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Mohan Begowal
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Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
" आदरनीय अमित जी , अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"      आदरनीय सुरिन्दर जी, बहुत उम्दा ग़ज़ल ,ये शे'र मुझे बहुत अच्छा लगा , बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"तन्हा जी , बहुत सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरनीय नादिर जी, अच्बछी ग़ज़ल कहने की बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
" आदरनीय धामी जी, बहुत उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई , ये बोलने में  "करोना "है "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
" आदरनीय सालिक जी, सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई कुबूल करें "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
" आदरनीय तस्दीक जी, अच्छी ग़ज़ल कहने के लिए बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
" आदरनीय , नाकाम जी , अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
" आदरनीय अजित जी, सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"  सुना है , शायरी ऐसे अल्फाज़ को अच्छा नही समझती , मगर बाकि ग़ज़ल के लिए गुप्ता जी बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"निलेश जी,अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
" आदरनीय समर जी, बहुत शुक्रिया जी, अब मिसरे को बदल रहा हूँ ,    रिश्ते हुए करीब जो क्यूँ वो बिखर गए ,  रिश्ते इसे कहें तो निभाना बहुत हुआ "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"    आदरनीय गंगा जी , बहुत  अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीया दीदी जी, बहुत ही शानदार ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"  आदरणीय समर जी, ऐसा हर बार हो जाता है, शिल्प में कमी रह जाती, सर जी, इस के सुधार के लिए, आपका मार्गदर्शन चाहिए, धन्यवाद "
Saturday
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"मुहतरमा रक्षिता जी, अच्छी ग़ज़ल की बधाई कुबूल करें l "
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical
About me
Professor

Mohan Begowal's Blog

जिंदगी की उधेड़बुन (लघुकथा )

सुबह आठ बजे से उसका साईकल इस एवन्यु में घूम रहा था । उसके भोंपू की आवाज़ एवन्यु के हर कोने तक पहुंच चुकी थी।

मगर न कोठी से कोई भी औरत न ही माँ के साथ बच्चा बाहर आया। उसके साईकल पर लगे बड़े, छोटे गुबारे, छोटी बड़ी कार या कोई बजाने वाले खिलौने सभी उस की तरफ झाक रहे थे । दो घंटे हो गए थे इस एवन्यु दाखल हुए। साईकल की रफ्तार भी धीमी हो चली थी। चेहरा उदास और आँखों में नमी बढने लगी अचानक ही उस ने इक कोठी के आगे साईकल आ लगाई, इक बार बेल्ल बजाई कोई जवाब नहीं आया। उसने फिर बेल्ल बजाई। थोड़ी देर बाद…

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Posted on July 8, 2018 at 1:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल

   

चाहा ये दिल तेरा पाना हम को।
महका के राहों को जाना हम को।

कहते कोई तो अफ़साना हम भी,
कैसे बुनता ताना बाना हम को।

आये जाये मिलकर बैठे बिछड़ें,
कहना जो भी होता पाना हम को।

कैसा होगा अब ये हम का जीना,
जब राहों इन आना जाना हम को।

औरत बन के तुझको भी आना होगा,
क्यूँ होता इलजाम निभाना हम को।

  1. मौलिक व अप्रकाशित

Posted on July 7, 2018 at 3:07pm — 8 Comments

जुआ (लघुकथा)

 ड्यूटी के बाद मैं घर को पैदल चल पड़ा। ऐसा आजकल मैं अकसर ही करता हूँ। क्यूँ कि डाक्टर ने मुझे ज्यादातर पैदल चलने को कहा है। कुछ कदम चलते ही मेरे साथ रिक्शा इक रिक्शा भी चलने लगा।

चलते हुए बार बार रिक्शे वाला रिकशे पर बैठने को कहता रहा।

“बाऊ जी,दस दे देना,मगर मैं चलता रहा, फिर उसने पास आकर कहा,चलो पाँच ही दे देना।"

“अरे भाई, बात पाँच या दस की नहीं, मैंने कहा। मैं बैठना नहीं चाहता।"

मगर इस बार उस के कहने में एक तरला सा लगा, “बाऊ जी, बैठ जाओ न।“

आखिर, मैं रिक्शे…

Continue

Posted on July 4, 2018 at 11:30pm — 9 Comments

बड़ा सवाल(लघुकथा )

गीता पाठशाला से अभी घर पहुंची, उसने आते ही माँ से सवाल किया, “ प्रोजेक्ट पर काम तो हम सब बच्चों ने किया था।”

“हाँ, प्रोजेक्ट तो होता ही है कि सभी बच्चे एक साथ काम करें।” मम्मी ने गीता को समझाने के अंदाज़ में कहा

“तो प्रोजेक्ट हम सभी बच्चों की मेहनत से पूरा हुआ ” गीता ने फिर कहा।

"हाँ " ।

“इस का क्रेडिट भी हम बच्चों को मिलना चाहिए ”, गीता ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा

“मगर इनाम तो हमें नहीं मिला", ये तो प्रिंसिपल को मिला” गीता ने कहा

“हाँ, बच्चे ऐसा ही होता है,…

Continue

Posted on July 3, 2018 at 11:00pm — 9 Comments

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