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Mohan Begowal
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Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-89 (विषय: बाज़ार)
"         बाज़ार की अवधारणा उस दिन वह खाली हाथ लौट रहा था। वह सोचता है, "यहाँ सब कुछ ख़रीदा और बेचा जाता है, आजकल मेहनत क्यों नहीं है।" "हाँ, अवश्य," उसने फिर स्वयं को उत्तर देते हुए कहा कि उस दिन मास्टर…"
Aug 30, 2022
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-146
" आदरणीय लक्ष्मण भाई जी , धन्यवाद जी  "
Aug 28, 2022
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-146
" आदरणीय चेतन जी , बहुत शुक्रिया जी "
Aug 28, 2022
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-146
"अगर तुम दवा हम बताने लगेंगे। दिया  दर्द  जाते  ज़माने लगेंगे।   अगर आँख से दिल छुपाने लगेंगे। ये सपने हकीकत चुराने  लगेंगे।   छुपा रख अभी वक्त आया नहीं है, बिना इस जरूरत  दिखाने लगेंगे।   हमें जिंदगी ने तो गौहर…"
Aug 27, 2022
Mohan Begowal replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आदरनीय  तेजवीर जी , बहुत शुक्रिया जी "
Jul 31, 2022
Mohan Begowal replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"संतान आज उसके माता-पिता दोनों बेटी को उसके नए पद पर छोड़कर घर आए। भले ही वे हिम्मत से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन फिर भी... जबकि पहले जरूरत के मुताबिक रहने के लिए घर न मिलने की चिंता थी। लेकिन जब उसे घर जैसे बड़े घर का हिस्सा मिल गया तो उसे इस बात की…"
Jul 31, 2022
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"  आदरनीय गणेश भाई जी , सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो "
May 31, 2020
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"     आदरनीया अर्चना जी , धन्यवाद "
May 31, 2020
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"   अद्निया शहजाद जी , बहुत मेहरबानी "
May 31, 2020
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
" आदरनीय राणा जी , धन्यवाद जी "
May 31, 2020
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
" आदरनीय तेजवीर जी , बहुत शुक्रिया "
May 31, 2020
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"  आदरनीय तेजवीर जी, कमाल की पेशकारी , हार्दिक बधाई हो "
May 31, 2020
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आदरनीया वीना जी , अच्छी लघुकथा की बधाई हो "
May 31, 2020
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"  आदरनीय मनन जी , बहुत सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो "
May 31, 2020
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आदरनीय शहजाद भाई , अच्छी लघुकथा हुई बधाई हो "
May 31, 2020
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा जी , समाजिक तब्दीली को लेकर अच्च्छी लघुकथा हुई , बधाई हो "
May 31, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical
About me
Professor

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जिंदगी की उधेड़बुन (लघुकथा )

सुबह आठ बजे से उसका साईकल इस एवन्यु में घूम रहा था । उसके भोंपू की आवाज़ एवन्यु के हर कोने तक पहुंच चुकी थी।

मगर न कोठी से कोई भी औरत न ही माँ के साथ बच्चा बाहर आया। उसके साईकल पर लगे बड़े, छोटे गुबारे, छोटी बड़ी कार या कोई बजाने वाले खिलौने सभी उस की तरफ झाक रहे थे । दो घंटे हो गए थे इस एवन्यु दाखल हुए। साईकल की रफ्तार भी धीमी हो चली थी। चेहरा उदास और आँखों में नमी बढने लगी अचानक ही उस ने इक कोठी के आगे साईकल आ लगाई, इक बार बेल्ल बजाई कोई जवाब नहीं आया। उसने फिर बेल्ल बजाई। थोड़ी देर बाद…

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Posted on July 8, 2018 at 1:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल

   

चाहा ये दिल तेरा पाना हम को।
महका के राहों को जाना हम को।

कहते कोई तो अफ़साना हम भी,
कैसे बुनता ताना बाना हम को।

आये जाये मिलकर बैठे बिछड़ें,
कहना जो भी होता पाना हम को।

कैसा होगा अब ये हम का जीना,
जब राहों इन आना जाना हम को।

औरत बन के तुझको भी आना होगा,
क्यूँ होता इलजाम निभाना हम को।

  1. मौलिक व अप्रकाशित

Posted on July 7, 2018 at 3:07pm — 8 Comments

जुआ (लघुकथा)

 ड्यूटी के बाद मैं घर को पैदल चल पड़ा। ऐसा आजकल मैं अकसर ही करता हूँ। क्यूँ कि डाक्टर ने मुझे ज्यादातर पैदल चलने को कहा है। कुछ कदम चलते ही मेरे साथ रिक्शा इक रिक्शा भी चलने लगा।

चलते हुए बार बार रिक्शे वाला रिकशे पर बैठने को कहता रहा।

“बाऊ जी,दस दे देना,मगर मैं चलता रहा, फिर उसने पास आकर कहा,चलो पाँच ही दे देना।"

“अरे भाई, बात पाँच या दस की नहीं, मैंने कहा। मैं बैठना नहीं चाहता।"

मगर इस बार उस के कहने में एक तरला सा लगा, “बाऊ जी, बैठ जाओ न।“

आखिर, मैं रिक्शे…

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Posted on July 4, 2018 at 11:30pm — 9 Comments

बड़ा सवाल(लघुकथा )

गीता पाठशाला से अभी घर पहुंची, उसने आते ही माँ से सवाल किया, “ प्रोजेक्ट पर काम तो हम सब बच्चों ने किया था।”

“हाँ, प्रोजेक्ट तो होता ही है कि सभी बच्चे एक साथ काम करें।” मम्मी ने गीता को समझाने के अंदाज़ में कहा

“तो प्रोजेक्ट हम सभी बच्चों की मेहनत से पूरा हुआ ” गीता ने फिर कहा।

"हाँ " ।

“इस का क्रेडिट भी हम बच्चों को मिलना चाहिए ”, गीता ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा

“मगर इनाम तो हमें नहीं मिला", ये तो प्रिंसिपल को मिला” गीता ने कहा

“हाँ, बच्चे ऐसा ही होता है,…

Continue

Posted on July 3, 2018 at 11:00pm — 9 Comments

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At 6:57pm on May 17, 2025, Erica said…

I need to have a word privately,Could you please get back to me on ( mrs.ericaw1@gmail.com)Thanks.

 
 
 

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