटा ये बहू की पहली होली है, तो इस बार त्यौहार धूमधाम से..."…

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Posted on January 1, 2017 at 12:01am — 14 Comments

अधूरी कथा के पात्र (लघुकथा) .

अचानक स्कूटर खराब हो जाने के कारण वापिस लौटने में काफी देर हो चुकी थी अत: वह काफी तेज़ी से स्कूटर चला रहा थाI एक तो अँधेरा ऊपर से आतंकवादियों का डरI इस सुनसान रास्ते पर बहुत से निर्दोष लोगों की हत्याएँ हो चुकी थींI वह अपने अंदर के भय को पीछे बैठी पत्नी से छुपाने का प्रयास तो कर रहा था, किन्तु उसकी पत्नी स्कूटर तेज़ रफ़्तार से सब कुछ समझ चुकी थीI स्कूटर नहर की तरफ मुड़ा ही था कि अचानक हाथों में बंदूकें पकडे पाँच सात नकाबपोश साए सड़क के बीचों बीच प्रकट हो गएI

“रुक जा ओये!” एक…
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Posted on December 27, 2016 at 10:00am — 10 Comments

तुम क्या हो? (अतुकांत कविता)

तुम क्या हो?    

किसी समुद्री मछली के उदर में

किसी ब्रह्मचारी के पथभ्रष्ट शुक्राणु का अंश मात्र

किन्तु उसका निषेचन?

अभी बहुत समय बाकी है उसमे  

बहुत.....

हे प्रिये!

बुरा नहीं स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझना

अमरत्व का दिवा-स्वप्न भी बुरा नहीं

किन्तु समझना आवश्यक है

यह जान लेना आवश्यक है कि

अमर होने ने लिए मरण आवश्यक है

मरण हेतु जन्म अति आवश्यक

फिर तुम्हें तो अभी जन्म लेना है

जन्म लेने से पूर्व…

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Posted on December 14, 2016 at 12:42pm — 7 Comments

Comment Wall (79 comments)

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At 4:25pm on May 22, 2017, Lajpat Rai Garg said…

यॊगराज जी,
आपकी लघुकथा-अधूरी कथा के पात्र- पंजाब के आतंकवाद की याद ताजा कर गई. सुंदर रचना के लीये बधाई.

At 9:37pm on April 21, 2016, Dr. Ehsan Azmi said…
धन्यवाद सर
At 9:37pm on April 19, 2016, Radha Shrotriya"Asha" said…

Shukriya sir 

At 8:45pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

जन्मदिन की ढेरों  शुभकामनाएँ आदरणीय 

At 3:38pm on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
हृदयतल से बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सर, मुझे अपनी सूची में जुड़ने का सुअवसर प्रदान करने के लिए।
At 3:04am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
प्रतिष्ठित ई-साहित्यिक-पत्रिका "ओपन बुक्स ऑनलाइन" के विख्यात प्रधान संपादक वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय गुरुजी श्री योगराज प्रभाकर जी के जन्मदिन की वर्षगाँठ पर मेरी तरफ से हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ ।
At 12:39am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

परम आदरणीय योगराज प्रभाकर सर, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 10:21am on July 12, 2015, kanta roy said…
सर जी , मेरा कमेंट बाॅक्स नहीं खुल पा रहा है लघुकथा की कक्षा में । क्यों ???
At 4:05pm on January 3, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

नए वर्ष में         नए हर्ष में

सुधियों     का      मकरंद i

जीवन का परिमल बन जाए

महकाये      हर      छंद I

      -गोपाल नारायन  श्रीवास्तव

At 10:08pm on December 8, 2014, poonam dogra said…

Thank you so much Yograj ji for adding me..

 
 
 

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