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Mohan Begowal
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मोहन बेगोवाल commented on Mohan Begowal's blog post अधूरी जिंदगी(लघु कथा)
"अधूरापन दो दिन पहले सरदारनी स्वर्ग सिधार गई, लोग घर में आ जा रहे थे। कुछ लोग दार जी के पास चुपचाप बैठे,अफ़सोस जता रहे थे। छोटी बहू हर आने वाले को चाय पानी प्रदान कर रही थी। इस मोहल्ले में दार जी ही पुराने रहने वाले हैं,बाकी लोग यहाँ दंगों के बाद आ कर…"
Jun 6
मोहन बेगोवाल commented on Mohan Begowal's blog post अँधेरे का डर (लघुकथा )
"      अँधेरे का डर जब भी सुरेन्द्र बात करता हौसला उसकी बातों से अकसर झलकता, काम करवाने के लिए जब भी कोई उसके दफ्तर में आता उसी का हो कर रह जाता | मुश्किल पलों में भी वह मजाक को साथ नहीं छोड़ने देता, और जिन्दगी का हिस्सा बना लिया | जब…"
Jun 6
Mahendra Kumar commented on Mohan Begowal's blog post अधूरी जिंदगी(लघु कथा)
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी, इस संवेदनशील लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. एक सुझाव है कि यदि आप इसमें इस बात को उभार सकें कि किसके जाने से दार जी की ज़िन्दगी अधूरी हो गयी और वह अकेलापन महसूस करने लगे तो यह और बेहतर लघुकथा हो जाएगी. सादर."
Jun 6
Mahendra Kumar commented on Mohan Begowal's blog post अँधेरे का डर (लघुकथा )
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी, इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. आपकी लघुकथा के सन्दर्भ में कुछ चीजें हैं जो मुझे स्पष्ट नहीं हो सकीं.  1. //मगर आज ऐसा नहीं था, बस उस के लिए अनजान सफर में जा रही थी, जिस पर वह सवार था |// आज ऐसा क्या नहीं…"
Jun 6
Mohan Begowal posted a blog post

अधूरी जिंदगी(लघु कथा)

कुछ लोग दार जी के पास चुपचाप बैठे,अफ़सोस जता रहे थे। छोटी बहू हर आने वाले को चाय पानी प्रदान कर रही थी। इस मोहल्ले में दार जी ही पुराने रहने वाले हैं,बाकी लोग यहाँ दंगों के बाद आ कर अस्थाई तौर से रह रहे हैं। मगर मानवता के रिश्ते से अब ये लोग यहाँ आ कर बैठे हैं। "बाऊ जी अब कैसा महसूस कर रहे हो" राम प्रकाश ने पास बैठते हुए कहा। “किस के बारे”, दार जी ने कहा। "कल जो डाक्टर साहिब ने बताया कि ब्लड प्रेशर की तकलीफ है आप को”। भाई राम, भला ये भी कोई तकलीफ होती है, इस उम्र तक तो हम ने़ ऐसी कई………… । दार…See More
Jun 5
Mohan Begowal posted blog posts
Jun 3
Mohan Begowal commented on Mohan Begowal's blog post अधूरी जिंदगी(लघु कथा)
"आदरणीय आरिफ़ जी,आप जी की तरफ की गई तनकीद के लिए, बहुत शुक्रिया।"
Jun 3
Mohammed Arif commented on Mohan Begowal's blog post अधूरी जिंदगी(लघु कथा)
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आदाब,                                     (1)  ज़िंदगी में पाकर खोने या टूटने-बिखरने की पृष्ठभूमि की औसत दर्जे की लघुकथा ।                                      (2) पात्रानुकूल संवाद ।                            …"
Jun 3
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हिंदी की कक्षा

हिंदी सीखे : वार्ताकार - आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल"
Jun 3
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आदरनीय समर जी, बहुत शुक्रिया "
May 26
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जिंदगी   ये  न   हमारा  कि  पराया देखो। साथ चलना है तो बस साथ निभाया देखो। कौन दिल से है निभाता जो दिखाया सपना,यार  देखा  जो   हमें  साथ  बिठाया  देखो। कल मिला तो ये कहानी थी…"
May 26
TEJ VEER SINGH commented on Mohan Begowal's blog post किराये के रिशते (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय मोहन जी। बेहतरीन लघुकथा।"
May 26
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"      प्यार मिलने को है जाना तो बहाना देखो बन न जाये कहीं  झूठा ये तमाशा  देखो चेहरा साथ निभाता हैं कहाँ अपना भी रात  कैसे  है  गुजारी  ये बताना देखो जब मिला तो ये कहानी थी सुनाई उसने आज हमको ये लगा राज़…"
May 25
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
" आ. समर सर जी,बहुत सुंदर ग़ज़ल पढ़ने को मिली,बहुत बधाई हो"
May 25
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आदरनिए नूर जी, बहुत उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई हो ।"
May 25
Neelam Upadhyaya commented on Mohan Begowal's blog post किराये के रिशते (लघुकथा)
"आदरणीय मोहन जी, नमस्कार।  विभिन्न संस्कृतियों में रह रहे परिवार की पीढ़ियों के बीच का अंतर झळकाती बहुत ही बढ़िया लघुकथा।   बधाई स्वीकार करें। "
May 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical
About me
Professor

Mohan Begowal's Blog

अधूरी जिंदगी(लघु कथा)

कुछ लोग दार जी के पास चुपचाप बैठे,अफ़सोस जता रहे थे। छोटी बहू हर आने वाले को चाय पानी प्रदान कर रही थी। इस मोहल्ले में दार जी ही पुराने रहने वाले हैं,बाकी लोग यहाँ दंगों के बाद आ कर अस्थाई तौर से रह रहे हैं। मगर मानवता के रिश्ते से अब ये लोग यहाँ आ कर बैठे हैं।

"बाऊ जी अब कैसा महसूस कर रहे हो" राम प्रकाश ने पास बैठते हुए कहा।

“किस के बारे”, दार जी ने कहा।…

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Posted on June 3, 2018 at 12:00am — 4 Comments

अँधेरे का डर (लघुकथा )



जब भी सुरेन्द्र बात करता हौसला उसकी बातों से अकसर झलकता, काम करवाने के लिए जब भी कोई उसके दफ्तर में आता उसी का हो कर रह जाता |

मुश्किल पलों में भी वह मजाक को साथ नहीं छोड़ने देता, और जिन्दगी का हिस्सा बना लिया |

जब सुरेन्द्र सफर में होता तो ऐसा कभी न होता कि सफर करते हुए कोई आकह्त महसूस होती हो उसे, वह तो साथ बैठे से ऐसी बात शुरू करता कि सफर खत्म होने तक वह  शख्स उसी का हो जाता |

मगर आज ऐसा नहीं था, बस उस के लिए अनजान सफर में जा रही थी, जिस पर वह सवार था |

जो कुछ…

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Posted on June 1, 2018 at 8:00pm — 2 Comments

किराये के रिशते (लघुकथा)

किराये के रिश्ते

रात भर नींद नहीं आई, और सुबह होते ही वह पार्क में आ गया। कल शाम को आए फोन से पैदा हुई समस्या अभी सुलझ नहीं रही थी । चाहे कोई हल नज़र नहीं आ रहा, मगर इस समस्या को हल किये बिना छोड़ा भी नहीं जा सकता। आख़र उनका है भी कौन है,जो सात समंदर पार हैं, मगर  इस बार महिंदरो उसकी बात से सहमत नहीं हो रही थी । उसका कहना कि “क्या करेंगे वहाँ जा कर हम, आप तो फिर भी यहाँ वहाँ घूम आते हो,मगर मैं ........",कह कर महिंदरो चुप हो गई।

"मैं तो वहाँ अकेली अंदर बैठी कैसे रह सकती हूँ, न कोई…

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Posted on May 23, 2018 at 10:00pm — 3 Comments

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